एंट्री फीस ₹500 और 10 फिसद नाल……रोज सज रही लाखो की महफिल
बैकुंठपुर के सलका, सलबा, परचा, मनसुख व रोबो में खेलाया जा रहा जुआ
बैकुंठपुर।
ग्रामीण अंचल और जिला मुख्यालय के इर्द-गिर्द ही जुआं की फड़ जम रही है। लगातार खबरे आ रही है कि बैकुंठपुर के सलका, सलबा, परचा, मनसुख व रोबो में प्रतिदिन जुए की बडी महफिल सजाइ जाती हैं। जिसमें बैकुंठपुर के नामचीन जुआरीयो के द्धारा ही लोकल लोगो की मदद से यह कार्य किया जा रहा है। जबकि नये एसपी के द्धारा जुआ और कोयले का कारोबार साफ तौर पर बंद कराने को कहा गया था। चर्चा तो यह है कि महफिल के आयोजको को कुछ पुलिस वालो की सहमति मिल गई है। अब एसपी के पीठ पीछे इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियो को बढावा देने वालो को पुलिस कर्मीयो पर कडी कार्यवाई की जरुरत है। देखना होगा कि आने वाले दिनो में अवैध कारोबार पर 00 फिसद टॉलरेंस रखने वाले नये एसपी क्या कठोर कदम उठाते हैं या फिर एक बार फिर से कोरिया में पुराने ढर्रे पर ही पुलिस काम करेगी।
कहा जा रहा है कि बड़े-बड़े रईसजादे दावं पर मोटी रकम लगा रहे हैं। पुलिस जुआरियों पर कार्रवाई तो करती है, लेकिन केवल नाम मात्र के लिए। जुआरियों पर इस वर्ष अब तक हुई कार्रवाई पर गौर फरमाया जाए, तो यहां बैकुंठपुर, पटना, सोनहत व बचरापोडी सहित थानों से हर महीने एक या फिर दो कार्रवाई होती है। जबकि जुआं की फड़ हर रोज जमती है। कार्रवाई में खानापूर्ति उस स्थिति में हो रही, जबकि पुलिस से जुआं का ज्यादातर अड्डा मालूम है।
यहां जिला मुख्यालय के इर्द-गिर्द सलका, सलबा, मेको, रोबो, मनसुख में 03 लोगो के द्धारा हर रोज जुआं की फड़ सजाई जा रही है। पुलिस पर उंगली नहीं उठे, इसके लिए हर महीने ज्यादातर थानों में एक से दो कार्रवाई की जाती है। गिरफ्तारी का पिछला रिकॉर्ड कुछ ऐसा ही बयां कर रहा है। कार्रवाई से पुलिस के पीछे हटने की मुख्य वजह महकमे में मोटी रकम का आना बताया जा रहा है।

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