51 साल बाद दीपावली पर अदभुत संयोग में लोग करेंगे लक्ष्मी पूजन

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करीब 51 साल बाद इस दीपावली विलक्षण नक्षत्र के बीच महालक्ष्मी का पूजन करने का योग बन रहा है। गुरुवार को चित्रा व स्वाति नक्षत्र के बीच लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त है, इस बेला में प्रति और चतुस्पद योग जो दुर्लभ योग है, वह भी बन रहा है। जिसके मथुरा में सिंह लग्न में पड़ने के मानक समय के अनुसार गोधूलि बेला शाम 5.30 बजे से 8.15 बजे तक रहेगी। ये स्थिर लग्न वृषभ लग्न रहेगी व रात्रि बेला में चित्रा स्वाति का संयोग प्रीति और चतुस्पद योग निशीथ बेला में सिंह लग्न रात्रि 12.40 से 3 बजे के बीच रहेगी। ऐसा संयोग 51 साल बाद इस दीपावली को पड़ रहा है।

सर्व समाज के लोग मनातें हैं दिवाली


हर समाज का रीति-रिवाज एवं परंपरा भले ही अलग-अलग हो, लेकिन खुशियों की रंगत एक जैसी होती है। दीपावली का त्योहार विविधता और खुशियों से भरा रहता है। इस पर्व पर हिंदू समाज धन-धान्य की देवी महालक्ष्मी की पूजा करेगा, तो जैन समाज तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस मनाएगा। सिख समाज अपने छठें गुरू गोविंद सिंह की रिहाई का जश्न। मुस्लिम और क्रिश्चयन समाज के लोग हिंदू समाज में अपने परिचतों और आसपास के लोगों के बीच पहुंचकर खुशियां बांटेंगे, एक-दूसरे को शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। यानी विविधता में एकता का सूत्र दीपोत्सव में भी देखने को मिलता है।

गद्दी पूजन से शुरू होता है दिन


अग्रवाल समाज मुख्य रूप से व्यापार-व्यवसाय में अग्रणी है। समाज के लोग सबसे पहले पारंपरिक रूप से गद्दी पूजन करने के बाद ही अपना व्यवसाय शुरू करते हैं। यह परंपरा चली आ रही है। लक्ष्मी पूजन के दिन पूरे विधि-विधान से गद्दी की पूजा करके दिन भर व्यापार करते हैं। शाम को दुकान और घरों के सामने रंगोली सजाकर महालक्ष्मी पूजन करते हैं 21 और 51 दीप तिजोरी से लेकर कोने-कोने में रखते हैं।

जैन समाज ज्ञान पुंज का दीपक


जैन समाज का मानना है दिवाली के दिन भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण हुआ था। समाज की मान्यता है कि इस पर्व को निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं। संपूर्ण ज्ञान के प्रकाश पुंज भगवान महावीर को समर्पित दीप जलाते हैं। इसके साथ ही वैदिक रीति-रिवाज से लक्ष्मी पूजन भी करते हैं।

सिख समाज गुरूद्वारे में जलाते हैं दीप


सिख समाज दिवाली के दिन अपने पंथ के छठवें गुरू गोविंद सिंह की रिहाई का जश्न बनाता है। सिख समाज के लोग बताते हैं कि दीपोत्सव के दिन उनके समाज के लिए खास होता है। हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के मुगलशासक से लोहा लेने वाले गुरू गोविंद सिंह को कैद कर दिया गया था। उनकी रिहाई दिवाली के दिन हुई थी। इस पर्व पर समाज के लोग गुरूद्वारे में अरदास कर रोशनी करते हैं, दीप जलाकर गुरू को नमन करते हैं।

सिंधी समाज सनातन संस्कृति का पालन


सिंधी समाज दीपावली का पर्व सनातन संस्कृति के अनुरूप मनाता है। शहर में बसे सिंधी भाई बताते हैं कि दिवाली के दिन भगवान राम की विधि-विधान से पूजन करते हैं। पारंपरिक पकवान दाल पकवान और माजून बनता है। समाज में घर-घर महालक्ष्मी पूजन की कथा और दीप जलाकर खुशियां मनाते हैं। रिश्तेदारों और परिचितों के घर जाकर दिवाली की खुशियां बांटते हैं।

दक्षिण भारतीयो का अपना अंदाज


केरला और आंध्रा के लोगो की अपनी परंपरा यहॉ से बैकुन्ठपुर में आकर रहने वालें बताते हैं कि उनके मूल प्रदेश में दीपावली का पर्व यहां जितनी खुशियों के साथ मनाया जाता है, वैसा नहीं है। परंपरा के अनुसार कार्तिक मास में समाज के लोग सुबह नदी-तालाब में स्नान करने करते हैं। अपनी संस्कृति के अनुसार ओणम और गुड़ी पड़वा का त्योहार धूमधाम से मनाते हैं। कोरिया की संस्कृति में रच-बस गया यह समाज ओणम और गुड़ी पड़वा उत्सव की तरह दिवाली पर्व भी मनाता है। घर-घर रंगोली बनाते हैं, दीप जलाते हैं।

