Baikunthpur @ Tahkikat News
कोरोना काल में लॉकडाउन में प्रभावित हुआ सबकुछ अनलॉक के बाद धीरे-धीरे पटरी पर लौट आया, लेकिन शहर में लोगों की सुविधा के लिए शुरू की गई सिटी बस सेवा 9 महीने बाद भी ‘अनलॉक’ नहीं हुई है। सभी सिटी बसें चिरमिरी नगर निगम के गोकुल नगर के ननि के बस स्टैंड में बने डिपो में खड़ी है। हालत तो यह हो गये है कि ज्यदातर बसो के ठिक ठाक पूर्जो को गायब कर बसो को सिर्फ कबाड कर रखा है। मिली जानकारी की माने तो इस समय एक भी बस सडक पर चलने लायक नही रह गया है। बसों के टायर, बैटरी समेत अन्य पार्ट्स पार हो चुके हैं। अनलॉक के बाद से ही सिटी बसों को दोबारा परिचालन संभव नजर नही आ रहा है।
दोगुना किराया देने पर विवष लोग
सिटी बस के नहीं चलने से चिरमिरी-खडगवा-बैकुन्ठपुर-मनेन्द्रगढ के की ओर आवाजाही करने वाले यात्री निजी बस और ऑटो के भरोसे हैं। इसमें सिटी बस से दोगुना किराया देकर यात्रियों को आवाजाही करनी पड़ रही है। वहीं घंटों इंतजार भी करना पड़ता है। अंधेरा होने पर ऑटो चालकों के तैयार नहीं होने पर शहर से उपनगरीय क्षेत्र तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। इतने पर भी जनप्रतिनिधि भी आवाज नहीं उठा रहे हैं।
जनसुविधा के लिए प्रशासन ने साधी चुप्पी
जिले में कामकाज के सिलसिले में रोजाना 10 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही यात्री वाहनों में होती है। इसमें मजदूर, ऑफिस व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी व शिक्षा कर्मी भी शामिल होते हैं। खरीदी और सफर समेत अन्य कार्य से भी यात्री एक से दूसरी जगह आवाजाही करते हैं। सिटी बस के नहीं चलने से सभी वर्ग परेशान हैं। जनसुविधा के लिए सिटी बस सेवा अहम होने के बाद भी प्रशासन इसे शुरू कराने सुध नहीं ले रहा है।
पहले खूब कमाया फिर कर दिया हाथ खडा
केंद्र की योजना के तहत शहरी क्षेत्र में लोगों को सस्ती व सुलभ यात्री परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने सिटी बस सेवा शुरू की गई। टेंडर लेने वाले ऑपरेटर को 25 सौ रुपए मासिक किराए पर बसों को दिया। कम किराए में नई बसों के मिलने के बाद ऑपरेटर ने खूब कमाई की। अब बसों के कंडम होने पर मरम्मत में बड़ा खर्च संभावित है। यही नही बलिक यह भी कहा जा रहा है कि इन्ही लोगो के द्धारा मिलीभगत कर बसो के किमती सामानो को गायब कर बसो को कंडम बना दिया गया।
पांच साल पहले शुरू की गई थी बस सेवा
जिले में साढ़े पांच साल से भी पहले शुरू हुई सिटी बस सेवा अब तक पटरी पर नहीं आई है। सात सिटी बसों के साथ इसकी शुरुआत हुई। डेढ़ साल पहले तो सभी बसों का संचालन बंद हो गया था। खड़ी बसें बिना उपयोग के कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। पूर्व में जिले की सभी सात बसे तय रूटों में चला करतीं थी। जनप्रतिनिधियों द्धारा सभी बसों का संचालन करने की मांग की जा रही है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जिलेवासियों को नहीं मिल पा रहा है।
खड़ी बसों का हो भौतिक सत्यापन
प्रारंभ में लगातार क्षेत्रवासियों की मांग करने के बाद भी कई बसों का परिचालन नहीं किया। यहां बसें टर्मिनल में खड़ी हैं, उनका भौतिक सत्यापन भी जरूरी है। जानकारी के अनुसार इनमें से कई बसों के किमती पार्ट्स गायब हैं। यहां तक चके भी नदारद हैं और कुछ के पाटर्स को खराब बताया जा रहा है। बसें सड़क पर चली ही नहीं है ंतो आखिर खड़े-खड़े बसों में खराबी कैसे आई, यह जांच का विषय है।
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