स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर बरती गई सख्ती से नाराज डाक्टरो और कर्मियो ने खोल रखा है मोर्चा
कोरिया जिले के सरकारी अस्पतालों के वे डॉक्टर जल्द ही सरकार के रॉडार पर आने वाले हैं, जो मरीजों का उपचार करने की बजाय उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कर देते हैं। बैकुंठपुर जिला अस्पताल में पदस्त बड़ी संख्या में ऐसे डॉक्टर हैं, जिनके या तो खुद के या फिर परिवार के लोगों द्वारा निजी अस्पताल अथवा लैंब चलाए जा रहे हैं। सरकार के पास इस तरह की बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंची हैं। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कुछ दिन पहले ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के बैकुठंपुर जिला अस्पताल के दौरे के दौरान तमात लिपा-पोटी के बावजूद हालत यह रहा कि जिस दिन स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल का निरिक्षण करने पहुॅचे थे उस दिन तक किचन के दिवारो पर लगाये गये पेंट सूख भी नही पाये थे जिस कारण कईओ के कपडे तक खराब हो गये । स्वास्थ्य मंत्री ने जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में शासन के दिषा-निर्देषों अनुसार सुबह व शाम ओ.पी.डी. में विषेषज्ञ चिकित्सक, चिकित्सकों एवं समस्त स्टॉफ की नियमित एवं बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्यतः सुनिश्चित किये जाने हेतु निदेर्षित किया था। जिला चिकित्सालय के शिशु विभाग अंतर्गत संचालित एस.एन.सी.यू. में चौकीदार की व्यवस्था, पैथोलॉजी विभाग अंतर्गत संचालित लैब को हमर लैब के मापदंण्ड अनुरूप सी.जी.एम.एस.सी. अंतर्गत लंबित कार्य को अतिषीघ्र पूर्ण करने के निर्देष, जिला चिकित्सालय मंे भर्ती मरीजों के स्थिति का आकलन विषेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा किया जाकर अनावश्यक रिफरल कम करने के निर्देश, प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र से न्यूनतम दर पर जेनेरिक दवाईयां मरीजों हेतु पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने, जिला अस्पाल सोनोग्राफी की सुविधा की प्रतिदिवस औसत से कम होने पर नाराजगी, वार्ड के शौचालय का मरम्मत कार्य 01 माह के भीतर पूर्ण कराने के निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दिये गये थे जिसके बाद डाक्टरो के एक गुट ने स्वास्थ्य मंत्री के काडाई पर लामबंदी कर कोरिया कलेक्टर को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और डीपीएम के ज्ञापन सौपा। और साफ कह दिया कि हम इन दोनो के रहते काम नही कर सकते इसलिए इनको हटाया जाये। दरअसल पुरे मामले के मूल जड में डॉक्टर तनख्वाह तो सरकार से लेना चाहते हैं किन्तु मरिजो को अपने घर पर या निजि अस्पताल में देखना पसंद करते हैं। मामले में आज जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के विरुद्ध जिला अस्पताल के अधिंकाश डॉक्टरो और प्राईवेट अस्पतालो के दलालो की मोटी कमाई का बताया जा रहा हैं जिसे समय पर अस्पताल आने पर उसमें भारी आर्थिक नुकसान डॉक्टर सहने को तैयार नही है। यही कारण है कि एक समय पर जिले के पूर्व सीएचएमओ के रहते जिला अस्पताल की व्यवस्था काफी अच्छी मानी जाती रही । किन्तु विगत 2 वर्षो में जिला अस्पताल बैकुंठपुर सिर्फ रिफर सेंटर बनकर रह गया है। जहा पर प्राथमिक उपचार के बाद मरिजो को बैकुंठपुर के प्राईवेट अस्पताल में जाने को विवश कर दिया जाता है। अब देखना होगा कि जिला अस्पताल के सीएस सहित अन्य डॉक्टर और वर्षो से जड जमाये हुए 24 दर्जन से अधिक स्वास्थ्य कर्मियो के मनामाने और मनबडूए पन पर सूबे के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री किस हद तक रोक लगाने में कामयाब होते हैं। बेहतर होता अगर मुख्यमंत्री अचानक जिला अस्पताल बैकुंठपुर के दौरे पर चले जाये। फिर सारी सच्चाई सामने आ जायेगी।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर कलेक्टर के निरिक्षण में आई थी सच्चाई सामने
