गौसेवा आयोग के जिलाध्यक्ष रेवा यादव ने गौधाम, पशु तस्करी पर रोक व पराली नही जलाने की अपील
गौधाम समितियों की पहली बैठक में पशुओं के संरक्षण, पराली प्रबंधन और चारा सुरक्षा पर विशेष जोर
बैकुंठपुर।
जिला एवं विकासखंड स्तरीय गौधाम समितियों की पहली बैठक में जिले भर से आए अध्यक्षों, सदस्यों और अधिकारियों ने महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विमर्श किया। बैठक की अध्यक्षता कोरिया कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे, जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी तथा गौधाम जिला अध्यक्ष रेवा यादव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और सदस्य उपस्थित थे। गौधाम जिला अध्यक्ष रेवा यादव ने विशेष रूप से किसानों से आग्रह किया कि धान कटाई के बाद खेतों में बची पराली को किसी भी स्थिति में न जलाएँ। उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है,.मिट्टी की उर्वरता कम होती है, खेतों के लाभकारी जीव नष्ट होते हैं.और पशुओं के लिए उपलब्ध चारे की भारी कमी उत्पन्न हो जाती है। पैरा ग्रामीण कृषि-पशुपालन का मुख्य आधार है, इसलिए किसानों को इसे गौधाम, गौठानों और गौशालाओं में उपलब्ध कराने की अपील की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले में पहले चरण में उन ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास स्थित हैं, ताकि निराश्रित एवं घूमन्तू मवेशियों को सुरक्षित रूप से गौधामों में रखा जा सके। पशुपालन विभाग को निर्देश दिए गए कि गौधामों में शेड, पानी, बिजली, सुरक्षित बाड़ा सहित सभी मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएं। मवेशियों की नियमित देखभाल एवं स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की जाए। कलेक्टर ने सभी सरपंचों और जनप्रतिनिधियों से घूमन्तू मवेशियों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने में सहयोग का आग्रह किया।
पशु तस्करी पर निगरानी कानूनी कार्रवाई और जुर्माना
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अंतर्राज्यीय सीमाओं और राष्ट्रीय राजमार्गों से होकर पशुओं की अवैध तस्करी की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। उन्होंने गौधाम समितियों और ग्रामीणों से अपील की कि संदिग्ध वाहनों या घटनाओं की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस थाने में दें ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके। राज्य शासन ने पराली जलाने पर सख्त प्रतिबंध, जुर्माना और विधिक कार्रवाई का प्रावधान किया है। कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 (संशोधित 2011) तथा नियम 2014 के तहत इस प्रकार का दहन दंडनीय अपराध है।
गौधाम-निराश्रित व जप्त पशुओं के संरक्षण की पहल
छत्तीसगढ़ सात राज्यों की सीमाओं से घिरा राज्य है, जहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं। अंतर्राज्यीय आवागमन के कारण अवैध पशु परिवहन की घटनाएँ होती हैं। ऐसे में जप्त एवं निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए गौधाम योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। गौधाम पंजीकृत गौशालाओं से भिन्न होंगे। इन्हें राजमार्ग के समीप ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा। केवल निराश्रित, घूमन्तू तथा अधिनियम के तहत जप्त गौवंश को ही यहाँ रखा जाएगा। गौधाम हेतु वही शासकीय भूमि चयनित होगी जहाँ पानी, बिजली, शेड और सुरक्षा की सुविधाएँ उपलब्ध हों। यदि चारागाह भूमि उपलब्ध हो तो हरा चारा उत्पादन का कार्यक्रम संचालित किया जाएगा।
पशु सेवा से जुड़े मानदेय और योजनाएँ
अकुशल वर्ग के चरवाहा को लगभग 10,916 प्रति माह, 1,30,902 प्रतिवर्ष, गौसेवक (उच्च कुशल वर्ग) का मानदेय 13,126 प्रति माह, 1,57,512 प्रतिवर्ष। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत सेक्स सारटेड सीमेन तकनीक से नस्ल सुधार किया जाएगा, जिसके लिए प्रतिवर्ष लगभग 1,50,000 व्यय का प्रावधान है। वही पर पहले वर्ष का अनुमानित वार्षिक व्यय 2,85,000 जिसमें भूमि तैयारी, खाद, नेपियर घास, श्रम, सिंचाई, कीट नियंत्रण और चॉफ-कटर शामिल हैं। दूसरे वर्ष से चॉफ-कटर की लागत घट जाएगी। जिला प्रशासन ने निर्देशित किया है कि जनपद पंचायतों की बैठकों में पराली न जलाने पर विस्तृत चर्चा अनिवार्य हो। गौधाम समितियाँ ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएँ। प्रत्येक गौधाम में उपलब्ध पैरा (क्विंटल में) का अद्यतन विवरण तैयार कर पशु चिकित्सा विभाग को भेजा जाए।

+ There are no comments
Add yours