धूमधाम से निकली विश्व आदिवासी दिवस पर विशाल रैली

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Baikunthpur @ Tahkikat News

सुबह से हो रही बारिश के बावजूद 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आज सोमवार को धरमपुरा बैकुन्ठपुर में आदिवासी समाज ने विशाल रैली निकाली। इस विशाल कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। इस रैली का सबसे बड़ा आकर्षण नृत्य रहा, इस दौरान सभी लोग नाचते-गाते दिखे। कार्यक्रम के संबंध में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष शरण सिंह ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा में 23 दिसंबर 1994 को पारित प्रस्ताव के अनुसार 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस घोषित किया गया, 9 अगस्त 1995 को पहला विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मनाया गया। आदिवासी समाज के मानवीय अधिकारों का संरक्षण हो, उसके जल, जंगल, जमीन के अधिकार, अस्मिता, आत्मसम्मान कला संस्कृति और अस्तित्व कायम रहे, एवम शिक्षा का व्यापक जन जागृति एवम प्रयत्नों की आवश्यकता के मद्देनजर में यह दिवस मनाया जाता है।


उन्होंने बताया कि शहर भर में विशाल रैली निकली तत्पश्चात मानस भवन में पूजा की गई। 5वीं अनुसूची के साथ ही वन अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य पर विशेष चर्चा की गई। विश्व आदिवासी दिवस पर कार्यक्रम में अतिथियों ने समाज की एकता और शिक्षा पर जोर दिया। जिले की पारंपरिक अंदाज में ढोल-मांदल के साथ रामानुज स्टेडियम से प्रेमाबाग तक रैली निकाली गई। इस बीच घडी चौक पर सारे आदिवासी नेता ओर आम लोगो ने जमकर डांस किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गुलाब कमरो ने कहा कि विदेश अध्ययन तक के लिए छात्रवृत्ति उपलब्‍ध कराई जा रही है। इससे पूर्व रैली निकाली गई।
इसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। मानस भवन में कार्यक्रम को सबोधित करते हुए भरतपुर सोनहत विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि विश्व के इंडिजिनस पिपुल के मानवाधिकारों को लागू करने और उनके संरक्षण के लिए 1982 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक कार्यदल के उपआयोग का गठन हुआ था जिसकी पहली बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी । आदिवासी समाज की समस्याओ के निराकरण हेतु 21वी सदी में भी विश्व के आदिवासी समाज अपनी उपेक्षा, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा का अभाव, बेरोजगारी एवं बन्धुआ व बाल मजदूरी जैसी समस्याओ से ग्रसित है इन्ही चिंताओ को लेकर में अंतर्राष्ट्ररीय आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है। स्थानिय मानस भवन आयोजित जिला स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया जिसमें शामिल होने जिले से सर्व आदिवासी समाज की भीड़ उमड़ पड़ी।
इस अवसर पर रैली भी निकाली गई और सभी अतिथियों द्वारा समाज के विकास, जागरूक होने एवं संगठित करने पर जोर दिया गया और कार्यक्रम में सभी ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासियों के लिए संविधान में जो प्रावधान है उन्हें उनका हक मिलना चाहिए। शिक्षा एवं नौकरी में आरक्षण से लेकर शासकीय कर्मचारियों के साथ हो रहे प्रताड़ना को रोकने और जल, जंगल एवं जमीन को बचाने के लिए हमें एक होकर लड़ने का आहवान किया गया। इस अवसर पर समाज के प्रतिष्ठत वक्ताओ के द्धारा समाज के लोगों को संविधान के नियमों और अधिकारों को बताया। पांचवीं और छठवी अनुसूची में संविधान में आदिवासी के लिए नियम बना है उसे कोई नहीं छीन सकता।


अकेले लड़ने से हमें कुछ हासिल नहीं होगा। वहीं अन्य वक्ताओं ने भी समाज के विकास, हक के लिए लड़ने, एकता बनाए रखने, नशे से दूर रहने और संगठन पर जोर दिया। सर्व आदिवासी समाज के प्रमुखों द्वारा सर्व आदिवासी समाज की बिंदुओं पर मांग की जिसमें राष्ट्ीय जनजातीय नीति को संसद में पेश करने, छठी अनुसूची लागू करने, बस्तर को पृथक राज्य बनाने, आदिवासियों के प्रताड़ना पर रोक लगाने, नगरीय क्षेत्रों के पदों में आदिवासी को प्रतिनिधित्व करने का हक देने, आदिवासी की जमीन आदिवासी के पक्ष में करने, आदिवासी की जमीन उद्योगों को न देने, पेशा एक्ट लागू करने, आदि मांग शामिल हैं। इस अवसर पर जनकपुर सोनहत विधायक गुलाब कमरो के अलावा पूर्व विधायक चंपादेवी पावले, जिला पंचायत अध्यक्ष रेणुका सिंह, कलावती मरकाम रहे। इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता सर्वाधिक समाज के जिला अध्यक्ष शरण सिंह के द्वारा की गई ।

जहां कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह रामप्रसाद साडिल्य, ज्ञान प्रसाद सोनपाकर ललिता पाव के अलावा सदस्य गणों में माया प्रताप सिंह विश्वास भगत शुकुल साय नागवंशी सर्वजीत सिंह शैलेश खाखा संरोधन सिंह भागीरथ सिंह परमेश्वर सिंह उषा कश्यप श्याम शंकर भगत ए पन्ना सावित्री सिंह गणपत प्रसाद भगत चंद्रिका प्रसाद पैकरा मेवालाल नेटी ज्ञान सास भगत नंदकुमार सोनपाकर सौभाग्यवती सिंह सोनमती कुर्रे डॉ विनय शंकर सिंह डॉ रामस्वरूप चंदे डॉ एसएस सिंह सुरेश सिंह कौशल्या गायत्री सिंह सूर्य प्रताप सिंह डॉ आरपी सिंह विजय कुमार सिंह चुन्नी पैकरा धर्मपाल सिंह अमर सिंह अर्जुन सिंह राजेंद्र पावले जनक सिंह प्रेम सुंदर सिंह श्रवण कुमार सिंह भगवान सिंह विष्णु प्रताप सिंह जगमोहन सिंह विजय सिंह सहित सर्व आदिवासी समाज के सभी लोग मौजूद रहे।

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