परमिट रीवा तक……बस इलाहाबाद के चाकघाट के पास हुई दुर्घटना ग्रस्त, 2 दर्जन घायल जिम्मेदार कौन

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अवैध बस पर बैठाने वाले मालिक और बस एजेंटों के खिलाफ एफआईआर की मांग

BAIKUNTHPUR   @  Tahkikat News……… Develop    BY    ASHOK SINGH 

अंबिकापुर से प्रयागराज चलने वाली बस बीते मंगलवार और बुधवार के दरमियानी रात रीवा से 35 किलोमीटर आगे गढ़ के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, बताया जाता है कि या बस का एक अन्य बस से पिछले कई सालों से कंपटीशन चल रहा है जिसके कारण आए दिन दुर्घटनाओं की खबर आती रहती है मात्र 10 मिनट के टाइम अंतराल पर चलने वाली बस में सवारी पाने की होड़ में यात्रियों को जान जोखिम कर यात्रा करना पड़ रहा है जिसको लेकर यात्रियों में काफी आक्रोश व्याप्त हैं।

मिली जानकारी के अनुसार पक्षीराज कंपनी की बस एमपी 18 पी 699 अपने निर्धारित समय पर बीते मंगलवार को बैकुंठपुर बस स्टैंड से निकली थी जिसमें 3 दर्जन से अधिक यात्री प्रयागराज के लिए सवार थे, जिनमें अधिक संख्या उन यात्रियों की थी जो अपने परिजनों के अस्थि विसर्जन करने गंगा तट पर बने संगम पर जाना चाहते थे, किंतु बस मालिक और भ्रष्ट अधिकारियों के अधिक पैसा कमाने के फार्मूले ने आम नागरिकों का जीवन अंधकार में डाल रखा है कम समय के अंतराल के परमिट बस मालिक अपने आय के लिए लेते हैं वही भ्रष्ट अधिकारी अपनी काली कमाई बढ़ाने के लिए उन्हें बस का कम समय के अंतराल में परमिट दे देते हैं

अब यहां पर शुरू होता है मौत का खेल, बस मालिक अपने घर में, और परमिट देने वाला अधिकारी अपने घर में इसमें अपना पेट पालने वाला ड्राइवर कंडक्टर खलासी एवं उसी लेबल का श्रमिक जो अपने आवश्यक कार्याे को निपटाने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान जाना चाहता है वह इन पूंजीपतियों के साजिश का शिकार होता है यदि बस दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है तो वह व्यक्ति या तो मृत्यु शैया में सो जाता है या फिर अपना टूटा फूटा शरीर लेकर किसी तरह अपना जीवन यापन करता है बस मालिक को बीमा क्लेम से पैसा मिल जाता है वही अधिकारी तो उस समय भी मजे में थे और आज भी मजे में रहते हैं आखिर कब तक इस तरह का मौत का खेल इन पढ़े-लिखे पूंजीपतियों के द्वारा खेला जाता रहेगा कब तक गरीब अपना जीवन इस तरह बर्बाद करता रहेगा।

मामला पंजीबद्ध करने की उठ रही है मांग

अंबिकापुर से यह गाड़ी रीवा तक परमिट रखती है उसके बाद बिना परमिट या प्रयागराज तक जाती है जो पिछले डेढ़ वर्षाे से लगातार संचालित है, अंबिकापुर बस स्टैंड में इनके एजेंट बैठे हैं जो यात्रियों के साथ धोखाघड़ी करके उन्हें इलाहाबाद तक का टिकट देते हैं जबकि बस का परमिट रीवा तक है, कई बार रीवा से आगे चेकिंग होने पर यात्रियों को भी रीवा में उतार दिया जाता है या शहडोल में उतार लिया जाता है इससे यात्री और उनका परिवार काफी परेशान होते हैं और अपने आप को ठगा महसूस करते हैं,इन बस में यात्रा करने वाले लोग सीधे साधे और श्रमिक वर्ग के होते हैं जो इनका विरोध उन स्थानों पर नहीं कर पाते जहां पर इन्हें उतार दिया जाता है,,

इसी तरह विश्रामपुर सूरजपुर पटना बैकुंठपुर चरचा में भी इस बस के एजेंट बैठे हैं जो भोले भाले यात्रियों को ब्राह्मण जानकारी देकर उनके साथ लगातार धोखाधड़ी कर रहे हैं,बस मालिकों से 10 से 20ः कमीशन लेकर या यात्रियों के साथ बेईमानी कर रहे हैं वही बस मालिक मालामाल हो रहा है सवाल यह उठता है कि जब बस का परमिट रीवा तक है तो यह सभी एजेंट अपने 10-20 फिसद कमीशन के लिए क्यों यात्रियों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं क्यों उन्हें भ्रमित कर रहे हैं पक्षीराज कि जो बस चाकघाट के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई है उसमें जो यात्री चोटिल हुए हैं क्या बस मालिक के साथ यह सभी एजेंट दोषी नहीं है क्या इनके पर अपराध पंजीबद्ध नहीं होना चाहिए संभागीय के जिम्मेदार अधिकारियों को इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की जरूरत है ताकि यह यात्रियों के साथ धोखा घड़ी ना कर सके।

यात्रियों को किस तरह की आ रही है दिक्कतें

बिना परमिट बस में यात्रा करने से कहीं भी शासकीय ज़िम्मेदार अधिकारी उसे घंटों खड़ा करा देते हैं और लेन-देन की घंटों चर्चा करते रहते हैं यदि सेटिंग नहीं हुई तो बस को थानों में बंद कर दिया जाता है इस दौरान यात्री अपने गंतव्य स्थान तक अपने निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पाता और पूरी रात अपने परिवार के साथ अपने गंतव्य स्थान पहुंचने और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है वहीं दूसरी तरफ यदि बस दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है तो बीमा कंपनी बिना परमिट बस पर शिकार यात्रियों और उनके परिजनों को किसी तरह का बीमा क्लेम देने से मना कर देती है,और बेचारे यात्री और उनके परिजन अपने आप को ठगा महसूस करने लगते हैं पक्षीराज कंपनी की दर्जनों बसें 1 वर्ष में दुर्घटनाग्रस्त हुई हैं लगभग बसें अवैध संचालित हो रही थी सभी बसों पर मिलने वाला बीमा क्लेम देने में कंपनी हाथ खड़ा कर दी है क्योंकि वे दुर्घटनाग्रस्त बसों के पेपरों में काफी कमियां पाई गई थी।

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