छत्तीसगढ और उत्तरप्रदेष राज्य में समझौता नही होने के बाद भी वाराणसी जा रही बसे

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


छत्तीसगढ और उत्तरप्रदेष राज्य के मध्य वर्तमान में बसो के संचालन के लिए कोई एग्रीमेंन्ट नही है फिर भी जिले से कांट्रैक्ट परमिट वाली टूरिस्ट बसों का नियम विरुद्ध संचालन बेखौफ हो रहा है। भाड़े पर रेगुलर सवारियां ढोई जा रही हैं। छत्तीसगढ के कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ, चिरमिरी से एवं मध्य प्रदेष के राजनगर से उत्तर प्रदेष के वाराणसी, झारखण्ड के राॅची, डाल्टेनगंज व बिहार के पटना तक लगभग 20 टूरिस्ट बसें व ट्रैवलर यात्री ढोने के लिए चलाई जा रही हैं।
एक्का दूक्का बसो को छोड दे तो बाकी सभी बसो का संचालन टूरिस्ट बस परमिअ से किया जा रहा हैं। बताया जा रहा है कि बसों के पास सिर्फ कांट्रैक्ट परमिट है। इतनी लंबी दूरी का रूट परमिट किसी भी बस के पास नहीं है। नियमित सवारी ढोने के लिए रूट परमिट अनिवार्य होता है।
नियम विरुद्ध टूरिस्ट बसों के संचालन से परिवहन निगम को राजस्व का तगड़ा नुकसान हो रहा है। मजे की बात यह है कि कुछ बस एजेंसियों ने बाकायदा टिकट बुकिग सेंटर भी खोल रखे हैं, लेकिन न तो यातायात पुलिस की निगाह उनकी ओर जा रही है और न ही परिवहन विभाग के अधिकारी ही इन अवैध बसों के संचालन को रोकने में रुचि दिखा रहे हैं।

चारो राज्यो तक है इनकी सेटिंग
कांट्रैक्ट परमिट पर चल रही बसों के संचालकों की मध्य प्रदेष, छत्तीसगढ, झारखण्ड, बिहार एवं उत्तर प्रदेष तक पुलिस और परिवहन विभाग से सेटिग है। इसी का फायदा उठा कर सवारियां ढोई जा रही है। अजीब बता है कि जब उत्तर प्रदेष और छत्तीसगढ में बसो के संचालन को लेकर किसी प्रकार की समझौता राज्य स्तर पर नही है फिर बेधडक बसो का संचालन कैसे हो रहा है।

तीन तरह की होती हैं कांट्रैक्ट परमिट
क्या है परमिट का नियम कांट्रैक्ट परमिट तीन तरह की दी जाती है। एक निजी कंपनियों में कर्मचारियों को ढोने की, दूसरी परमिट स्कूल बसों को दी जाती है। तीसरे प्रकार की परमिट में टूरिस्ट बसें शामिल हैं। इन्हें एक समूह की बुकिग कर गंतव्य तक पहुंचाना होता है। लेकिन टूरिस्ट परमिट वाली बसों में सवारियां बैठाई जा रही है।

सिस्टम से सरकार को लाखो की चपत
खुद सरकारी सिस्टम की लापरवाही और मिलीभगत के कारण छत्तीसगढ सरकार कोे रोजाना लाखों रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। राज्य भर से रोजाना लगभग 2 हजार ऐसी बसें चलती हैं, जिनके पास परमिट तो कॉन्ट्रेक्ट कैरिज व टूरिस्ट का है लेकिन वे स्टेज कैरिज की तरह संचालित हो रही हैं।

इस खेल को यूँ समझें
1- इस परमिट वाली बसों में सिर्फ समूह बुक कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर छोड़ा जा सकता है। इन बसों में सवारियों की सूची रखना जरूरी है। इन बसों को रास्ते में कहीं भी सवारी उतारने व बैठाने का अधिकार नहीं होता।

2- परिवहन विभाग ने राज्य में पांव पसार रहे बस माफिया को खुली छूट दे रखी है। कॉन्ट्रेक्ट कैरिज परमिट वाली बसें रास्ते में सवारियों को बैठा और उतार रही हैं। इससे रोडवेज सहित खुद परिवहन विभाग को भी राजस्व घाटा हो रहा है।

वर्जन…….
हमारे द्धारा बीच बीच में कार्यवाई किया जाता है। आगे भी किया जायेगा। रही बात यूपी जाने वाली बसो का तो वर्तमान में दोनो राज्यो के बीच अभी कोई एग्रीमेन्ट नही है।

अरविन्द भगत – जिला परिवाहन अधिकारी

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