बच्चों के मन से पुलिस का भय निकालने….. 4 साल बाद बना पहला चाइल्ड फ्रेंडली थाना

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


छत्तीसगढ़ के हर जिले में चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस थाने बनाने के आदेष 2016 में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेष के बाद कोरिया जिले में पहला चाइल्ड फ्रेंडली थाना झगराखण्ड में बनाया गया है। इसका अवलोकन करने गत दिवस राज्य यूनिसेफ के मुखिया मार्क जकरबर्ग पहुॅचे। उन्होने कहा कि बच्चों के लिए एक विशेष जगह बनाई गई है दीवारों पर कार्टून कैरेक्टर साथ ही बच्चों के लिए खिलौने रखे गये गये हैं जिससे पुलिस थानों में ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास किया जाना है जिससे बच्चों के मन में किसी भी प्रकार से पुलिस के प्रति भय न रहे।


आधिकारिक के मुताबिक चाइल्ड फ्रेंडली थानों के पूरे स्टॉफ को बच्चों के हितों से संबंधित कानूनी प्रावधानों व सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी दी जाएगी। बच्चों के साथ पुलिस का व्यवहार मित्रवत बनाने के लिए पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। थानों में अलग से महिला-शिशु डेस्क भी होगा। बच्चों को थानों का भ्रमण कराया जाएगा। समय-समय पर ज्ञानवर्धक कार्यक्रम भी कराए जाएंगे। चाइल्ड फ्रेंडली थानों में बच्चों के हित से संबंधित कानूनी किताबें भी उपलब्ध होंगी। इसके अलावा जिला मुख्यालय में पुलिस इकाई के अफसरों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी।

बाल अधिकार सेल भी होंगे स्थापित

प्रदेश में बच्चों के हितों से संबंधित सभी कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पुलिस को अधिक संवेदनशील व कार्यकुशल बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय स्थित अपराध अनुसंधान विभाग में यूनिसेफ की मदद से बाल अधिकार सेल बनाया जा रहा है। बच्चे का पुलिस के संपर्क में आने पर सेल में पदस्थ अधिकारी कानूनी सलाह देंगे। बाल अधिकार व बच्चों से संबंधित कानूनी किताबें खरीदी जा चुकी हैं। यह सेल गुम बच्चे, मानव तस्करी, बाल अपराध व महिला अपराध शाखा के बीच समन्वय भी स्थापित करेगा।

हर जिले में 5 थानो बनाने थे चाइल्ड फ्रेंडली
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के गाइडलाइन के अनुसार जिले में कम से कम 5 थानों को चाइल्ड फ्रेंडली बनाया जाना था। यह गाइडलाइन 4 साल पहले ही राज्य सरकारों के जरिए पुलिस को मिले थे। मगर पुलिस जिले में इसका पालन नहीं करवा सकी। एक कक्ष को इस तरह से तैयार किया जाना था कि बच्चों को कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरने के दौरान भी बचपन का माहौल मिल सके।

यह है उद्देश्य
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों को कानूनी प्रक्रिया के दौरान परेशानी से बचने के लिए थानों को चाइल्ड फ्रेंडली बनाने के लिए गाइड लाइन जारी किया था। जे-जे एक्ट 2015 में बच्चों की देखभाल और सुरक्षा को लेकर कई प्रावधान है। इसी के तहत थानों को चाइल्ड फ्रेंडली बनाने गाइडलाइन जारी की गई थी। गाइडलाइन के अनुसार थानों में एक कक्ष को बच्चों के लिए स्पेशल तैयार करना है। जहां ट्रेनिंग लिए हुए ऑफिसर बच्चों से खेल-खेल के दौरान ही सारी प्रक्रिया को पूरा करेंगे। थानों के दीवारों पर कार्टून कैरेक्टर पेंटिंग, खिलौने और कुछ मनोरंजन के साधन रखे जाएंगे। ताकि बच्चे इन सुविधाओं के बीच ही रहे और उनकी सुरक्षा और देखभाल में कोई कमी न रहे।

ट्रेनिंग लेकर बैठे अधिकारी
थानों में बच्चों के साथ किस प्रकार व्यवहार किया जाए और उन्हें परेशान किए बिना ही कानूनी प्रक्रिया कैसी पूरी की जाए। इसको लेकर जिले स्तर पर बाल इकाई समिति का गठन हुआ था, जो ट्रेनिंग लेकर बच्चों के साथ व्यवहार करने के तरीके सीखती है। ट्रेनिंग लिए हुए अधिकारी ही बाल मित्र थाने की कमान संभालेंगे। ट्रेनिंग लिए हुए अधिकारी दूसरे काम में व्यस्त हो गए है और यह योजना ठप पड़ी हुई है।

जिले में 11 थानो को बनाया जायेगा बाल अनुकूल
चंद्र मोहन ने कहा कि जिले के शेष 11 पुलिस स्टेशनों को भी बाल अनुकूल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में अभिनव छात्र पुलिस कैडेट कार्यक्रम जल्द ही शुरू किया जाएगा। इस दौरान जिले में पुलिस स्टेशन ने लंबित मामलों की दर को घटाकर 1.2 प्रतिशत हो गया और जिले में 97 प्रतिशत लापता बच्चों को खोजने और बच्चों के खिलाफ अपराध को कम करने में सफलता हासिल की है। उन्होने बताया कि गत वर्श जिले भर से 53 लापता बच्चो में से 51 को प्राप्त करने में सफलता मिली है।


महज खानापूर्ति न हो साबित योजना
देखने में आ रहा है कि पडोसी जिलो में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के गाइडलाइन का जिला पुलिस पालन नहीं कर पा रही है। इस दौरान पायास गया कि अन्य जिले में थानों को बच्चों के अनुरूप ढालने के लिए प्लानिंग चल रही थी मगर अभी तक एक भी थाने को चाइल्ड फ्रेंडली थाने के रूप में डवलप नहीं किया जा सका है। हालात ये है कि एक थाना जहां अलग से कक्ष बनाया गया था। अब वह स्टोर रूम बना दिया गया ।

वर्जन…….


बाल अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित सभी मामलों में पुलिस संपर्क का पहला बिंदु होता है और इसलिए वे बाल विवाह, बाल श्रम, बाल यौन शोषण, बाल तस्करी और बच्चों के खिलाफ हिंसा को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस पहल से पुलिस और समुदाय के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
जॉब जकरिया – प्रमुख, यूनिसेफ छत्तीसगढ़

जिले में अधिक बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामले इस क्षेत्र में आने के कारण जिले में पहला चाइल्ड फ्रेंडली थाना झगराखाण्ड में स्थापित किया गया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि पुलिस थानों में भी बच्चों को मित्रवत माहौल दिया जाए, जिससे वे निडर होकर पुलिस से अपनी बात कर सकें। बच्चों के प्रति पुलिस का व्यवहार अच्छा हो, इसके लिए इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
चन्द्र मोहन सिंह – पुलिस अधिक्षक कोरिया

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