तीखे धूप में नौनिहालो के जिम्मे महुआ बिनाई

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


दो पैसे के कारण परिवार के लोगो को न जाने क्या क्या करना पडता है। जहा एक ओर लोग कूलर एसी में पड रही भीष्ण गर्मी से बचाव कर रहे हैं। वही पर दूसरी ओर वनांचल क्षेत्रों में नौनिहालो समेत पूरा परिवार 4 बजे भोर से दोपहर 11 बजे तक जान जोखिम डाल कर जंगलो में महुआ बीनने का कार्य करते है। कटगोडी, सोनहत, पुसला, रजौली, रामगढ सहित आसपास के क्षेत्रों में महुआ बीनने के लिए धूप की परवाह नहीं करते हुए ग्रामीण जुटे हैं। रजौली निवासी प्रेम साय ने बताया कि आय का कोई साधन नहीं है। जिसके कारण महुआ फूल बीनकर जीवन-यापन करते हैं। महुआ फूल को सुखाने के बाद उसे 40 से 45 रुपये किलो में बेचते हैं। रजौली निवासी रामेश्वर ने बताया कि महुआ फूल का सीजन मात्र एक महीने तक रहता है। मौसम साफ रहता है तो महुआ फूल पेड़ से अधिक गिरता है और खराब मौसम होने से नुकसान झेलना पड़ता है। जिसमें बडो का हाथ बच्चे भी बटाते हैं। वही पर अन्य ग्रामिण लोगो का कहना है कि महुआ फूल का समय मार्च महीने में ज्यादा रहता है। फूल झड़ने के बाद डोरी बीनने का काम करते हैं। जिससे तेल पेराई करके घर में उपयोग करते हैं और यह तेल दवाई के रूप में भी काम आता है।

कई किसान पेड़ के नीचे महुआ फूल के लिए आग लगा कर छोड़ देते हैं। जिससे जंगल के वनौषधि जलकर राख हो जाती है। गामीणों के लिए महुआ के फूल आमदनी का मुख्य स्रोत है। महुए को बेचकर दैनिक वस्तुएं खरीदते हैं। वन विभाग की ओर से अलग-अलग स्थानों पर कार्यशाला लगाकर जानकारी दी जाती है। बैकुन्ठपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर अखलेश मिश्रा ने बताया कि जंगलों में आग लगाने वाले पकड़ में नहीं आते हैं। इसलिए अग्नि प्रहरी को तैनात किया गया है। वहीं वन विभाग गांवों में मुनादी करके जंगलों में आग नहीं लगाने की हिदायत भी दे रहा है। जंगल में आग लगाने पर अगर पकड़ा गया तो दंड का प्रावधान है।

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