बाड़ी में सब्जी उत्पादन से ही दैनिक खर्च के लिए पैसे कमा रहा है हेतराम का परिवार

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


अपनी मेहनत के लिए पहचाने जाने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए छोटी-छोटी सहूलियत एक बड़ा काम कर जाती हैं। एक आदिवासी परिवार के लिए एक छोटा सा जल संसाधन कितना उपयोगी हो सकता है इस बात का अंदाज आप ग्राम पंचायत डांेगरीटोला में जाकर देख सकते हैं। भरतपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चांटी से परिसीमन के बाद प्थक ग्राम पंचायत बन चुके डोंगरीटोला में रहने वाले सात सदस्यों के एक आदिवासी परिवार के लिए कुंआ अब आर्थिक संबल की पहचान है। पहले दूसरे के खेतों में मजदूरी करने वाला यह परिवार अब कुंए से सिंचाई का लाभ लेते हुए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। दैनिक जरूरत के साथ ही इस परिवार को अपने मासिक खर्च के लिए कंही और नहीं जाना पड़ता। उनके खेतों मंे इतनी सब्जी ही हो जाती हैं कि उन्हे साप्ताहिक बाजारों में बेचकर यह परिवार पांच से छ हजार रूपए प्रतिमाह कमाने लगा है। अपनी मेहनत से आत्मनिर्भर होते इस परिवार के मुखिया श्री हेतराम महात्मा गांधी नरेगा के तहत बने कंुए से काफी खुष हैं।


गोंड़ समुदाय से आने वाले ग्राम डोंगरीटोला निवासी श्री हेतराम और उनकी पत्नी हिरोंदिया बाई ने बताया कि उनके पास घर के समीप लगभग आधा एकड़ भूमि है और कुल तीन एकड़ भूमि गांव के अलग अलग हिस्सों में है। उनके तीन बच्चे हैं। जो उन्हे खेती में मदद करते हैं। महात्मा गांधी नरेगा के तहत पंजीकृत इस श्रमिक परिवार के पास पहले सिंचाई और निस्तार के साथ पेयजल के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा धान की असिंचित खेती के अलावा उनके परिवार के पास कोई अन्य रोजगार का साधन ना होने से पूरा परिवार मनरेगा के अकुषल श्रम पर ही निर्भर था। वर्ष 2017-18 में महात्मा गांधी नरेगा के तहत ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर श्री हेतराम के बाड़ी में कुंए का निर्माण मानक प्राक्कलन के अनुसार कराया गया। ग्राम पंचायत की देखरेख मे ंबने इस कुंए में काम करते हुए श्री हेतराम के परिवार को 80 दिन का अकुषल श्रम का मूल्य भी प्राप्त हुआ।
कुंए के बन जाने के बाद से ही यह परिवार अपनी मेहनत से आधे एकड़ की बाड़ी को हरा-भरा रखे हुए हैं। श्री हेतराम ने बताया कि पूरा परिवार बाड़ी में होने वाले साग-सब्जी से रोजगार और दैनिक उपयोग के सामानों के लिए आत्मनिर्भर हो गया है। आलू टमाटर, गोभी मिर्च सहित अन्य सब्जियों के उत्पादन से उन्हे हर माह पांच से छ हजार रूपए की आय होने लगी है। इससे उनके परिवार के दैनिक खर्च के लिए पर्याप्त राषि मिल जाती है। इसके अलावा घर में खाने के लिए भी खूब हरी सब्जी उपलब्ध रहती है। श्री हेतराम को उनकी पत्नी और बेटे रामजतन सिंह बाड़ी में मदद करते हैं। इससे उनके परिवार के लिए आवष्यक मासिक आमदनी प्राप्त हो जाती है। मेहनतकष परिवार के लिए पेयजल और दैनिक उपयोग के लिए भी अब पर्याप्त जल मनरेगा के कुंए में उपलब्ध है।

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