जमीन पर लिटाकर ईलाज पर सीएस बोले एक-दो दिनो में अतिरिक्त बेडो की जायेगी व्यवस्था

सीएचसी केंद्र की नकारेपन से जिला अस्पताल पर पड रहा अतिरिक्त दबाव

बैकुंठपुर।

डायरिया से पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती होने की सिलसिला जारी है। अस्पताल में फौरी तौर पर गददे डालकर पीड़ितों का उपचार तो शुरू हो गया है, लेकिन आधा दर्जन मरीजों को अब तक बेड नहीं मिल सका है। जिसके चलते जमीन पर लेटाकर उनका उपचार किया जा रहा है। बावजूद इसके डायरिया से पीड़ित मरीजों के आने का सिलसिला अब भी जारी है।
दरअसल बारिश के मौसम में हर साल जिला अस्पताल में मौसमी बीमारियों के चलते मरीजों की संख्या अधिक हो जाती है। सिविल सर्जन डॉ. आयुश जायसवाल ने बताया कि इस समय ओपीडी करीब 1000 के आसपास है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है।

वर्तमान में जिला अस्पताल में 150 कुल बेड स्वीकृत हैं। बावजूद इसके मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कुछ बेड लगाए गए हैं। इसके बाद भी भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में जिन्हें बेड नहीं मिल पा रहे हैं, उनका भी उपचार किया जा रहा है। फिर भी उन्होने कहा कि मेरे द्धारा व्यवस्था को सुधारने की हर संभव प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही 25 से 30 बेड की व्यवस्था कराई जायेगी । अस्पताल में भर्ती होने वाले हर मरिज को समुचित ईलाज मिले इसमें कोई कमी नही छोडी जायेगी।

सीएचसी का नकारेपन डाल रहा अतिरिक्त दबाव

जिले के प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों की हालत बदहाल है। यहां नियमित तौर पर डॉक्टर नहीं बैठते है। छोटी मोटी बीमारी और दुर्घटनाओं के मरीजों को सीधा जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिससे जिला अस्पताल में मरीजों का भार ज्यादा है। प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों को सुधारने की दिशा में अधिकारी प्रयास नहीं कर रहे हैं।

बीमारियों को लेकर संवेदनशील है जिला

मौसमी बीमारी को लेकर कोरिया जिला काफी संवेदनशील रहा है। पटना, सोनहत, पोडी बचरा सहित अन्य क्षेत्रों में हर साल बड़ी संख्या में लोग इससे पीड़ित होते हैं। कई मरीजों की मौत हो भी जाती है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में यह नहीं होता है। इस साल अभी तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों से एक अनुमान के अनुसार 4 हजार से अधिक मरीज डायरिया के मिल चुके हैं।

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