तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
लोक आस्था का महापर्व छठ की तैयारियां शुरू हो गयी हैं पुरे जिले में लोग छठ पूजा की तैयारी में जुट गये हैं छठ घाटों की साफ-साफाई की जा रही है जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर छठ में कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए पूजा की तैयारी की जा रही है। बैकुन्ठपुर नगर पालिका कंे अध्यक्ष अषोक जायसवाल ने कहा कि छठ को लेकर जिला प्रषासन ने अब तक कोई गाइडलाइंस के जारी नही किया है।
कल बुद्धवार को बैकुन्ठपुर एसडीएम बैठक लेने जा रहे हैं तभी आगे के बारे में कहा जा सकता है। उन्होने बताया कि दइ को ध्यान में रखते हुए बैकुन्ठपुर पैलेष तालाब की साफ सफाई करा दी गई है। बाकि रंग रोगन टेंट आदि इस बार नही लगाया जायेगा।
दीपावाली के बाद अब छठ पूजा की बारी है। महिलाओं के लिए खास महत्व वाले इस त्योहार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। आमजन के साथ ही स्थानीय प्रशासन ने भी कमर कस ली है। उत्तर भारत और खासतौर पर बिहार, यूपी और झारखंड के लोग यह त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। हालांकि इस बार पूरे देश में छठ पूजा पर कोरोना महामारी का असर नजर आ रहा है।
इससे पूर्व ही जिला प्रषासन सार्वजनिक स्थानों पर कम भीड़ जुटाने की अपील की गई है। लोगों से कहा जा रहा है कि वे घर पर ही जल स्रोत बनाकर पूजा अचर्ना करें। बुद्धवार छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय से हो रही है, इसके गुरुवार को खरना तो तीसरे दिन छठ पर्व का प्रसाद तैयार किया जाता है और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पर्व के चैथे और आखिरी दिन उगले सूर्य की आराधना के साथ चार दिवसीय छठ पर्व पूर्ण होगा।
ये है छठ का कार्यक्रम
बुद्धवार – नहाए खाए
गुरुवार – खरना
षुक्रवार – षाम पहली अर्घ्य
षनिवार – सुबह दूसरी अर्घ्य
इसलिए की जाती है सूर्य की आराधना
छठ पूर्व में सूर्य की आराधना का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छठी माता को सूर्य देवता की बहन माना जाता हैं। कहा जाता है कि छठ पर्व में सूर्य की उपासना करने से छठ माता प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति तथा संपन्नता प्रदान करती हैं। छठ पर्व कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है।
छठ पूजा पूजा के मुहूर्त
20 नवंबर छठ पर्व की शुरुआत होगी। इस दिन सूर्योदय 6.48 पर होगा तथा सूर्यास्त 17.26 पर होगा। वैसे षष्ठी तिथि एक दिन पहले यानी 19 नवंबर को रात 9.58 से शुरू हो जाएगी और 20 नवंबर को रात 9.29 बजे तक रहेगी। इसके अगले दिन सूर्य को सुबह अर्घ्य देने का समय छह बजकर 48 मिनट है।
- पहला दिन (नहाय खाय, 18 नवंबर दिन बुधवार) व्रत रखने महिलाएं स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण करती हैं। शाम को शाकाहारी भोजन होती है।
- दूसरा दिन (खरना, 19 नवंबर दिन गुरुवार) कार्तिक शुक्ल पंचमी को महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को भोजन करती हैं। शाम को चाव व गुड़ से खीर बनाकर खाई जाती है।
- तीसरे दिन (षष्ठी के दिन) इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। प्रसाद व फल बांस की टोकरी में सजाये जाते हैं। टोकरी की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य को अर्ग देने और पूजा के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाती हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा की जाती है।
- चैथे दिन सूर्योदय के समय भी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद बांट कर छठ पूजा संपन्न की जाती है। छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं के द्वारा शकरकंद, लौकी एवं गन्ने की खरीदी की जा रही है। वहीं पर्व को देखते हुए बाजार में इनकी आवक बढ़ गई है।

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