तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
शारदीय नवरात्र शनिवार 17 अक्टूबर से प्रारंभ हो रही है। इसमें विशेष दिन नवमी और दशमी को माना गया है। जानकारो के अनुसार इस बार नवमी और दशमी दोनों एक ही दिन पड़ रहा है। इस सबंध में जानकार बताते है कि इस वर्ष शारदीय नवरात्र 17 से 25 अक्टूबर तक है। इसके लिए देवी मंदिरों में तैयारी शुरू हो गई है। देवी आराधना का पर्व विशेष संयोगों के साथ आएगा। बुद्घादित्य और सर्वार्थसिद्घि जैसे खास योग इस बार शक्ति साधना को और महत्वपूर्ण बनाएंगे। नवरात्र में देवी के नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है। नवमी तिथि की समाप्ति 25 अक्टूबर को सुबह 7ः42 बजे होगी। इसके बाद दशमी लग जाएगी। इसीलिए नवमी, विजयादशमी, अपराजिता पूजन इसी दिन किया जाएगा।
इस नवरात्र में बुद्घादित्य योग, तीन रवि योग, एक सर्वार्थसिद्घि योग रहेंगे। इससे नवरात्र में देवी आराधना करने वालों को सिद्घियां प्राप्त करने का विशेष अवसर मिलेगा। इस बार नवरात्र में ग्रहों की स्थिति ऐसी है कि इनमें की गई पूजा, अनुष्ठान, सिद्घि सफल होगी। तुला लग्न में सूर्य बुध विराजित हैं। सूर्य लाभेश होकर तुला लग्न में बुध के साथ विराजित हैं। इस स्थिति में पूजा-पाठ, अनुष्ठान, साधना की जाती है तो निश्चित ही सफलता, सुख समृद्घि मिलने की मान्यता है। मकर राशि में शनि देव, सिंह राशि में शुक्र,वृश्चिक राशि में केतु, धनु राशि में गुरु, वृषभ राशि में राहु और मीन राशि में मंगल विराजित हैं।
घट स्थापना तुला राशि व चित्रा नक्षत्र में
घट स्थापना 17 अक्टूबर शनिवार को तुला राशि का चंद्रमा, चित्रा नक्षत्र, विष्कुंभ योग, करण किंस्तुन रहेगा। एक साल में चार नवरात्र आती है। उसमें से दो गुप्त और दो उजागर नवरात्र होती है। अश्विन मास की नवरात्र सबसे खास नवरात्र मानी जाती है।
17 अक्टूबर को घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह 7ः51 से 9ः18 तक
दोपहर 1ः40 से 4ः04 तक

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