तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
एक तो कोरोना के नियमो की धज्जिया उठाते बसो के संचालक उपर से कोरिया जिले के जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर सहित जिले के अन्य बड़े शहरों में आवागमन की दूसरी सुविधा ना होने के कारण यात्रियों को जिले भर में दौड़ रही खटारा व कंडम वाहनों से सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। आवागमन हेतु जिले में दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण इन दिनों जिले वासियों को जिले भर में दौड़ रही दर्जनों की तादाद में खटारा एवं कंडम पड़ चुकी बसों से यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है । यही वजह है कि बसों में सालभर यात्रियों की भीड़ बनी रहती है। सफर के दौरान यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मा वाहन चालक की होती है ।
विगत वर्षो के मंजर डराने वाले
विगत महीनों में जिलेभर में हुए सड़क हादसों में भले ही लोगों की जनहानि नहीं हुआ हो किंतु विगत वर्षोे में कई बसे जिस तरीके से धू-धू कर सडको पर खाक हुई हैं। और जितना लोगों को आर्थिक नुकसान सहना पड़ा है उसे देखते हुए किसी भी दिन किसी भी स्थान पर कोई बड़ा हादसा हो जाए तो लोगों आश्चर्यचकित नहीं होंगे।
नही होता षासन के नियमो का पालन
शासन के नियमों की बात करें तो परिवहन विभाग के नियम कायदो में यह स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी सवारी गाड़ियों में एक्सपर्ट ड्राइवर के अलावा वाहन भी फिट होना चाहिए । यात्रियों को किराए के अनुसार सुविधाएं मुहैया कराने के नियम है लेकिन विभाग के कायदे कानून केवल कार्यालयों की फाइलों तक सिमट कर रह गये हैं।
यात्रियो की जान आफत में
लिहाजा यात्री ऐसी बसों में सफर करने को मजबूर है जो चलने योग्य ही नहीं है । बसों के अलावा ट्रक, हाइवा, 407 समेत कई कंडम वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ते हुए नजर आ जाते हैं। जिनकी स्थिति बेहद खराब है। इन वाहनों से निजी गाड़ी या पैदल चलने वाले भी सुरक्षित नहीं है । इन मौत के सौदागरो का बेखौफ सडको पर दौड की चपेट न जाने कब कौन कहाॅ आ जाये यह बात भगवान भी नही जानता होगा।
70 फिसद वाहनोके फिटनेस पर सवाल
सफर करना बस में सफर करना पैदल व निजी गाड़ियों से मार्ग पर चलना सुरक्षित नहीं रह गया है 70 फिसदी मालवाहक भी खटारा एवं पूर्ण अवस्था में सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं जिले भर में दौड़ रहे हैं इसके बावजूद जिले के अलग-अलग मार्गों में इस तरीके के वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं इसके लिए संचालक से ज्यादा परिवहन विभाग जिम्मेदार नजर आ रहा है विभाग जिस तरह से आंख मूंदकर बसों को फिटनेस जारी कर रहा है वही जो फिटनेस दायरे में नहीं आते हैं उनसे जानबूझकर नजर फेरने के कारण तो सभी जानते हैं।
साहब हैं मजबूर
इस दौरान हमने कई बार जिला परिवाहन अधिकारी, अरविन्द भगत से इस सबंध में जानकारी लेना चाहा किन्तु हर बार उनका एक ही जवाब रहता है कि मेरे पास कर्मचारी ही नही है फिर मैं अकेले क्या कर सकता हॅू। किन्तु सवाल है कि विभाग की बेबसी से आम लोगो को क्या मतलब। दूसरी ओर षासन को भी इस ओर गंभीरता से विभाग में कर्मी देने की आवष्यकता है।
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