छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा ने फूँका हड़ताल का बिगुल……..

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7 जुलाई को प्रदेश बंद और 1 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन,छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी महासंघ,मंत्रालय कर्मचारी संघ,संचालनालय कर्मचारी संघ एवं समस्त कर्मचारी एवं शिक्षक संगठन/एसोसिएशन ने कर्मचारी हित में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा का गठन कर हड़ताल का बिगुल फूँक दिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी एवं उप प्रान्ताध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने बताया कि सातवे वेतन पर गृहभाड़ा भत्ता ,केंद्र के समान देय तिथि से महँगाई भत्ता पिंगुआ कमेटी का रिपोर्ट सार्वजनिक करने,जन घोषणा पत्र अनुसार चार स्तरीय वेतनमान सहित अनियमित/दैनिक वेतन भोगी/अन्य कर्मचारियों का नियमितीकरण, राज्य में लागू किये गए पुरानी पेंशन योजना में पेंशन पात्रता/निर्धारण हेतु शिक्षक (एल बी)/अन्य संवर्गों की अहर्तादायी सेवा की गणना प्रथम नियुक्ति तिथी किये जाने जैसे मुददों पर राज्य शासन द्वारा अब तक समाधानकारक निर्णय नहीं लिये जाने के विरुद्ध 7 जुलाई को प्रदेश के सरकारी दफ्तर बंद करने का निर्णय संयुक्त मोर्चा ने लिया है। उन्होंने संयुक्त मोर्चा के निर्णय के संबंध में आगे जानकारी दिया कि यदि सरकार ने अपना टालमटोल/दमनकारी नीति जारी रखा तो अगस्त क्रांति के स्वरूप राज्य के कर्मचारी-अधिकारी 1 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे


उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने नवीन पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2022 से लागू किया है। राज्य शासन ने अपने आदेश 30/6/2018 के द्वारा शिक्षक (एल बी) संवर्ग को 1 जुलाई 2018 से संविलियन करते हुए समस्त सेवालाभ की पात्रता संविलियन तिथि से दिया है। लेकिन, अर्धवार्षिकी आयु 62 वर्ष पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने के स्थिति में पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन पात्रता हेतु 10 वर्ष न्यूनतम अहर्तादायी सेवा पूर्ण नहीं होने के कारण, अधिकांश, पेंशन लाभ से वंचित हो जायेंगे।उन्होंने जानकारी दिया कि संयुक्त मोर्चा ने पेंशन पात्रता हेतु अहर्तादायी सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने का माँग किया है।उन्होंने बताया कि अनियमित/दैनिक वेतनभोगी/आंगनबाड़ी/कोटवार/अन्य कर्मचारियों के नियमितीकरण को संयुक्त मोर्चा ने हड़ताल के माँग में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी-अधिकारी केन्द्र/राज्य के विकास रथ के ध्वजवाहक हैं। कर्मचारियों ने कर्तव्य पथ पर बलिदान तक दिया है। अनुकंपा नियुक्ति के मामले में किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं रहना चाहिये। कर्मचारियों एवं उसके परिवार का उपेक्षा करना श्रम का अपमान है।

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