तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
जिस तरह से लगातार डीजल और पेट्रोल के दामों में वृद्घि हो रही है व कृषि में उपयोग आने वाले उपकरणों पेस्टिसाइड व मजदूरी में जिस अनुपात में वृद्घि हो रही है, उस अनुपात में केंद्र सरकार के द्वारा एमएसपी में वृद्घि नाममात्र ही कही जा सकती है। किसान इन दिनों खरीफ फसल की तैयारी में जुटे हुए हैं, किंतु उन्हें वर्तमान में खरीफ फसल के शुरुआती दौर पर लगने वाली लागत और मूल्य वृद्घि से वे बेहाल नजर आ रहे हैं। बीते दो महीनों में डीजल की अगर बात की जाए तो डीजल में 25 रुपये प्रति लीटर की वृद्घि हुई है, जिससे किसानों की लागत बढ़ सकती है, वहीं दूसरी ओर डीएपी के दामों में सरकार ने तो कमी की है, किंतु अन्य पेस्टिसाइड में वृद्घि यथावत बनी हुई, इसके साथ ही साथ कृषि उपकरण और मजदूरी इन तमाम हालातों ने किसानों की एक तरह से कमर तोड़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। जिले के किसानों के पास कृषि के अलावा और कोई भी आय के साधन नहीं है, जिसके चलते जिले के किसान आज तक कृषि का कार्य भी बेहतर तरीके से कर रहे हैं। बेहतर उत्पादन लेकर एक तरह से अपनी आय बढ़ाने का प्रयास तो कर रहे हैं, किंतु लगातार डीजल के बढ़ते हुए दाम कृषि उपकरण के बढते हुए दाम के अलावा खेती के उपयोग में आने वाले अन्य सामग्री के साथ-साथ बढ़ी मजदूरी ने एक तरह से किसानों की आय में कटौती करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है, किंतु इसे विडंबना ही कही जा सकता है कि किसान अपने उत्पादन का सिर्फ धान ही एक ऐसी फसल है जिसे समर्थन मूल्य पर बेच पाते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य उत्पाद खरीफ की तथा रबी फसल की अगर बात की जाए तो किसानों को समर्थन मूल्य से भी काफी कम दामों पर बाजार में बेचना पड़ता है, जिसके चलते यह कहा जा सकता है कि सरकार समर्थन मूल्य निर्धारित करती है तो बाजार में भी यह व्यवस्था करें कि किसानों को कम से कम समर्थन मूल्य तो मिल पाए।
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