मुस्लिम समाज के लोग खुशियों में होते हैं शरीक


मुस्लिम समाज के बच्चे दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाते हैं, पटाखे फोड़कर जश्न मनाते हैं। शहर में मुश्लिम पूजन में शामिल नहीं होता है किन्तु हिंदू समाज के परिचितों और दोस्तों की खुशियों में शामिल होता है, जिस तरह ईद का पर्व मनाया जाता है। लोगों के घर जाकर दिवाली की बधाई देते हैं, उपहार भेंट करते हैं। इसी तरह क्रिश्चयन समाज के लोग अपने आसपास के लोगों के लोग के साथ खुशियां बांटते हैं।

दिया और सजावटी सामानो की धूम


मिट्टी के बने डिजायनर दीयों की मांग भी इस बार ज्यादा है। दुकानदारों के मुताबिक, आर्टिफिशियल रंगोली भी बाजार में मौजूद हैं। चौखट पर लगने वाली शुभ दीपावली की बेल और राजस्थानी झूमर भी खूब बिक रही है। लक्ष्मीजी और गणेशजी के साथ का होम डेकोरेशन सेट भी खूब बिक रहा है। शहर के घडी चौक पर मिट्टी के डिजायनर दिये 10रु प्रति पीस की दर से खुब बीक रहे है। तो दूसरी ओर सामान्य मिटटी का दिया 10रु प्रति दर्जन की दर से बीक रहा है।

जुआ भी जारी है जमकर


जुआ खेलना हमारे देश में सामाजिक बुराई मानी जाती है और सरकार ने भी इस पर पाबंदी लगा रखी है, लेकिन ज्योति पर्व दीपावली पर जुआ खेलने की परम्परा सदियों से चली आ रही है क्योंकि इस त्योहार पर लोग जुआ शगुन के रूप में खेलते हैं। मान्यताओं के अनुसार दीपावली पर जुआ खेलने को बुराई नहीं समझा जाता है। ऐसा देखा जाता है कि लोगों ने दीपावली पर शौक या शगुन के रूप में जुआ खेलने की शुरुआत की और उसमें हारने पर हारी हुई रकम हासिल करने के लिए आगे भी जुआ खेला और उन्हें इसकी लत लग गई। अगर जुआ खेलने वाला दीपावली को जीतता है और जीतने की लालसा में अगले दिन भी खेलता है तो वह भी कभी कभी इसके लत का शिकार हो जाता है। जानकारों की माने तो देश की आधी आबादी करीब 45 प्रतिशत लोग दीपावली जुआ खेलते हैं। इनमें 35 प्रतिशत लोग ही शगुन के तौर पर जुआ खेलते हैं लेकिन दस प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं। जो पक्के जुआरी होते हैं और किसी भी मौके पर जुआ खेलने से परहेज नहीं करते हैं।

फल-सब्जीयो के बढे


एक बार फिर से फल एवं सब्जी के दामो में बढोत्तरी देखी जा रही है। सब्जी मंडी के विक्रेताओ का कहना है कि आलू नया 40, पुराना 20 रु, प्याज 50, टमाटर 50, बैगन 40, फूलगोभी 100, पत्ता 40, गाजर 100, मिर्च 80, शिमला मिर्च 60, पालक 40, मेथी 100, लाल भाजी 20, धनियां 100, परवल 60 की दर से बीक रही है। वही पर बाजार में बीक रहे फलो में केला 40 से 50 दर्जन, सेव 80-100रु, अनार 110-120, संतरा 60-70, अनानाश 70रु प्रति नग, नाशपति 50रु प्रति किलो की दर से बेची जा रही है।

मिइाईयो के दाम आसमान पर

शहर के प्रतिष्ठीत मिष्ठान केन्द्र जोधपुर राजस्थानी स्वीटस से ली गई जानकारी के मुताबिक शहर का सबसे महंगा बर्फी काजू किस्टा 1000रु, काजू कलश 800, काजू पान 800,काजू रोल 800,काजू कतरी 600,हीरामणी 320,डा्रईफूट लडडू 480, गोद की लडडू 440, मलाई चाप 300, चमचम 260, मसूर दाल बर्फी 280,गुलाब जामुन 260,बेसन की लडडू 160 और बेसन की बर्फी 280रु की दर से बीक रही है।

