मंत्रिपरिषद का फैसला…….गुरूघासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्व घोषित
2012 से लगातार चल रही थी प्रक्रिया में समय-समय पर लगे अडंगे
मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अनुशंसा और भारत सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण की सहमति के अनुसार कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में स्थित गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान तथा तमोर पिंगला अभ्यारण्य के क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए 2829.387 वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल में गुरूघासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्व अधिसूचित करने का निर्णय लिया गया है। इसके गठन की आगे की कार्यवाही हेतु वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को अधिकृत किया गया है।
टायगर रिजर्व के गठन से राज्य में ईको-पर्यटन का विकास होगा साथ ही कोर एवं बफर क्षेत्र में स्थित ग्रामीणों के लिए गाईड, पर्यटक वाहन, रिसार्ट संचालन के साथ ही विभिन्न प्रकार के रोजगार सृजित होंगे। टायगर रिजर्व में कार्य करने के लिए राष्ट्रीय प्रोजेक्ट टायगर ऑथोरिटी से अतिरिक्त बजट प्राप्त होगा जिससे क्षेत्र के गांवों में आजीविका विकास के नए-नए कार्य किए जा सकेंगे।
हाई कोर्ट के दबाव में सरकार ने लिया निर्णय
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के नोटिफिकेशन को लेकर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट की ओर से कहा गया है कि यह अंतिम अवसर है, राज्य सरकार इस पर जल्द फैसला ले। हाईकोर्ट इसे लेकर लगी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया। गौरतलब हो कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से 2014 में शुरुआती और 2022 में आखिरी अनुमति मिल गई थी। इसके बाद भी राज्य सरकार ने इसे टाइगर रिजर्व घोषित नहीं किया। कांग्रेस सरकार का मानना था कि जहां रिजर्व घोषित किया गया, उस पूरे इलाके में महत्वपूर्ण खनिजों की खदान और घना जंगल है। रिजर्व बनने के बाद अगर इस इलाके में खनन बंद करना पड़ा तो इससे राज्य को गंभीर आर्थिक संकट उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर प्रदेश में सरकार बदलने के बाद वन्य जीव एक्टिविस्ट को उम्मीद है कि शासन इस पर जल्द निर्णय लेगा।
रमन सिंह ने भेजा गया था केन्द्र को प्रस्ताव
तात्कालिन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने साल 2012 में गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के सैद्धांतिक निर्णय लिया था। इसका प्रस्ताव भेजा था। इसमें गुरु घासीदास नेशनल पार्क और तमोर पिंगला सेंचुरी को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाने का ड्राफ्ट था। कांग्रेस सरकार में यह मामला इस रिजर्व एरिया के कोल ब्लॉक, आइल ब्लॉक और मिथेन गैस ब्लॉक पर फंस गया। राज्य सरकार प्रस्तावित गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करती है तो क्षेत्रफल के हिसाब से यह देश का तीसरा सबसे बड़ा रिजर्व होगा।



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