।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र जिले में महुआ इकट्ठा करने वाले और महुआ के माध्यम से जीविकोपार्जन करने वालों के जंगलो में बडी तादात में आगजनी के बाद हाथियों व भालूओ का डर सताने लगा है। ग्रामिण इन दिनो में महुआ इकट्ठा कर धूप में सुखाने का कार्य करते हैं और फिर रात होने पर छुपाने का कार्य करते हैं। महुआ को सुखाने और छिपाने का कार्य इन दिनों जिले भर में तेजी से चल रहा है। जानकारो का कहा है कि हाथियों का झुंड कब आकर टपक जाएगा, इसे लेकर भय बना हुआ है। महुआ उत्पादन के मुख्य सीजन में इन दिनों वनांचल क्षेत्र के जंगल में हाथियों का झुंड कभी भी आ जाता है, इससे ग्रामीणों में दहशत बनी रहती है। वहीं, घरों पर रखे महुआ फूल के सुगंध पर हाथी रात में घरों की ओर न आए, इसके लिए वन विभाग ग्रामीणों को हाथी से बचाने महुआ को दिन में सुखाने व रात में छुपाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ताकि हाथी महुआ को खाकर मदहोश न हो।
ग्रामीण महुआ उत्पादन के मुख्य सीजन में सुबह महुआ बिन रहे हैं, लेकिन घरों पर रखे महुआ से ग्रामीणों को हाथियों से जान का खतरा बना हुआ है। क्योंकि महुआ के सुगंध पर हाथी घरों तक पहुंच जाता है, इससे वन विभाग को जनहानि की आशंका है।
as

+ There are no comments
Add yours