शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में गरीब तबके के बच्चों को प्रवेश दिया जाना है। इसके लिए शासन द्वारा समय सीमा का निर्धारण कर दिया गया है। पहले चरण में स्कूलों व बच्चों का पंजीयन किया जाएगा। स्कूलों का पंजीयन के लिए पोर्टल 15 फरवरी से खुल गया। 15 मार्च तक स्कूलों का पंजीयन किया जाएगा। वहीं 17 मार्च से 15 मई तक छात्रों का पंजीयन किया जाएगा।
निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कोरिया जिले में संचालित कुल 232 गैर अल्ससंख्यक व गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की प्रारंभिक कक्षाओं( नर्सरी, केजी-01,पहली) में 25 फीसद सीट बीपीएल ( गरीबी रेखा के नीचे) एवं अंत्योदय कार्डधारी परिवारों,बच्चों के लिए आरक्षित रखी गई है।
जिसमें सत्र 2022-23 के आरटीई के प्रवेश हेतु आनलाइन आवेदन 17 मार्च से 15 मई तक किया जा सकेगा। आनलाइन आवेदन आरटीई के वेबसाइट पर कर सकते हैं। आवेदन के साथ जन्म प्रमाण पत्र,पहचान पत्र,निवास प्रमाण पत्र तथा जिस वर्ग में आते हैं,उससे संबंधित प्रमाण पत्र जैसे बीपीएल सर्वे सूची या जाति प्रमाण पत्र या मेडिकल प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा।
जिला शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में आरटीई के तहत लगभग 1600 सीटें अनुमानित हैं। इनमें भर्ती के लिए पहले चरण में 15 फरवरी से 15 मार्च निजी स्कूलों का पंजीयन किया जा रहा है। निजी स्कूलों द्वारा दी गई जानकारियों का सत्यापन भी उक्त समयावधि में किया जाएगा। इसके बाद 17 मार्च से 15 मई तक छात्रों का पंजीयन किया जाएगा। पंजीयन के दौरान छात्रों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच 16 से 31 मई तक की जाएगी।
स्कूलों में प्रवेश के लिए 03 से 15 जून तक लाटरी निकाली जाएगी। इसके बाद 16 से 30 जून तक प्रवेश लिया जाएगा। इसके बाद भी सीटें खाली रही तो एक से 15 जुलाई तक छात्रों का फिर पंजीयन किया जाएगा। 16 से 25 जुलाई तक दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
27 जुलाई से दो अगस्त तक लाटरी निकाली जाएगी। इसके बाद तीन से 14 अगस्त तक दाखिला लिया जाएगा। आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश की मानिटरिंग के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी भी बनाए जाएंगे।
पिछले साल भी खाली रह गई थी सीटें
आरटीई के तहत प्रवेश के लिए जिले में गत वर्ष भी 1672 सीटें थी। इसके लिए जिले भर से 1436 आवेदन आयेे थे। उल्लेखनीय है कि जिले में राज्य सरकार द्वारा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन किया जा रहा है। उक्त स्कूल खुलने के बाद आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश को लेकर आकर्षण भी कम हुआ है। इस वजह से भी सीटें खाली रहना बताया जा रहा है।
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