नवतपा के दूसरेे दिन कोरिया जिले में चक्रवाती तूफान रेमल का असर से कुछ ईलाको में तेज हवाओ संग बारिश देखी गई। वही पर विगत एक सप्ता से क्षेत्रवासी चिपचिपाती उमस भरी गर्मी से दोचार हो रहे हैं। लोग चिपचिपी गर्मी से व्याकुल नजर आ रहे हैं। नवतपा के पहले दिन शनिवार का अधिकतम तापमान 40 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि दूसरे दिन रविवार को 41 डिग्री दर्ज किया गया वही पर सोमवार को तापमान 43 डिग्री होने का अनुमान लोगो को डरा रहा है।
नवतपा में नही मिलेगी लोगो को राहत
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात के कारण नम हवा आ रही है। वहीं उत्तर-पश्चिम से आ रही गर्म हवा के कारण चिपचिपी गर्मी बढ़ रही है। जिस कारण तापमान में आंशिक वृद्धि हो सकती है। यही कारण है नौतपा में पारा 43 डिग्री के पार होने की बात कही जा रही है। सुबह से ही लू के थपेड़े व गर्म हवाओं से और अधिक गर्मी लग रही है। दोपहर में सडक़ें सूनी हो गई। कूलर, पंखे भी गर्म हवा फेंकने लगे।
सडक़ें सूनी पंखा-कूलर बेकार
नौतपा के पहले दिन सुबह से लेकर दोपहर तक सूर्य देवता जमकर तपे। पारा 43 डिग्री के पार रहा। सुबह से ही लू के थपेड़े चलने लगे थे। गर्म हवाओं से और अधिक गर्मी लग रही थी। दोपहर में सडक़ें सूनी हो गई। कूलर, पंखे भी गर्म हवा फेंकने लगे। कभी आसमान में बदली कभी तेज हवाएं भी चल रही हैं। जिस कारण वातावरण में नमी कम होने के कारण उमस भरी गर्मी और गर्म हवाओं का एहसास देर शाम तक हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में भी तापमान में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।
सेहत पर भी हो रहा असर
भीषण गर्मी का असर सेहत पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में डिहाईड्रेशन, उल्टी-दस्त, सिर दर्द, बुखार के मरीजों की संख्या बढऩे लगी है। डॉक्टरो ने गर्मी से बचाव के सुझाव देते हुए कहा कि अत्याधिक गर्मी होने की स्थिति में ठंडे पानी से शरीर को पोछे या अनेक बार स्नान करें। धूप व गर्म हवाओं के सम्पर्क में आने के बाद तुरंत स्नान न करें। पानी, छाछ, ओआरएस का घोल या घर में बने पेय जैसे लस्सी, नींबू का पानी, आम का पना इत्यादि का अधिक मात्रा में सेवन करें। धूप से निकलते समय छाता, सिर पर टोपी या सिर पर कपड़ा रखे। पीने के पानी की समुचित व्यवस्था रखें।
गर्म हो समुद्रीसतह से बन रहा चक्रवात
मौसम विभाग की माने तो समुद्र की सतह लगातार गर्म हो रही है। इसके कारण उन्हें लगातार ऊर्जा मिल रही है। इसके कारण चक्रवात लंबे समय तक समुद्र में न केवल रह रहे हैं बल्कि लंबे समय तक अपनी शक्ति बरकरार रख रहे हैं। समुद्र ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन से अतिरिक्त ऊर्जा शोख रहे हैं और फिर चक्रवात बना रहे हैं। समुद्र की सतह के तापमान के गर्म होने का मतलब है अधिक नमी, जो चक्रवातों की तीव्रता के लिए अनुकूल है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर इस समय बहुत गर्म हैं। ऐसे में यहां उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बन रहा है। गौरतलब है कि उष्णकटिबंधीय चक्रवात को न केवल महासागर नियंत्रित करते हैं बल्कि वायुमंडल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


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