कांग्रेस ने 2 पार्षदो समेत 4 को किया पार्टी से बाहर
बैकुन्ठपुर से नविता शिवहरे व षिवपुर चरचा से लालामुनि बनी अध्यक्ष
सत्ता की लड़ाई में जीता वही है जिसके पास रणनीति अच्छी रही। इस दौरान जहां भाजपा के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने 2 दिन पहले ही बातचीत में हमें अब साफ कर दिया था कि हम बैकुन्ठपुर एवं शिवपुर-चरचा दोनों ही नगरीय निकायो में बहुमत नहीं होने के बावजूद भी पद पर काबिज हो जाएंगे और उनकी रणनीति एवं उनकी बात सही साबित हुई । जहां पर कांग्रेसी पार्षदो ने बगावती तेवर अपनाया और जमकर क्रास वोटिंग कर अपने ही पार्टी के उम्मीदवार को कुर्सी के दौड में हरा दिया।
इस दौरान परिणाम आने के बाद स्थानीय नेतृत्व से जिले के दोनों नगरिय निकायो के प्रभारी षिव डहरिया बेहद खफा नजर आये। उन्होंने चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस कार्यालय में पार्षद कांगस्रे जिला अध्यक्ष एवं संसदीय सचिव को तलब कर चुनाव परिणाम को लेकर अपनी तीखी नाराजगी व्यक्त की है। इस दौरान बताया जा रहा है मंत्री शिव डहरिया बैकुन्ठपुर नगर पालिका के परिणाम से नाराजगी के साथ ही रायपुर के लिए रवाना हो गये। वही पर जानकार आने वाले दिनों प्रदेष कांग्रेस चुनाव परिणाम के जिम्मेदारो पर कोई बड़ी कार्रवाई कर सकते हैं। वही पर चुनाव परिणाम आने के कुछ देर बाद ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने 2 कां्रगेसी पार्षद मुर्सरत जहा व अहमदुल्ला फिरोज और आफताब अहमद व रियाज अहमद को पार्टी से निष्काषित कर दिया।
आज 2022 की 1 तारीख को जिले के दोनों नगरीय निकाय को उनके नए मुखिया मिल गए हैं। इस दौरान दोनों ही नगरीय निकायों में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद भी कांग्रेस मुख्यमंत्री के नाक की सीट पर अपने तमाम राणनीतिक चालो के बावजूद गवां बैठी। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर के नगर पालिका में अपने उम्मीदवार को नहीं जीता पाए । इससे कांग्रेसी नेतृत्व क्षमता पर सवाल खडे कर दिये हैं। लगातार क्रास वोटिंग की बात पहले से ही बात सामने आने के बावजूद वो इसको रोक नही पाई।
कांग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस धीरे-धीरे कुर्सी से दूर होती चली जा रही थी और इसी का परिणाम रहा कि बैकुन्ठपुर नगर पालिका में आज सुबह हुए मतदान में भाजपा के 07 पार्षद होने के बाद मतदान में क्रॉस वोटिंग के सहारे 10 वोट प्राप्त हुए । उसके बाद जब भाजपा और कांग्रेस की स्थिति टाई की हुई तो वहां पर चिट सिस्टम के द्वारा भाजपा की नविता शिवहरे कांग्रेस के साधना जायसवाल को हरा कर बैकुन्ठपुर नगर पालिका की नयी अध्यक्ष बनी । जबकि सत्तारुढ कांग्रेस के 11 पार्षद एवं 1 निर्दलिय का साथ होने के बावजूद 10 वोट ही मिले।
उपाध्यक्ष बने आशीष यादव
वहीं पर उपाध्यक्ष पद पर फिर परिस्थितियां पलटी जहां पर बैकुन्ठपुर में 20 पार्षदों में से कांग्रेस के आशीष यादव को 12 पार्षदों ने अपना वोट दिया। जबकि भाजपा के उपाध्यक्ष पद के दावेदार भानु पाल को मात्र 8 वोट प्राप्त हुए। जिससे यह तो साबित हो गया कि दोनों ही पदों के लिए क्रास वोटिंग जबरदस्त तरीके से की गई ।
नगरिय प्रशासन मंत्री बैंठे रह गये ले गई भाजपा सीट
सबसे अजीब विडंबना तो यह होगी कि नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया स्वयं बैकुन्ठपुर में मौजूद रहे और भाजपा ने कांग्रेस के पैर के नीचे से नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी छिन लिया। इस दौरान संसदीय सचिव एवं स्थानीय विधायक अंबिका सिंह देव के नेतृत्व क्षमता पर भी सवालिया निशान लग गए हैं जहां नगर पालिका कैंपस में ही कांग्रेसी पार्षदों सर्मथको द्वारा ही उनके खिलाफ नारेबाजी किया जाना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण कहा जाएगा एवं उनके निर्णय पर प्रश्नचिन्ह लगाने का कार्य किया।
शिवपुर चरचा में में जमकर पडे क्रास वोट
वहीं पर शिवपुर चरचा में अध्यक्ष पद के लिए पहले से ही कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत था इसके बावजूद वहां पर कांग्रेस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार लालमूनि यादव को 15 में से 10 मत प्राप्त हुए । जबकि उनके विरोधी अरुण जायसवाल को मात्र 5 मत प्राप्त हुए । दूसरी ओर शिवपुर चरचा में उपाध्यक्ष पर पर परिणाम ठिक इसके उलट रहा। जहा कांग्रेस के अधिकृत उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार रेशमा परवीन के खिलाफ क्रास वोटिंग हुआ। जिन्हे 7 वोट मिले तो भाजपा के राजेश सिंह को 8 मत प्राप्त हो गए। जिले के दोनों ही नगरीय निकायो में जमकर क्रास वोटिंग का खेल खेला गया।
धरी रह गई कांग्रेस की रणनिति
इसके बाद कांग्रेस स्कोर अपनी नीतियों और निर्णयों के संबंध में आने वाले दिनों में विचार करना होगा अन्यथा विधानसभा का चुनाव बहुत अधिक दिन दूर नहीं है और यदि यही रुख रहा और इसी तरह से कांग्रेस में गुटबाजी हावी रही तो फिर कांग्रेस को अपनी सीट बचाने मुश्किल पड़ जाएगी । वही इस संबंध में कांग्रेसी नेता आफताब अहमद ने अपने 2पार्षदों समेत कांग्रेस छोड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि मैं किसी भी पार्टी में चला जाऊंगा किंतु कांग्रेस में अब नहीं रहूंगा। उनके इस निर्णय ने कांग्रेस के रणनीतिकारों पर सवाल ही नहीं उठाया बल्कि बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह भी खड़ा कर दिया है । अब देखना होगा कि आने वाले समय में कांग्रेस इस अप्रत्याशित परिणाम के बाद आगे कैसी रणनीति अपनाती हैं और धीरे-धीरे संगठन में उठने वाले विरोध से कैसे नहीं निबटती है या फिर कांग्रेस के अर्तंकलह को भाजपा अपने में समेटने में कामयाब हो जाती है।
sd






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