कलेक्टर कोरिया विनय कुमार लगेह के मार्गदर्शन में खंड स्तरीय बुनियादी गणित एवं साक्षरता कौशल प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन बैकुंठपुर जोन क्रमांक 01 खरवत प्रशिक्षण स्थल स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खरवत में प्रथम चरण का प्रशिक्षण 10 से 13 जून तक चला एवं द्वितीय चरण का प्रशिक्षण 14 से 17 जून तक आयोजित किया जा रहा है कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छायाचित्र पर संकुल प्राचार्य बृज नारायण के द्वारा दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया गया जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया के जितेंद्र गुप्ता एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी देवेश जायसवाल एवं खंड स्त्रोत समन्वयक नीलेश शुक्ला प्रशिक्षण स्थल पर उपस्थित होकर प्रशिक्षण के संदर्भ में विस्तार पूर्वक प्रशिक्षार्थियों को बताया गया जिससे सभी प्रशिक्षार्थी लाभान्वित हुए प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त डीआरजी अमर साय भगत सीएसी मनसुख, छत्रपाल राजवाड़े सीएसी मॉडल बैकुंठपुर खगेश पैकरा सहायक शिक्षक प्राथमिक शाला कांटहियापारा एवं कंप्यूटर ऑपरेटर मोहम्मद नायर अंसारी सीएसी खरवत उपस्थित थे सघन मॉनिटरिंग के लिए विकासखंड नोडल विनय कुमार तिवारी गणित के विभिन्न पहलुओं को स्मार्ट टीवी के माध्यम से बताया गया
डीईओ कोरिया जितेंद्र गुप्ता ने सीखने की परिकल्पना पर प्रकाश डाला और कहा कि बच्चो में सीखने की जन्मजात क्षमता होती है जन्मजात क्षमता के साथ साथ सीखने के लिए अनुकूल व उत्साहजनक परिवेश का होना भी जरूरी है ये दोनो घटक बच्चो के अनुभव और समझ को गढ़ते है
बीआरसी प्रमुख नीलेश शुक्ला और बीईओ बैकुंठपुर देवेश जायसवाल ने कहा कि भाषा सोचने समझने और सीखने का एक साधन है बच्चे केवल उस भाषा के माध्यम से ही बेहतर सोच और समझ सकते है जिसे वे अच्छे से जानते है अगर कक्षा में बच्चो की मातृ भाषा का भी प्रयोग किया जाए तो उन्हें इस भाषा के सहारे स्कूली भाषा तक आने के लिए समय और मदद दोनो मिल सकता है
जिला नोडल उमेश मिश्रा ने कहा कि कक्षा में बच्चो की भाषा में बातचीत और उच्च स्तरीय चिंतन के अवसर देना तथा चित्रों पर चर्चा, कहानी सुनाना,खेल गतिविधि, हिंदी भाषा में कहानी पढ़कर सुनाना और समझ आधारित चर्चाएं करना आवश्यक है
राज्य कोर ग्रुप के नोडल अधिकारी आशीष पाण्डेय ने कहा कि डिकोडिंग प्रारंभ करने से पहले इन बातो को सुनिश्चित कर ले बच्चे मौखिक भाषा की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे है बच्चे शब्दो को ध्वनियों को जोड़ तोड़ पा रहे है और प्रथम ध्वनि को पहचान रहे है तथा बच्चो ने लिखने के लिए आवश्यक हस्त संतुलन बना लिया है बच्चे कुछ शब्दो को देखकर पहचान जाते है।


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