अर्नब के तांडव ने डाराया……..अनहोनी के डर से हाई अलर्ट पर जिला प्रशासन……लोगो से सतर्क रहने को कहा……आधी रात से तेज हवाओ संग बारिश की आशंका से सहमे लोग…..135 किलो मीटर की रफतार से लैंडफाल ने डराया

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बैकुंठपुर।

आंध्र प्रदेश और बापटला के बीच सीवियर साइक्लोन के रूप में अर्नब साइक्लोन लैंड फाल कर चुका है अर्नब साइक्लोन का सुबह से छत्तीसगढ़ में असर दिखाई देने लगा है अर्नब साइक्लोन की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में हवाओं के साथ हल्की बारिश भी शुरू हो चुकी है। इसकी वजह से मौसम पूरी तरह से बदल चुका है। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में उठा भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकराने के अब तबाही की मजंर भी नजर आने लगा है। इस भयंकर चक्रवात का सीधा और व्यापक असर पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। समुद्र की तरफ से आ रही ठंडी और नम हवाओं ने प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट दर्ज कराई है, जिससे दिन में भी ठंडक का अहसास होने लगा है।

तूफान की स्थिति और छत्तीसगढ़ में प्रभाव

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह चक्रवाती तूफान 125 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट को पार करेगा। इसके प्रभाव से 28 और 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दक्षिणी तथा मध्य हिस्सों में भारी से अतिभारी 115.5 से 204.5 मिमी तक बारिश होने की प्रबल संभावना है। विशेषकर बस्तर संभाग में 204 मिमी से अधिक की सीमांत वर्षा और लगभग 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

इसलिए हैं प्रशासनिक तैयारियां हाई अलर्ट पर

चक्रवात के आसन्न खतरे को देखते हुए बस्तर संभाग के सभी प्रमुख जिलोंकृबीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर में प्रशासन को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है। इंद्रावती, मारकंडी और नारंगी जैसी नदियों के तटीय गांवों तथा निचले इलाकों में विशेष मुनादी कराकर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है।

किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 18 से अधिक भवनों को सुरक्षित राहत शिविरों में बदला गया है, जहां भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

इसके अलावा, जिला स्तर पर 24 घंटे सक्रिय रहने वाला बाढ़ नियंत्रण कक्ष हेल्पलाइन नंबररू 07782-223122 भी शुरू किया गया है, और किसी भी आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा होमगार्ड की टीमों को तैनात कर दिया गया है।

कई क्षेत्रो में देखे को मिला अनोखा नजारा

इस चक्रवाती तूफान के प्रभाव के बीच धमतरी और जगदलपुर में आसमान का एक दुर्लभ और अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां सूर्यास्त के समय बादल गहरे लाल रंग के दिखाई दिए। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जब बारिश नहीं होती लेकिन आसमान में घने बादल छाए रहते हैं। तब प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण सूर्यास्त के वक्त किरणें अधिक दूरी तय करती हैं, जिससे ऐसी लाल और नारंगी रंग की दुर्लभ खगोलीय छटा दिखाई देती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्राकृतिक घटना को सीधे तौर पर तूफान का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

दो दिनों की चेतावनी और अर्नव का अर्लट

29 अक्टूबर उत्तर छत्तीसगढ़ में चक्रवात के आगे बढ़ने के साथ ही कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में भारी तबाही की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कई अन्य जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट के साथ तेज आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है। गौरतलब हो कि इससे पूर्व 28 अक्टूबर बस्तर और मध्य क्षेत्र बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और कोंडागांव जिलों में भारी से अतिभारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था इसके अलावा रायपुर, दुर्ग, धमतरी और महासमुंद सहित 15 जिलों में ऑरेंज अलर्ट तथा सरगुजा संभाग के जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है।

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