धान के रकबे की सरकारी चोरी से किसानो में गुस्सा…… अफसरो के कारनामो ने बढाई सत्ता की धडकन

Estimated read time 1 min read

Baikunthpur @ Tahkikat News

अच्छी फसल होने के बाद भी किसानो के चेहरे मायुस नजर आ रहे है। और किसान सरकार ने खासे नाखुस नजर आ रहे हैं। एक ओर पटवारियो के द्धारा विगत 2 वर्षो से लगातार किसानो के धान के रकबे में जिस प्रकार से डाका डाला गया । उसने भूपेष सरकार के दामो की बढोत्तरी के हिसाब को बराबर कर दिया है। समितियो में धान खरीदी षुरु होने के बाद भी किसानो के धान खुले बाजार में 1300 के दर से बीक रहे हैं। इससे पूर्व भी दिपावली से पहले खर्चो के लिए आधे दामो पर धान बेचने को मजबूर नजर आये किसान। किसानो ने बताया कि जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते अर्ली वैरायटी का धान तैयार हो गया है। यदि इस दिपावली से एक सप्ताह पहले समितियो में धान खरीदी षुरु कर दी गई होती तो फिर समितिया में धान बिकता और दिपावली में अपने खर्चे के लिए आधे दामो पर धान नही बेचना पडता। दूसरी ओर बताया जा रहा है कि समितियो में धान के रकबे की सरकारी चोरी और अच्छी पैदावार के बाद स्थानिय बाजार में खरीदार नहीं होने के चलते किसान अनाप सनाप भाव धान बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बाजार में किसानों को उनकी मेहनत और लागत का पर्याप्त कीमत नहीं मिल रहा है, इसके चलते किसानों का शोषण हो रहा है। किसान अब समितियो में धान बेचने के बाद खुले बाजार में विवष होकर 1300-1400 रु. क्विंटल के हिसाब से धान बेचेगें।

पडोसी जिले में खपाया जाता है धान


गौरतलब हो कि हो कि राज्य शासन के द्वारा बीते वर्ष समर्थन मूल्य पर 2500 प्रति क्विंटल का दर निर्धारित किया गया है। व्यापारियों की मानें तो धान की काफी आवक जिले में षुरु हो चुकी है। किसानो के धान के रकबे की कटौती क कारण समितियो के तय मात्रा देने के बाद किसान सीधे-सीधे व्यापारी के पास पहुंचने को विवष होगें। गौरतलब हो कि पिछले वर्ष व्यापारी पडोसी सूरजपुर जिले में खपाकर मोटी कमाई किया था। इस बार इन व्यापारियो को और लाभ होने जा रहा है। वहीं बेबस किसान अपनी मेहनत व पूरी लागत के बाद औने पौने दाम में धान बेचने के लिए मजबूर होंगे।

मौसम का बदलता मिजाज डाल सकता है खलल


बार बार आसमान में उमडते घुमडते बादल और बारिष मौसम की अनुकूलता से किसान परेषान हैं विगत दिनो में हो रही लगातार साप्ताहिक अतंराल में हो रही बारिश किसानों के लिए परेशानी का भी सबब बन चुकी है। फसल पकने के दिनों में अच्छी बारिश हुई जिसके चलते किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ा। धान खेतों में गिर गए। यदि बारिष हुई तो खेत जहां धान कटने की स्थिति में है उन खेतों में भी पानी भर जायेगा। ऐसी स्थिति में किसान खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था भी करना होगा।

कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर

अंचल के अधिकांश क्षेत्र में धान की फसल तैयार हो गई है। कटाई के लिए मजदूर नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि साधन संपन्ना कई किसान हैं जिन्हें मजदूर ही नहीं मिल पा रहे हैं। जिनका धान का रकबा अधिक है वे हार्वेस्टर या अन्य साधन से धान कटाई करा रहे हैं लेकिन जीन खेतो में हार्वेस्टर नहीं घुस पा रहा है। ऐसी स्थिति में वह मजदूर ढूंढ रहे हैं। किसान बड़े रकबा में धान की फसल लिए थे। जिससे फसल समय पर तैयार हो गया है। अब पक चुके धान के फसल की कटाई कराने में लगे हुए हैं लेकिन इसके लिए भी उन्हें मजदूर नहीं मिल रहा है। इससे फसल कटाई का कार्य धीरे चल रहा है।

किसानो के पास नही है नमी मापक यंत्र


किसानों को धान को सुखाकर लाने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। ताकि उन्हें धान बेचने में परेशानी न हो। भारत सरकार के निर्देशानुसार, प्रत्येक वर्ष खरीदे जाने वाले धान में नमी का 17 प्रतिशत से कम होना चाहिए। इसका किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। किसानो की मुष्बित है कि उनके पास नमी मापक यंत्र नही जिससे वे नमी को जाच कर समितियो में धान बेचेने पहुॅचे।

कांग्रेस को उल्टा पड सकता है दांव

गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2023 में होना है। इसके लिए मात्र 1 साल बचे हैं। जिस तरह से सरकारी लोगो के द्धारा किसानो के रकबे को गायब किया गया है उससे किसानो में गुस्सा साफ देखा जा सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस किसानो को 2500 धान के दाम देने के बाद भी अपने अधिकारियो के मिषहैंडल के कारण धान की किमत में वृद्धि का मुददा गायब होकर अब किसानो के बीच रकबा गायब होने का मुददा गूंज रहा है। छत्तीसगढ में किसान ही सरकार किसकी होगी यह करते रहे हैं और वर्तमान हालात को देखते हुए कांग्रेस का पल्स रेट बैठे बिठाये तेज हो गया है जबकि भाजपा के पेट में फूदकी उछल रही है।

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours