बैकुंठपुर।
आज बंगाल कांड ने एक बार फिर इस बात को खडा कर दिया है कि आपराधिक मानसिकता वाले लोगों को महिलाओं से इतनी नफरत क्यों है। आदमी यह कैसे भूल रहा है कि जिसने उसे जन्म दिया वह भी एक महिला थी। अबोध बच्चियों तक से बलात्कार हो रहे हैं। कुछ बीमार मानसिकता के लोगों ने हमारी की छवि को दागदार किया है। आज कोरिया जिले की महिलाए भी महिला डाक्टर के साथ हुई घटना के बाद अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही है।
आज देश में बेटियां हर जगह असुरक्षित महसूस कर रही हैं। आज कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं, मगर सरकारों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है। अब तो जैसे कोई भी विश्वास के योग्य नहीं रहा। अपने ही हैवान बन रहे हैं। बहू-बेटियां घर में भी असुरक्षित हैं। ऐसी घटनाओं से सरकारों के सुरक्षा संबंधी दावों की पोल खुल गई है। आखिर कब तक बेटियां दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी। यह सवाल खडा कर दिया है अब महिलाए सरकार से अपनी सुरक्षा की गहार लगा रही है।
आईये जाने क्या कहती हैं महिलाए……………….
वंदना राजवाडे-जिला पंचायत सदस्य, बैकुंठपुर, कोरिया

अत्याचारों का खात्मा किया जाए
अपराध की तारीख बदल जाती है, मगर तस्वीर नहीं बदलती। बेशक प्रतिवर्ष आठ मार्च को विश्व महिला दिवस मनाया जाता है, मगर ऐसे आयोजन मात्र औपचारिकता भर रह गए हैं। हर वर्ष एक संकल्प लिया जाता है कि महिलाओं को अत्याचारों से मुक्ति दिलाई जाएगी, अत्याचारों का खात्मा किया जाए।
वंदना जायसवाल-संचालिका, न्यू लाईफ संस्था, बैकुंठपुर, कोरिया

महिला सुरक्षा के कड़े कानून का खौफ नही
महिलाओ की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, मगर धरातल पर सच्चाई की बेहद खौफनाक तस्वीरें हैं। आज महिलाएं हर क्षेत्र में कामयाबी की बुलंदियां छू रही हैं, चांद तक अपनी काबिलियत का परचम लहरा रही हैं। महिला सुरक्षा के लिए कई कड़े कानून भी हैं, मगर व्यवहार में उनका कोई खौफ नजर नहीं आता।
डॉ. मुधुरिमा पैकरा- बैकुंठपुर, कोरिया

निर्भया कांड के बाद जगी आश हुई बेकार
यह बहुत चिंता का विषय है कि ऐसे प्रकरण थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। 16 दिसंबर, 2012 को हुए निर्भया कांड को लेकर हर भारतीय उद्वेलित हुआ था। तब कानूनों को और कठोर बनाया गया था, और उम्मीद जगी थी कि महिलाओं के साथ हैवानियत की घटनाएं बंद हो जाएंगी। मगर ऐसा नहीं हुआ।
साधना जायसवाल-पार्षद, बैकुंठपुर, कोरिया

लोगो के अदंर मर गई है इंसानियत
अगर वे कानून सही तरीके से लागू होते, तो ऐसे मामलों में इजाफा न होता। हर वर्ष के आंकड़े में महिलाओं के साथ दरिंदगी लगातार बढ़ी दर्ज होती है। तबसे अब तक लगातार बलात्कार और हत्या की घटनाएं बढ़ती गई हैं। दरिदों की अराजकता बढ़ती ही जा रही है। देश भर में नाबालिको से सामूहिक बलात्कार किया जा रहा है। लोगो के अदंर मर गई है इंसानियत।
शिल्पी गुप्ता-पार्षद, बैकुंठपुर, कोरिया

सडक पर हर ओर घूम रहे राक्षस
सडक पर घूम रहे राक्षसो की हैवानियत से अब दिल दहलाने लगा है। दरिंदों को जब तक ऐसी कड़ी सजा नहीं मिलेगी, जो दूसरों के लिए सबक साबित हो, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगना कठिन रहेगा। देश में लड़कियां कितनी महफूज हैं, इन घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है। देश में हर रोज अबोध बच्चियों से लेकर अधेड़ उम्र की महिलाओं से बलात्कार हो रहे हैं।
अर्चना गुप्ता-पूर्व पार्षद, बैकुंठपुर, कोरिया

महिलाओं पर जुल्मों की सूची लंबी
देश में प्रतिदिन ऐसे मामले हो रहे हैं और निरंतर इनमें वृद्वि हो रही है। छेड़छाड़ और तेजाब फेंकने जैसी घटनाएं भी रुकने का नाम नहीं लेतीं। बदमाश चलती बस में लड़कियो से छेड़छाड़ करते हैं। कोई उन्हे रोकने का साहस नही करता है विडंबना है कि देश में महिलाओं पर जुल्मों की सूची लंबी होती जा रही है।
अन्नपूर्णा सिंह-नेता प्रतिपक्ष, बैकुंठपुर, कोरिया

बीमार मानसिकता का प्रतीक
जब दिल्ली, कोलकात जैसे प्रदेश और देश की राजधानियो में महिलाए सुरक्षित नहीं है, तो गांवों और कस्बों का क्या हाल होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। आदमी यह कैसे भूल रहा है कि जिसने उसे जन्म दिया वह भी एक महिला थी। अबोध बच्चियों तक से बलात्कार हो रहे हैं। यह बीमार मानसिकता का प्रतीक है।
अनामिका एक्का-इंजिनियर, बैकुंठपुर, कोरिया

सार्वजनिक स्थलों पर कडी हो सुरक्षा
जनमानस को अब संकल्प लेना तथा एकजुट होकर ऐसे लोगों के खिलाफ खड़ा होना होगा, जो देश के लिए कलंक हैं। अगर अब भी कानूनी रूप से सख्ती नहीं बरती गई, तो ऐसे दरिंदे फिर से घिनौनी वारदात को अंजाम देते रहेंगे। केंद्र सरकार को चाहिए कि देश के सार्वजनिक स्थलों पर हर समय सुरक्षा व्यवस्था कायम की जाए।

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