BAIKUNTHPUR @ Tahkikat News ### ASHOK SINGH
देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को जब जीवन यापन के लिए सड़कों पर भीख मांगते देखा जाता है तो ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारों द्वारा बच्चों की पढ़ाई तथा कल्याण के लिए शुरू की गई करोड़ों की योजनाओं का लाभ इन तक नहीं पहुंच रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। परंतु फिर भी भारी संख्या में घुमंतू परिवारों के बच्चों तक इसकी किरणें नहीं पहुंच पाई हैं। जिससे पता चलता है कि इन योजनाओं का लाभ ऐसे पात्र बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुन्ठपुर बस स्टैंड पर तो ऐसे भीख मांगने वाले बच्चों को देखा जा सकता है। इनमें प्राय गरिब परिवारो में रहने वाले बच्चों की संख्या अधिक होती है। बस स्टैंड पर दौड़ती बसों में तथा बसों से बाहर भीख मांगते समय कभी भी दुर्घटना होने का डर रहता है। परंतु पेट पालने की दौड़ में ऐसे बच्चे अपनी जिदगी पर दांव लगाए हुए हैं। सरकारी योजनाओ के संचालन की जिम्मेदारी जिले में महिला बाल विकास विभाग के जिम्मदारो की होती है किन्तु विगत 20 दिनो से विभाग के द्धारा कोरिया कलेक्टर के निर्देष के बाद सिर्फ खानापूर्ति ही करता नजर आ रहा है।
विभाग की तमाम कोशिशो की नाकामी का नजारा ही स्थानिय बस स्टैन्ड में देखा जा सकता है वर्ना अभियान के दौरान ही प्रतिदिन इस तरह का नजारा शहर में देखने को नही मिलता। जिसकी ओर सरकार और जिला प्रषासन कोे ध्यान देने की अति आवश्यकता है। भीख मांगते बच्चों अक्सर गलत संगत में पड़कर ऐसे रास्ते पर चलने लगते हैं, जिसके कारण उनका जीवन खराब हो जाता है। वे लावारिस और घुमंतू बच्चे कहलाने लगते हैं। घूमने वाले बच्चे आसानी से देखे जा सकते हैं। इनके चेहरे पर मासूसी और स्थिति बताती है कि यहां इनकी पूछपरख करने वाला कोई नहीं है। पैसों के लिए ये बच्चे मुसाफिरों के सामने कैसे हाथ फैलाते हैं। पूछने पर बताते हैं कि ये करना उनकी लाचारी बन चुकी है। कुछ के माता-पिता उनसे भीख मंगवाते हैं तो कुछ बेघर और बेसहारा हैं, जिसके चलते ऐसा करना उनकी जिंदगी में शुमार हो चुका है। हैरानी तब होती है जब इसी स्टेशन में किशोर बच्चों के हाथों पर नशे का सामान दिखता है। वे कई प्रकार के जेल का इस्तेमाल नशे के तौर पर करते हैं।
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