होगी गोर्वधन पूजा

शुक्रवार को होने वाली गोर्वधन पूजा के पीछे मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत अपनी अँगुली पर उठाकर इंद्र के कोप से डूबते ब्रजवासियों को बनाया था। इसी दिन लोग अपने गाय-बैलों को सजाते हैं तथा गोबर का पर्वत बनाकर पूजा करते हैं। अगले दिन भाई दूज का पर्व होता है। दीपावली के दूसरे दिन व्यापारी अपने पुराने बहीखाते बदल देते हैं। वे दूकानों पर लक्ष्मी पूजन करते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से धन की देवी लक्ष्मी की उन पर विशेष अनुकंपा रहेगी। कृषक वर्ग के लिये इस पर्व का विशेष महत्त्व है। खरीफ की फसल पक कर तैयार हो जाने से कृषकों के खलिहान समृद्ध हो जाते हैं। कृषक समाज अपनी समृद्धि का यह पर्व उल्लासपूर्वक मनाता हैं।

चरचा में होगी काली पूजा


चरचा में हर वर्ष की भांती इस वर्ष भी चरचा में मां काली की पूजा की जा रही है। सुभाष नगर के दूर्गा पंडाल में विगत 26 वर्षो से होती आ रही है। यहां आसपास ही नहीं दूसरे जिला के लोग भी पूजा-अर्चना करने आते हैं। वही पर चरचा के ही काली मंदिर में प्राचिन काल से ही पूजा भेग भन्डारा होता आ रहा है। यहां पर तामसी विधि से पूजा करना बताया गया। काली पूजा की शुरुआत अमावस्या की रात्रि मे 12 बजे के बाद का समय आधा शक्ति का माना गया है इस समय सारा संसार निंद्रा मग्न होती है तथा माँ काली जागृत होती है यह काल एक प्रकार से काली रात या दस महाविद्याओं में मां काली का स्थान सबसे अहम है। काली शब्द काले रंग का प्रतीक है। इसी वजह से हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं । वो असल में सुन्दरीरूप भगवती दुर्गा का काला और डरावना रूप हैं, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी। उनको खासतौर पर बंगाल और असम में पूजा जाता है क्षेत्र के काली पूजा आयोजन की तैयारी ने जोर पर है। स्थानीय लोगों की मानें तो यहां तन-मन से मां काली की कामना करने से उनकी कामना अवश्य पूर्ण होती है। काली पूजा के प्रति भी लोगों में काफी खुशी देखी जा रही है।

धूम-धड़ाके में कान का भी रखें ध्यान


दीपावली तेज आवाज वाले पटाखे व बम आपके कानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस संबंध में डॉ. प्रिय जयसवाल ने बताया कि तेज आवाज की वजह से कान के अंदरूनी भाग में स्थित संवेदी तंतुओं पर विपरीत असर पड़ता है। कई बार शोर के कारण लोगों के कान का पर्दा तक फट सकता है। हर साल दीपावली के बाद कई मरीज बहरेपन के शिकार हो जाते हैं। इसके लिए सबसे पहले पटाखों से जितना हो सके दूर ही रहें। शोर की तीव्रता कम करने के लिए कानों में ईयर प्लग या इयर मफ्रलर का प्रयोग करें।

पटाखों को फोड़ने 2 घंटे का समय


राज्य शासन द्वारा पटाखों को फोड़ने की अवधि 02 घंटा निर्धारित की गई है। दीपावली पर रात्रि 08 बजे से रात्रि 10 बजे तक, छठ पूजा प्रातः 06 बजे से प्रातः 08 बजे तक, गुरू पर्व रात्रि 08 बजे से रात्रि 10 बजे तक तथा नया वर्ष, किसमस में रात्रि 11.55 बजे से रात्रि 12.30 बजे तक पटाखा फोड़ने की अनुमति होगी। उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुरूप कम प्रदूषण उत्पन्न करने वाले इम्प्रूव्ड एवं हरित पटाखों की बिक्री केवल लाईसेंस्ड ट्रेडर्स द्वारा की जा सकेगी। केवल उन्हीं पटाखों को उपयोग के लिए बाजार में बेचा जा सकेगा, जिनसे उत्पन्न ध्वनि का स्तर निर्धारित सीमा के भीतर हो। सीरीज पटाखे अथवा लड़ियों की बिक्री, उपयोग एवं निर्माण प्रतिबंधित किया गया है। पटाखों के ऐसे निर्माताओं का लाईसेंस भी रद्द करने के निर्देश दिये गये हैं, जिनके द्वारा पटाखों में लिथीयम, आर्सेनिक, एन्टिमनी, लेड एवं मर्करी का उपयोग किया गया है। ऑनलाईन अर्थात ई-व्यापारिक वेबसाईटों जैसे फ्लिपकार्ट, अमेजॉन आदि से पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगा। केवल हरित पटाखों का विक्रय एवं उपयोग सुनिश्चित किया जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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