कोरोना काल में तेजबुखार पर नियत्रंण करने लगी पैरासिटामाल की 3 लाख गोलियां

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Baikunthpur @ Tahkikat News

कोरोना काल में यदि देश भर में सबसे डिमांड वाली वस्तु में पैरासिटामॉल रही । गत वर्ष भारत के हेल्थकेयर रिसर्च फर्म आइक्यूवीआइए के अनुसार पैरासिटामाल फार्मूले की डोलो-650 सर्वाधिक रही। कोरिया जिले में भी इसकी बिक्री चरम पर रही है। कोरोना काल में अधिकांश पर्चे में इस मेडिसिन का नाम है। लगभग 8 लाख की जनसंख्या वाले जिले में डोलो-650 की तीन लाख गोलियां बिकी हैं।


कोविड-19 महामारी के दौरान कई दवाइयों की बिक्री ने नए रिकार्ड बनाए। जिले के स्वास्थ्य विभाग के डी आई विकास लकडा की माने तो जिले में 344 दवा की दुकाने है जिनमें सरकारी और गैर सरकारी सभी शामिल हैं एवं इस दौरान सरकारी आंकडो और अनुमान लगाया जाये तो लगभग 2 से 2.50 लाख पैरासिटामाल की गोलिया खपत हुई ।

जबकि दूसरी ओर जिला दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष शैलेश गुप्ता की माने तो डोलो-650 तो इस महामारी के दौरान सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की गई दवा बन गई है। वही पर इस दौरान जेनरिक दवा के तौर पर 625 दवो भी इसके विकल्प के तौर पर बिकी है। इस दौरान जिले के 230 से अधिक लाइव फार्मेसी में डोलो-650 की लगभग 50 हजार टैबलेट बिकी हैं। कोरोना काल में इस दवा की तगड़ी डिमांड होने की बात दवा विक्रेता बता रहे हैं।

जिले के स्वास्थ्य सलाहकार डा. प्रिंस जायसवाल ने बताया कि डोलो-650 में पैरासिटामाल है जो बुखार को कम करने में सहायक होता है। यह एक एनाल्जिसिक टेबलेट है जो टार्गेटेड पेन एरिया को ही रिलिव दिलाता है। कोरोना के लक्षणों में एक प्रमुख लक्षण बुखार आना भी है। इसके साथ ही डोलो-650 हैडेक, दांत दर्द, पीठ दर्द और मसल्स पैन में भी आराम पहुंचाता है, यही वजह है कि इस दवा का बिना सोचे समझे जमकर उपयोग किया जाता रहा है।

इस दवा के प्रयोग के बाद यह ब्रेन को भेजे जाने वाले पैन सिग्नल्स को कम करती है, जिससे मरीजों को आराम मिलता है। इस दवा के सेवन से हमारे शरीर में रिलीज होने वाला कैमिकल प्रोस्टेग्लैंडिन्स को भी रोकती है, जो कि दर्द बढ़ाने वाला और शरीर के तापमान को बढ़ाने वाला होता है।

हैवीडोज से दुष्प्रभाव भी


डा. जायसवाल बताते हैं कि इसकी हेवी डोज होने की वजह से इसके कुछ सामान्य दुष्प्रभाव हैं। जिनमें जी मिचलना, ब्लड प्रेशर लो होना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, ज्यादा नींद आना (तंद्रा), अस्वस्थ महसूस करना, कब्ज होना, बेहोश होना, मूंह सूखना। दवाई ज्यादा लेने पर लिवर टाक्सिसिटी भी बढ़ती है, इसलिए चार से अधिक टैबलेट लेने से बचना चाहिए।

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