तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
एक ओर लगातार केंद्र सरकार द्वारा किसानों को उपकृत करने की योजना तथा उन्हें लाभान्वित करने की मंशा से यह योजना लागू की जा रही है। वही पर जिले में जिस तरह से उक्त योजना का बंदरबांट हुआ, उसके चलते इतना अवश्य कहा जा सकता है कि यह योजना किसानों के लिए नहीं बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए होकर रह गई है। आदिवासी बाहुल्य कोरिया जिले के किसानों के साथ कब तक सौतेला व्यवहार किया जाता रहेगा। केंद्र की महत्वकांक्षी योजना का लाभ किसानों को कब मिल पाएगा या हमेशा किसान ही ठगते रह जाएंगे। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे स्पष्ट झलक रही हैं। अब देखना होगा कि किसानों की झोली में केंद्र शासन की योजना का लाभ मिलेगा या नहीं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जिसमें सेंट्रल सब मिशन के तहत किसानों को 50 फीसद अनुदान पर ट्रैक्टर देने की योजना थी, लेकिन इस योजना की जानकारी विभाग के कर्मचारियों को ही नहीं है तो भला आम किसानों को इसकी जानकारी कहां हो पाती। राजनीतिक रसूख रखने वाले पार्टी विशेष के कार्यकर्ताओं को इस योजना का लाभ अवश्य ही मिल गया। योजना विभाग के अधिकारी तथा राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों तक इस योजना को एक तरह से गुपचुप तरीके से अपनों के बीच बांट लिया गया। जरूरतमंदों तक यह योजना पहुंच पाती इससे पहले बड़े किसानों को उपकृत करने की मंशा से इस योजना का बंदरबांट कर दिया गया।
जब तक किसानो को हुई जानकारी लक्ष्य समाप्त
केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना का आलम यह है कि अब जब किसानों को इस योजना की जानकारी हो रही है तब वे विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें इस बात की जानकारी दी जा रही है कि केंद्र सरकार द्वारा आवंटित कोटा खत्म हो चुका है। आप फार्म भर दीजिए आने वाले दिनों में लक्ष्य मिलने पर योजना का लाभ मिल सकता है। हालांकि तमाम प्रक्रिया आनलाइन होने की बात विभाग के अधिकारी तो कह रहे हैं, किंतु वास्तव में ग्रामीण अंचल में किसानों को आनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर ही राजनीतिक रसूख रखने वाले नेता तथा उनके कार्यकर्ताओं के बीच एक तरह से उपहार स्वरूप इस योजना को सौंप दिया गया।
योजना में 50 फीसद अनुदान का प्रावधान
सेंट्रल सब मिशन केंद्र सरकार की योजना है। इस योजना के पीछे शासन की मंशा यह है कि ग्रामीण अंचल के छोटे किसानों को इस योजना से लाभान्वित किया जा सके, जिसके लिए उन्हें 50 फीसद अनुदान का प्रावधान भी किया गया है। अगर बारिकी से लाभान्वित किसानों के बारे में भी गौर किया जाए तो छोटे किसानों तक यह योजना पहुंच ही नहीं पाई और बड़े किसानों ने एक तरह से इस योजना को हाइजैक कर लिया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर केंद्र सरकार की मंशा छोटे किसानों को उपकृत करने की भला कैसे पूरी होगी।

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