बुद्धवार को पितृ विसर्जन अमावस्या पर दी जायेगी पितरों की विदाई

Estimated read time 0 min read

बैकुंठपुर।

पितृ विसर्जन अमावस्या बुद्धवार 2 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दिन लोग नदी तालाबो में स्नान कर श्रद्धालु अपने पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान व तर्पण करेंगे। क्षेत्र के कई गॉवो में सामूहिक तौर पर अपने पितरों के प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त किया जाता है। विदति हो कि आश्विन मास की अमावस्या को पितृ विसर्जन पितरों की तृप्ति के लिए लोग पिंडदान, श्राद्ध व तर्पण कर अपने पूर्वजो से आर्शीवाद लेंगे।
मान्यता है कि इस दिन ब्राह्मण को भोजन कराने तथा दान देने से पितृ तृप्त हो जाते हैं। वे अपने पुत्रों को आशीर्वाद देकर जाते हैं। जिन परिवारों को अपने पितरों की तिथि याद नहीं रहती है या पितरों की तिथि ज्ञात होने पर भी यदि समय पर किसी कारण से श्राद्ध न हो पाए, तो उनका श्राद्ध भी इसी अमावस्या को कर देने से पितर संतुष्ट हो जाते हैं। जिनकी अकाल मृत्यु हो गई हो उनका भी श्राद्ध इसी अमावस्या के दिन किया जा सकता है।

दीपक जलाने की परम

जानकार बताते हैं कि इस पर्व को पितृ पक्ष का समापन पर्व भी कहते हैं। इस दिन शाम को दीपक जलाकर पूड़ी पकवान आदि खाद्य पदार्थ दरवाजे पर रखे जाते हैं। जिसका अर्थ है कि पितृ जाते समय भूखे न रह जाएं। इसी तरह दीपक जलाने का आशय उनके मार्ग को आलोकित करना है।

पीपल पेड़ की करें पूजा

पितृ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर पूजन करें। इससे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours