Baikunthpur @ Tahkikat News
बैकुण्ठपुर शहर का गंदा पानी सीधे गेज नदी में वर्षो से जा रहा है, बैकुन्ठपुर शहर समेत आसपास के ग्रामिणो के लिए यह नदी जीवनदायिनी मानी जाती है जिसमें लोगो की निस्तार होता है। वही पर इसी नदी में कई स्थानो पर छठ घाट भी बने हुए हैं जहा पर लोग आगामी दिनो में छठ पूजा के दौरान 4 दिनो तक चलने वाली पूजा में लोग करते हैं। इसी को लेकर बैकुन्ठपुर नगर पालिका की नेता प्रतिपक्ष अन्नपूर्णा प्रभाकर सिंह का कहना है उने द्धारा पूर्व में भी शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर कई बार आकर्षण करवाया गया है।
छठ पूजा पवित्रता का त्यौहार है उपवास रह रही व्रतियों के द्वारा विशेष साफ-सफाई रखना पड़ता है और इस गेज नदी में भगवान सूर्य देव की पूजा अर्चना जल में खड़ा होकर किया जाता है। नेता प्रतिपक्ष अन्नपूर्णा सिंह ने नगर पालिका प्रशासन का ध्यान आकर्षण कराते हुए निवेदन किया है कि शहर की सभी नालियों का गंदा पानी जो नदी में सीधे तौर पर जा रहा है, उन नालियों के गंदे पानी को एक जगह स्टोर कर सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर स्वच्छ एवं साफ कर पानी को जीवन दायिनी गेजनदी में छोड़ा जाए।
नदियों में गिराए जा रहे नाले से दूशित हो रहा पानी
नाले-नालियों का पानी अब भी नदियों में ही गिराया जा रहा है। इसकी वजह से नदियों का पानी दूषित हो रहा है। घाटों पर गंदगी फैली रहती है। इससे नदियों का पानी पीने लायक तो दूर नहाने लायक भी नहीं बचा है। कार्तिक के महीने तथा गेज नदी में स्नान व पूजन किया जाता है। शहर में एक मात्र नदी गेज हैं, जिनकी हालत बुरी हो चुकी है। इन नदियों में सीधा नाला डाला जा रहा है। नदियों का दूषित पानी बीमारियां फैला रहा है। प्रेमाबाग के पास नदी में नाले गिराए जाने से गंदगी पसरी पड़ी थी।
किसी को नही है इस बात की सुध
वैश्विक मानकों के अनुसार नदियों के पीएच लेबल का औसत सात है। जबकि आजकल अधिकांश नदियों में यह बढ़ा हुआ पाया जा रहा है। हैवी मेटल्स के कारण नदियों के पानी में ऑक्सीजन लेवल घट गया है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसके कारण इस नदी के सभी जलीय जीव पहले ही नष्ट हो चुका है। आदि काल से ही गेज नदी बैकुन्ठपुर समेत आसपास के सैकडो गावो के लोगो की निस्तारी इसी नदी पर निर्भर रही है। पहले इनमें मछलियां, कछुए, सर्पों की भरमार थी। अनेक पक्षी इनमें अठखेलियां करते हुए देखे जाते थे। आज हालात बदल गए है। शहर में इस नदी में सड़ांध पैदा हो जाती है।
क्या कहते हैं लोग……
गेज नदी में बैकुन्ठपुर से आने वाले नालों का पानी सीधे गिराया जाता है। यह कई सालों से चलता आ रहा है, जिससे नदी के घाट पर गंदगी फैली रहती है। इसकी सफाई होनी चाहिए। आगाम दिनो में छठ को ध्यान में रख तत्काल इसे बंद किया जाना चाहिए। – प्रभाकर सिंह
प्रेमाबाग के नीचे पुल के पास से ही एक नाला गेज नदी में गिरता है। इसको बंद कर होना चाहिए है। इस कारण नदी में दूषित पानी गिरता है और गंदगी इकट्ठा हो जाती है। लाखो लोगो की निस्तारी इस नदी पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर से वर्षो से जुडी हुई है। – मुख्तार अहमद
नाले-नालियों का पानी नदियों में सीधे गिराया जाना ठीक नहीं है, इसके लिए प्रषासन को तत्काल व्यवस्था करनी चाहिए। इससे नाले-नालियों पानी नदियों में गिरने से रोका जा सके और उनको दूषित होने से बचा सके। आने वाले छठ पर्व के मददेनजर इस पर रोक लगाये जाने की जरुरत है। – संगीता राजवाडे
नदियों में गंदा पानी छोड़ना बिल्कुल गलत है। इस पर रोक लगनी चाहिए। नदियों को साफ सुथरा रखना चाहिए। गेज नदी के कई घाट हैं जिसमें काफी गंदगी रहती है, जिससे छुटकारा मिलना ही चाहिए, ताकि नदी बच सके। यहा के लोगो के लिए यह नही पवित्र मानी जाती है। – रवि राजवाडे
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