ओ.पी.डी. में समस्त विशेषज्ञ चिकित्सक/चिकित्सा अधिकारी अनुपस्थित पाये गये, केवल आपातकालीन में चिकित्सा अधिकारी एवं शिशु विभाग वार्ड में शिशु रोग विशेषज्ञ राउण्ड में उपस्थित पाये गये। चिकित्सालय में सफाई व्यवस्था असंतोषजनक पाया गया, प्रातः की साफ-सफाई सुबह 06ः30 बजे प्रांरभ कर 08 बजे पूर्ण करने हेतु निर्देशित किया गया।
मरीजों के बिस्तर पर, मरीज के अटेण्डर सोए/बैठे हुए पाये गये। मरीजों के परिजन की अस्पताल में एण्ट्री हेतु टोकन व्यवस्था एवं प्रत्येक वार्ड में वार्ड ब्वॉय के द्वारा मरीजों के बिस्तर के समीप एक परिजन हेतु कुर्सी या स्टूल की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया।
अस्पताल परिसर में पान, मसाला, गुटका इत्यादि का उपयोग प्रतिबंधित करने हेतु निर्देशित किया गया। अस्पताल परिसर में कोटपा एक्ट के तहत प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिये गये।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से अस्पताल परिसर के समस्त वार्ड एवं गैलरी में सी.सी.टी.व्ही. कैमरा स्थापित करने के निर्देश दिये गये। जिला चिकित्सालय में अविलम्ब ई-हॉस्पिटल की सुविधा प्रांरभ करने हेतु निर्देशित किया गया। हॉस्पिटल भवन में संचालित किचन के निरीक्षण के दौरान मरीजो के नास्ता एवं भोजन के मेन्यु अनुसार सुविधाएं एवं साफ-सफाई के आभाव के कारण संबंधित प्रभारी को नोटिस जारी करने हेतु निर्देशित किया गया।
एन.आर.सी. के निरीक्षण में 08 बच्चे भर्ती मिले, एन.आर.सी. में उपलब्ध 10 बिस्तर के विरूद्ध महिला एवं बाल विकास विभाग से समन्वय स्थापित कर शत-प्रतिशत कुपोषित बच्चों को लाभ दिलाने हेतु निर्देशित किया गया। डायलिसिस युनिट का निरीक्षण किया गया, एन.एच.एम. एवं राज्य स्तर से जारी दिशा-निर्देशों अनुरूप मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया गया।
अल्ट्रा सोनोग्राफी कक्ष का निरीक्षण किया गया, मरीजों की आवश्यकता एवं भीड़ के अनुरूप सोनोग्राफी की प्रतिदिवस एवं मासिक औसत संख्या अत्यंत कम एवं निराशाजनक होने के कारण संबंधित चिकित्सक डॉ. शालिनी शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी करने हेतु निर्देशित किया गया।
जिला चिकित्सालय में कार्यरत समस्त विशेषज्ञ चिकित्सक/चिकित्सा अधिकारी जो निजी नर्सिंग होम, क्लिनिक का संचालन कर रहे है, तत्काल उनकी सूची उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया गया साथ ही माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश अनुरूप ही शासकीय चिकित्सक को कार्यालयीन समय के अतिरिक्त निजी प्रेक्टिस करने के संबंध में जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने हेतु निर्देशित किया गया।
सी.टी. स्कैन मशीन का निरीक्षण किया गया, जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर में औसतन प्रतिदिन 10 से ज्यादा सी.टी. स्कैन हो रहा है। कोरिया जिले के अतिरिक्त अन्य जिलों एवं पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के जिलों से मरीज सी.टी. स्कैन हेतु जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर आ रहे है। सी.टी. स्कैन उपरांत रिपोर्ट के साथ सभी को फिल्म उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया गया।

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