मोदी सरकार ने खरीफ सीजन के मध्य खाद की कीमत में पहले बढ़ोतरी की और बाद में किसानों के दबाव में घटा दिया। तब तक बड़ी संख्या में किसानों ने बढ़ी हुई कीमत पर खाद की खरीदी कर ली थी। इन किसानों को अंतर की राशि लौटाई जानी है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अनुसार केंद्र से राशि नहीं मिल रही है, करीब छह माह से अटकी है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अम्बिकापुर के अधीन 4 जिले के 1 लाख से अधिक किसानों लाखो की अंतर की राशि बकाया है। इससे किसानों को परेशानी हो रही है। वे बैंक के चक्कर लगा रहे हैं।
गौरतलब हो कि केंद्र के द्धारा खाद के साथ दवाइयों की कीमत 54 फीसद तक बढ़ोत्तरी के बाद जिले के किसानो को सुरप फास्फेट में करीब 20 फीसद महंगी, डीएपी खाद की कीमत में 54 फीसद की बएकर मिलने लगी। इससे कृषि की लागत बढ़ । खाद की कीमत को लेकर व्यापक विरोध हुआ। तब बोआई के बीच बढ़ी कीमत पर सब्सिडी की घोषणा कर दी गई। इसके साथ ही विक्रय किए गए खाद के अंतर की राशि लौटाने का फैसला किया गया। यह राशि अब भी अटकी है।
बदन दर्द, हरारत, हल्का बुखार है तो तत्काल कराएं जांच
जिले में तेजी से फैलते कोरोना वायरस ने अपने लक्षण और प्रभाव भी बदल लिए हैं। ज्यादातर मरीजों में शरीर में हरारत, बदन दर्द, हल्के बुखार के लक्षण नजर आ रहे हैं। वहीं डाक्टरो का कहना है कि अभी तक जिस प्रकार के अब तक प्रभाव सामने आये है उस आधार पर अब तक गत वर्श अप्रैल-मई की तरह सांस की दिक्कत यानी आक्सीजन लेवल कम होने जैसी समस्याएं बेहद ही कम नजर आई हैं। जबकि जीनोम जांच के अभाव में वायरस के वैरिएंट की पुष्टि नहीं हो पा रही है, लेकिन लक्षण में बदलाव को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञ इसे ओमिक्रोन ही मान रहे हैं।
डाक्टरो की राय है कि डेल्टा संक्रमण के ज्यादातर मरीजों में तेज और लंबे समय तक बुखार, छाती में इंफेक्शन, आक्सीजन लेवल कम होने की शिकायतें थीं। वहीं मरीज संक्रमण की वजह से गंभीर स्थिति तक बहुत ही जल्द पहुंच जा रहे थे। इस समय वायरस के प्रभाव से दो से तीन दिन में ही बुखार उतर जा रहा है। वहीं अधिकांश केस में संक्रमण छाती तक नहीं पहुंच रहा है। लेकिन वायरस के फैलाव देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दे रहें हैं।
हल्के लक्षण को भी न लें हल्के में
इस सबंध में जिले के स्वाथ्य सलाहकार डा. प्रिंस जायसवाल की कहना है कि ओमिक्रोन के मुख्य लक्षण में बुखार, शरीर में दर्द और गले में दर्द है। यदि इस तरह के लक्षण हैं तो इसे हल्के में न लें। यह बात सही है कि अभी तक सांस के गंभीर मरीज नहीं मिल रहे हैं, लेकिन आगे क्या स्थिति होती है, इसे देखने की बात होगी। बहरहाल लोग सतर्कता बरतें। मास्क लगाएं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते रहें।
as

+ There are no comments
Add yours