तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
कोरोना और ब्लैक फंगस के प्रकोप व भिलाई व दूर्ग में डेंगू के मरिज मिलने के बाद बैकुन्ठपुर में अचानक बढे मच्छरों के आतंक से लोगो को अब डेंगू का डंस सताने लगा है। मच्छरों के बढ़ने से लोगों की नींद उड़ गई है। जिससे लोगों में मलेरिया समेत अन्य संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा सता रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए ठोस उपाय नजर नहीं आ रहा है। मौसम में बदलाव के साथ ही मच्छरों का आतंक तेजी से बढ़ा। इससे बचाव के लिए लोग जहां मच्छरदानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बाद भी मच्छरों का प्रकोप लोगों के नींद पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में लोगों के रातों की नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे लोगों के कामकाज व उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। मच्छरों का आतंक इस कदर है कि अब तो दिन में भी मच्छर काटने लगे हैं। वहीं संक्रामक रोगों के फैलने का भी खतरा बना हुआ है। नगरवासियों का कहना है कि जिम्मेदारो के द्वारा मच्छरों से बचाव के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। डीडीटी का छिड़काव भी कभी भी नहीं किया जाता है। लोगो का कहना है कि षहर नियमित रूप से दवा का छिड़काव किया जाए, ताकि मच्छरों के आतंक से राहत मिल सके। इस दौरान हम यह भी बताते चले कि पूर्व में एैसे ही मामलो में एक सीएचएमओ को राज्य शासन ने एक वर्ष तक के लिए सस्पेंड तक कर दिया था। किन्तु इस समय लगाता नही है कि जिले के अधिकारियो में किसी का कोई डर रह गया है। वहीं पर जिले में 7 वर्ष पूर्व डेंगू के जो मामले सामने आए थे उसकी शुरूआत चरचा से ही हुई थी जब हमने शिवपुर चरचा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से बात की तो उन्होंने कहा कि नालियो की साफ सफाई कराई गई है । उसके बाद ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाएगा ।
इन बिमारियो का है खतरा
मच्छरों से फैलने वाली चार खतरनाक बीमारियां, जानें बचाव के तरीके मच्छर के काटने से डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, और गैस्ट्रोएन्टराइटिस जैसी घातक बीमारियां होती हैं। यह बातें जान लेना इसलिए जरूरी हैं क्योंकि बारिश की वजह से मच्छर पैदा होते है।
सबसे अधिक मलेरिया की रही है षिकायत
मलेरिया-मानसून में सबसे ज्यादा परेशान मच्छरों से होने वाली बीमारियां करती हैं। ऐसी ही एक बीमारी का नाम है मलेरिया। यह बीमारी फीमेल एनोफेलीज मच्छर के काटने से होती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में बुखार, सिरदर्द, बदनदर्द, कमजोरी, चक्कर आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी से बचने के लिए व्यक्ति को पूरी तरह ढके हुए कपड़े पहनने चाहिए। इसके अलावा अपने आसपास साफ-सफाई का भी ध्यान रखें। घर के आसपास जलभराव न होने दें। समय-समय पर मच्छरों को दूर रखने के लिए घर की नालियों के आसपास स्प्रे करवाते रहें।
डेंगू ने ली है जिले में कई जाने
डेंगू-मानसून में मच्छरों से होने वाली यह दूसरी गंभीर बीमारी है। डेंगू से हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गवां देते हैं। इस बुखार से पीड़ित व्यक्ति में सिरदर्द, रैशेज, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, ठंड लगना, कमजोरी, चक्कर आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा लिक्विड डाइट लेनी चाहिए। इसके अलावा इन लक्षणों के नजर आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अब तक विभाग नही हुआ सक्रिय
बारिश और उमस भरे मौसम में जिले में स्वास्थ्य विभाग मलेरिया और डेंगू की रोकथाम की कोशिश में अब तक नही जुट सका है, यही कारण है कि लेकिन जिले के अधिकारियो ने इसके बाद भी डेंगू प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद भी विगत 7 वर्षो के अनुभव से कोई सबक नही लिया है।
मच्छरो से लोग परेशान
मच्छरों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। डेंगू के सबंध में डाक्टरो का कहना है कि डेंगू एक विषाणुजनित रोग है। इसका वाहक एडीज मच्छर की दो प्रजातियां हैं। अगर यह मच्छर किसी मरीज को काटने के बाद अन्य किसी दूसरे व्यक्ति को काटता है तो वह भी बीमारी की चपेट में आ जाता है। इससे बचने का फिलहाल कोई टीका नहीं मौजूद है, सिर्फ सावधानियां ही आपको डेंगू से बचा सकती हैं। इसके मच्छर साफ पानी में भी हो सकता है। रात को ही नहीं दिन में भी लोगों को एतिहात बरतनी चाहिए।
नगर पालिका क्षेत्रो में नही हो रहा फॉगिंग
डेंगू प्रभावित क्षेत्रो में सबधित क्षेत्र के नगर पालिका और नगर निगमो को डेगू मच्छर के उनमूलन हेतु कुछ सरकारी नियम है। जिसमें डेंगू के मच्छरों व लारवा का सफाया करने के लिए सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े आठ बजे का समय उपयुक्त होता है। इस समय हवा का बहाव कम रहता है और लोगों की आवाजाही कम। दवा संबंधित क्षेत्र में जज्ब हो जाती है। दोपहर में दवा दूर तक फैलती है और उसका प्रभाव कम हो जाता है। फॉगिंग की सूचना भी पहले दी जानी चाहिए, ताकि लोग अपने घरों के खिड़की-दरवाजे खोल सकें।
जागरुकता ही बचाव
इस सबंध में जिले के स्वस्थ्य सलाहकार डाॅ प्रिंस जायसवाल बताते हैं कि ठंड के साथ तेज बुखार, सिर मांसपेशियों व जोड़ों में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भूख में कमी, जी मितलाना, मुहं का स्वाद कम होना, शरीर पर लाल चकत्ते, लाल-गुलाबी दानेे, खून की जांच में प्लेटलेट्स एक लाख यूनिट से कम हो जाना। घर और कार्यालय के आसपास सफाई रखें। बर्तन और गमलों में पानी जमा नहीं होने दें। घर में अथवा बाहर जाते समय फूल अस्तीन के कपड़े पहनें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। मच्छररोधी उपकरणों का उपयोग करें। लक्षण दिखने पर डॉक्टर को दिखाए।
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