पंजीकृत आयुष चिकित्सकों की गरिमा सर्वाेपरि, सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं-डॉ. प्रिंस
राष्ट्रीय आयोग एवं राज्य परिषद् के निर्देशों का स्वागत, कहा आयुष चिकित्सकों को झोलाछाप या फर्जी कहना न केवल अनुचित, बल्कि विधि एवं संविधान की भावना के भी प्रतिकूल
बैकुंठपुर।
भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य दर्शन की गरिमा को सुदृढ़ करने की दिशा में राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग तथा छत्तीसगढ़ आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति तथा प्राकृतिक चिकित्सा परिषद् द्वारा जारी निर्देशों का आयुष मेडिकल एसोसिएशन ने स्वागत किया है। एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव डॉ. प्रिंस जायसवाल ने इसे पंजीकृत आयुष चिकित्सकों के सम्मान, आत्मगौरव और विधिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय बताया है।
डॉ. प्रिंस जायसवाल ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध तथा भारतीय चिकित्सा पद्धतियां केवल चिकित्सा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, ऋषि-परंपरा और लोककल्याण की अमूल्य धरोहर हैं। इन चिकित्सा पद्धतियों का अध्ययन करने वाले चिकित्सक वर्षों की कठिन शैक्षणिक साधना, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा विधिक प्रक्रिया पूर्ण करने के पश्चात परिषद् में विधिवत पंजीयन प्राप्त करते हैं। ऐसे योग्य और पंजीकृत चिकित्सकों को किसी भी प्रकार से श्झोलाछापश् अथवा फर्जी डॉक्टर जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उनके व्यक्तित्व, पेशे और सामाजिक सम्मान पर सीधा आघात है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग एवं छत्तीसगढ़ परिषद् द्वारा स्पष्ट किया गया है कि बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएसएमएस तथा अन्य मान्यता प्राप्त आयुष उपाधिधारी चिकित्सक पूर्णतः वैधानिक रूप से अधिकृत चिकित्सा व्यवसायी हैं। इसलिए उनके संबंध में किसी भी प्रकार की अमर्यादित, भ्रामक अथवा अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग न केवल अनुचित है, बल्कि विधि की दृष्टि से भी दंडनीय है।
डॉ. जायसवाल ने कहा, यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उन हजारों आयुष चिकित्सकों के आत्मसम्मान का संरक्षण है, जिन्होंने समाज की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। चिकित्सक का सबसे बड़ा परिचय उसका ज्ञान, सेवा और नैतिक दायित्व होता है। ऐसे में किसी भी योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला कोई भी कृत्य स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि समय-समय पर कुछ लोगों द्वारा अज्ञानतावश अथवा भ्रामक सूचनाओं के आधार पर पंजीकृत आयुष चिकित्सकों की तुलना अवैध रूप से चिकित्सा करने वाले व्यक्तियों से कर दी जाती है, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और योग्य चिकित्सकों की वर्षों की साधना तथा प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। परिषद् द्वारा जारी यह निर्देश ऐसे सभी भ्रमों को समाप्त करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
प्रदेश महासचिव ने कहा कि आयुष चिकित्सा आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर अपनी प्रभावशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समग्र स्वास्थ्य दर्शन के कारण सम्मान प्राप्त कर रही है। आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आयुष चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी अंचलों तक जनस्वास्थ्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कोविड-19 महामारी सहित अनेक स्वास्थ्य चुनौतियों के दौरान भी आयुष चिकित्सकों ने उल्लेखनीय योगदान देकर अपनी उपयोगिता सिद्ध की है।
डॉ. प्रिंस जायसवाल ने कहा कि मीडिया, प्रशासनिक संस्थाओं तथा समाज के प्रत्येक वर्ग का दायित्व है कि वे मान्यता प्राप्त और परिषद् में पंजीकृत आयुष चिकित्सकों के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें। स्वस्थ लोकतंत्र में किसी भी पेशेवर की गरिमा सर्वाेच्च होती है और उसका संरक्षण प्रत्येक नागरिक तथा संस्था का नैतिक दायित्व भी है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति तथा प्राकृतिक चिकित्सा परिषद् द्वारा जारी निर्देशों का सभी शासकीय विभाग, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, मीडिया संस्थान तथा संबंधित अधिकारी गंभीरता से पालन करेंगे। इससे योग्य आयुष चिकित्सकों को सम्मानजनक वातावरण प्राप्त होगा और वे बिना किसी मानसिक दबाव अथवा मानहानि की आशंका के जनसेवा के अपने पावन दायित्व का निर्वहन कर सकेंगे।
अंत में डॉ. प्रिंस जायसवाल ने कहा कि आयुष मेडिकल एसोसिएशन सदैव पंजीकृत आयुष चिकित्सकों के सम्मान, अधिकारों और व्यावसायिक गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। यदि भविष्य में किसी भी मंच पर विधिवत पंजीकृत आयुष चिकित्सकों के विरुद्ध अपमानजनक शब्दावली का प्रयोग किया जाता है अथवा उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया जाता है, तो संगठन विधि सम्मत कार्रवाई के लिए पूरी दृढ़ता के साथ आगे आएगा। उन्होंने कहा कि सम्मान, संवेदना और सेवा ही चिकित्सा का वास्तविक धर्म है तथा इसी भावना के साथ आयुष चिकित्सक समाज के स्वास्थ्य और मानव कल्याण के लिए निरंतर समर्पित रहेंगे।


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