नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. मधुरिमा पैकरा ने किया सफल आपरेशन

बैकुंठपुर।

01-दोनो बच्चे,

02-डॉ. मधुरिमा पैकरा

कोरिया जिले के जिला अस्पताल बैकुंठपुर में जन्मजात मोतियाबिंद की सफल सर्जरी की गई। आधुनिक मशीन के बिना अस्पताल के डॉक्टरों ने यह कारनामा कर दिखाया। इसके बाद दो बच्चों को रोशनी मिल गई। आंखों की विशेषज्ञ डॉ. मधुरिमा पैकरा ने यह ऑपरेशन किया। बताया गया कि मोतियाबिंद का शिकार 15 वर्षीय बच्ची रीता सिंह करियाम निवासी गणेशपुर खडगवा जिला एमसीबी, जिसे बचपन से दोनों आंखों में मोतियाबिंद था। वह चिरमी आश्रम के हॉस्टल में रहकर पढ़ रही थी इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच में बच्ची की बीमारी का आंकलन कर जिला अस्पताल बैकुंठपुर भेजा। दोनो बच्चो की आखो की रौशनी मिलने से खुश डॉ. मधुरिमा पैकरा ने कहा कि मैं एैसे सभी माता पिताओ से अपील करती हॅू कि जिनके बच्चो में इस तरह की बीमारी है या उन्हे कोई अन्य दिक्क्त है वो जिला अस्पताल आकर मुझसे मिले जिला अस्पताल में वे अपना इलाज निशुल्क करा सके हैं।

अर्पित के दोनो ऑखो को मिली रौशनी

वहीं पर 10 वर्षीय बालक अर्पित ढोलपाकर निवासी बैरागी मनेंद्रगढ़ जिला एमसीबी का निवासी बताया जा रहा है। बालक भी जन्मजात मोतियाबिंद का शिकार था जिसके एक ऑख का ऑपरेशन चार साल पहले मनेन्द्रगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के कैंप में किया गया था एवं इसके दूसरे आंख का इलाज जिला अस्पताल बैकुंठपुर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुरिमा पैकरा के द्वारा किया गया। अर्पित के परिजनो ने बताया कि अब उसे दोनो ऑखो से दिखाई दे रहा है।

बच्चो ने जताया डाक्टर का आभार

डाक्टरो ने बताया कि दोनो बच्चो को गुरुवार की सुबह पट्टी बदलने के बाद छुट्टी दे दी जायेगी। फालोअप में सात दिन बाद पुनः बुलाया गया है। जन्मजात मोतियाबिंद का यह जटिल ऑपरेशन होता है। मंगलवार को ऑपरेशन के बाद 48 घंटे इन मरीजों को रखने के बाद गुरुवार को छुट्टी दिया जायेगा। वर्तमान में दोनो बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनकी आंखों की रोशनी भी आ चुकी है। दोनो बच्चे डाक्टर को अपना आभार जताते हुए कहा थैक्यू मैडम अब हम भी दूनिया देख सकते हैं।

आज समझ आया डाक्टर को भगवान क्यो कहते हैं

डाक्टरो ने बताया कि रिता का एक ऑख पूरी तरह से ठिक हो गया है। जबकि उसका दूसरे आख का आपरेशन अगले महिने किया जायेगा। डाक्टरो ने कहा कि आने वाले दिनो में रीता भी आम बच्ची की तरह अपना जीवन जी सकती है। बच्ची के पिता देव सिंह ने बताया कि बडे अस्पताल में हमारे लिए जाना संभव नही था आज रीता की आख ठिक हो गई है जल्द ही उसे दूसरा आख भी मिल जायेगा। आज समझ आया कि डाक्टर को भगवान क्यो कहते हैं।

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