Baikunthpur @ Tahkikat News
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय आने वाले दिनों में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना जता रहा है। इस बीच शहर सहित पुरे जिले में वायरल इंफेक्शन का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। वायरल इंफेक्शन के चलते बड़ी संख्या में लोग सर्दी, खांसी, बुखार के चलते अस्पताल का रुख कर रहे है। जिला अस्पताल में ही रोज 400 से 500 से ज्यादा ओपीडी दर्ज की जा रही है। इसमें से 300 से अधिक लोग सर्दी, खांसी, बुखार के इलाज के लिए आ रहे है। डॉक्टरो का कहना है कि इन दिनों ओपीडी में आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा वायरल इंफेक्शन के मरीज है। जिनका सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत के चलते इलाज किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को भर्ती भी किया जा रहा है।
नौनिहालो पर टूटा बीमारियो कहर
दूसरी ओर कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं के बीच शहर में मौसमी बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। जिला अस्पताल में सौ से ज्यादा मरीज रोज पहुंच रहे है। जिसमें से 90 प्रतिशत मरीज तो सर्दी, खांसी, बुखार के है। वायरल इंफेक्शन का शिकार सबसे ज्यादा बच्चे हो रहे है। रोजाना डेढ़ सौ से ज्यादा ओपीडी शिशु रोग विभाग में हो रही है। इसमें से 10 से 15 बच्चों को रोजाना भर्ती किया जा रहा है। बैकुन्ठपुर के जिला अस्पताल में 20 बेड का शिशु वार्ड की स्थिति है कि पूरा वार्ड भरा हुआ है। वही पर 20 से 25 बेड का नया वार्ड गित 4 महिने से बनकर तैयार है परन्तु जिला अस्पताल प्रबंधन के लापरवाही के कारण उसे अब तक चालू नही किया जा सका है। जिसका नतीजा है कि नौनिहालो को जमीन पर गददे बिछाकर ईलाज दिया जाना मजबूरी बन गया है।
जिम्मेदार बोले सितंबर में एवरेज से कम हुई मृत्यु
जिला अस्पताल बैकुंठपुर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर डॉक्टर भास्कर दत्त मिश्रा का कहना है कि जिला अस्पताल में औसतन हर महीने 5 बच्चो की मौत होती है जबकि सितंबर में अब तक 3 मौतें हुई है । वहीं पर उन्होंने बताया कि हर महीने शिशु वार्ड में लगभग डेढ़ सौ लोगों की भर्ती होती है। जबकि सितंबर के महीने में मौसमी बामारियो के कारण इस बार वायरल फ्लू के प्रकोप के कारण अब तक 230 लोगों की भर्ती की जा चुकी है। जबकि आज रविवार के दिन अस्पताल में 42 बच्चों का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। वहीं पर विगत 3 महीनों में 13 बच्चो की मौतें हुई जिला अस्पताल में हुई है। तीन मौतों से उपजे विवाद के संबंध में उन्होंने बताया कि जिन 3 बच्चों का सितंबर में मृत्यु हुई है उसमें दो हार्ड पेशेंट थे जबकि एक व्यक्ति गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में लाया गया था जिसकी मौत 3 से 5 घंटे के बीच हो गई । उन्होंने बताया कि इस दौरान सभी भर्ती बच्चों का एंटीजन टेस्ट कराया गया था जबकि इसमें से एक भी पॉजिटिव नहीं आए। किंतु वर्तमान में उपजे विवाद के तहत एक बार पुनः सभी का आरटीपीसीआर टेस्ट कराया जाएगा । जबकि सितंबर के महीने में 230 भर्ती मरीजों में से 5 को मेडिकल अस्पताल के लिए रिफर किया गया है।
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