अन्नदाताओ के मस्तक पर टिका फूलमाला व अंगवस्त्र भेंटकर धान खरीदी का आरम्भ…….

Estimated read time 1 min read

टोकन कटाने वाले किसान धान लेकर सहकारी समितियों में पहुंचे

Baikunthpur @ Tahkikat News

पूरे प्रदेश सहित कोरिया जिले में भी आज से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हो गयी है। कल धान बेचने के लिए टोकन कटाने वाले किसान आज सुबह से ही समितियों में धान लेकर बेचने पहुंच रहे हैं। कोरिया जिले में आज 28 धान उपार्जन केंद्रों में 143 किसानों का 4 हज़ार 358 क्विंटल से अधिक धान खरीदा जा रहा है। आईजी सरगुजा अजय यादव एवं कलेक्टर कोरिया श्याम धावड़े ने बैकुंठपुर के जामपारा खरीदी केन्द्र पहुॅचकर पहले पूजा-अर्चना व फीता काटकर एवं अन्नदाताओ को तीलक लगा फूलमाला पहना और किसानो को अंगवस्त्र भेअ कर धान खरीदी की शुरुआत की। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत कुणाल दुदावत भी जसमपारा समिति प्रबंधक प्रभाकर सिंह व अन्नपूर्णा सिंह उपस्थित रहे।

इसे पूर्व समिति पदाधिकारियों से बारदाने, तौल, रोस्टर आदि की जानकारी ली। समिति के पदाधिकारियों ने किसानों के धान की गुणवत्ता और उसमें नमी की जांच कर धान की तौलाई की। खरीदी गई मात्रा को किसानों की ऋण पुस्तिका में दर्ज कर बेचे गये धान का दाम सीधे किसानों के बैंक खातों में डिजिटल तरीके से जमा किया जायेगा।
धान खरीदी के पहले दिन जामपारा में 20, छिंदडांड में 02 और सरभोका उपार्जन केंद्र में 07 किसानों को धान बेचने के लिए टोकन जारी किया गया है। किसान धान लेकर समितियों में पहुंचना शुरू हो गये हैं। कॉमन धान का समर्थन मूल्य एक हजार 940 रूपए प्रति क्विंटल और ए ग्रेड धान का समर्थन मूल्य एक हजार 960 रूपए निर्धारित किया गया है। मक्का एक हजार 870 रूपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा।

इस बार राज्य के किसानों से एक दिसंबर 2021 से 31 जनवरी 2022 तक नकद और लिकिंग में धान की खरीदी होगी। प्रदेश के किसानों से अधिकतम 15 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तक धान खरीदा जाएगा। समर्थन मूल्य पर किसानों से मक्का की खरीदी एक दिसंबर 2021 से 28 फरवरी 2022 तक की जाएगी। मक्का खरीदी की अधिकतम सीमा 10 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित की गई है। सहकारी समितियों में शासकीय अवकाश के दिनों को छोड़कर सप्ताह में सोमवार से शुक्रवार तक धान की खरीदी होगी। इसके लिए किसानों को रविवार से शुक्रवार तक सुबह साढ़े नौ बजे से शाम पांच बजे तक टोकन जारी किये जायेंगे।

कोचिया, बिचौलियों फिर सक्रिय

समर्थन मूल्य को लेकर शासन ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। इसके तहत शासन की नजर इस बार भी कोचिया और बिचौलियों पर है। लिहाजा जिले में उड़नदस्ता दल गठित की गई है। दरअसल बताया जा रहा है कि बिचौलिया और कोचिया पटना, और छिदिया सरभोका समेत अधिकांश क्षेत्रो में किसानों से संपर्क कर रहे हैं जो अपने हिस्से का पूरा धान बेचने के बाद भी उनके खाते में धान खपाने की गुंजाइश बना रहे है। इसके लिए कमिश्न के तौर पर किसानो को राशी भी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि बिचौलिए और किसानों के बीच समझौता भी दिलचस्प होता है। अपने खाते में धान बेचने के एवज में किसान को बोनस की राशि दी जाती है। समर्थन मूल्य की राशि बैंक खाते से निकालकर किसान कोचिया को दे देते हैं। बोनस की राशि अपने पास रख लेते हैं। जबकि अधिकारियो किसान इस बार ऐसे करते पाए गए तो उनको ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। अगले वर्ष धान बेचने पर रोक लगा दी जाएगी। साथ ही समिति के कर्मचारी के विरु्द्ध विभागीय कार्रवाई की भी जाएगी।

खरीद में देरी का लाभ बिचौलियों को

देखने में आ रहा है कि जिले में बहुत से किसान ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी समितियो में धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन पैसे की जरूरत की वजह से अपना धान खुले बाजार में 12 सौ से 13 रुपये क्विंटल के भाव पहले ही बेच चुके हैं। इसी तरह अच्छे किस्म का धान उत्पादन करने वाले बड़े किसान भी पंजीयन तो कराते हैं परंतु खुले बाजार में कीमत कहीं अच्छी मिलने के कारण सरकारी मंडी में नहीं बेचते हैं। बिचौलिये ऐसे ही किसानों के पंजीयन पर अपना धान सरकारी मंडी में खपा देते हैं।

धान की सबसे ज्यादा कीमत


छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान के लिए प्रति क्विंटल 2500 रुपये का भुगतान करती है। यह देश में सर्वाधिक है। यह राशि पिछले वर्श दो हिस्सों में मिली है। केंद्र से घोषित समर्थन मूल्य का भुगतान तुरंत कर दिया जाता है। बाकी अंतर की राशि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किस्तों में दी गई ।

गड़बड़ी रोकने बरत रहें सख्ती

धान खरीदी में गड़बड़ी की आशंका सरकार को भी है। यही वजह है कि सरकार पिछले वर्ष धान के रकबे और गिरदावरी रिपोर्ट को लेकर सख्त है। पटवारियों को गिरदावरी रिपोर्ट के साथ फोटो भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह खेती के रकबे में केवल उतने हिस्से को ही शामिल किया गया है, जिनते में बुआई हुई है। छत्तीसगढ़ सरकार देश में सबसे ज्यादा कीमत पर किसानों से धान खरीदती है। राज्य सरकार अपने राज्य के किसानों हित में यह कर रही है। दूसरे राज्यों से बिचौलियों के माध्यम से आने वाले धान को रोकने के लिए सीमाओं पर सख्त जांच के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के किसानों का हक न मारा जाए, इसके लिए गिरदावारी से लेकर पंजीयन और खरीदी व्यवस्था में कई सुधार किए गए हैं।

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours