कोरिया जिले में फर्जीवाडा का सनसनीखेज मामला सामने आया। इनकी शिकायत पर चरचा थाने में बुद्धवार को शिकायत दर्ज कराई गई। फर्जी चेक के माध्यम से 1 करोड़ 29 लाख 788 रुपए शिकायत पर फर्जीवाड़ा करने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ पुलिस ने धारा 467, 468, 471, 420 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। इस सबंध में चरचा थाना प्रभारी अनिल साहू ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है इससे आगे अभी कुछ नही कहा जा सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक के बैकुन्ठपुर शाखा प्रबंधन ने पत्र लिखकर कहा है कि कलेक्टर कार्यालय के नाजरात शाखा के खाता क्रमांक 11032262800 में क्लोनिंग चेक के माध्यम से हुए फर्ज़ी चेक के आहरण की सूचना मिलते ही समाशोधन हेतु आवश्यक कार्यवाही करते हुए 29 लाख रुपए के 3 चेक आहरण पर रोक लगाते हुए रिकवर कर लिए गए हैं। शेष राशि की रिकवरी हेतु प्रक्रिया जारी है। आरीबीआई के नियमानुसार चेक प्रेसेंटिंग बैंक से क्लेम कर रकम का भुगतान उक्त खाता क्रमांक में जल्द कर दिया जाएगा।
बैंक प्रबंधन की माने तो चेक क्रमांक 187906 तक का चेक ही कार्यालय द्वारा जारी किया गया है तथा शेष चेक मूल चेकबुक में आज भी कार्यालय में उपलब्ध है। स्टेट बैंक बैकुंठपुर के मैनेजर द्वारा उपलब्ध कराए गए स्टेटमेंट, 10 नग स्केन्ड चेक की जांच से पता चला कि उपरोक्त सभी 21 चेक इस कार्यालय से न तो जारी किया गया है और न ही उक्त चेकों का इस कार्यालय के चेक पंजी में उल्लेख है। स्पष्ट है कि उपरोक्त दर्शित चेक की कूटरचना कर रकम का आहरण किया गया है।
उक्त खाते में जमा राशि के संबंध में 13 अप्रैल को ब्रांच मैनेजर द्वारा पत्र के माध्यम से बताया गया कि 22 मार्च 2022 से लेकर 13 अप्रैल तक आपके कार्यालय को जारी चेक बुक में से चेक क्रमांक 187915, 187913, 187914, 187916, 187920, 187923, 187926, 187925, 187928, 187929, 187932, 187918, 187917, 187919, 187924, 187927, 187930, 187922, 187931, 187933, 187934 की राशि समान नाम के संस्था या व्यक्ति के खातों में क्लीयरिंग द्वारा कई बार जमा हो रहा है। इन 3 खातों में 1 करोड़ 29 लाख 788 रुपए का आहरण कर लिया। हालांकि मामले में अभी कोई अपना मुह खोलने को तैयार नही है फिर भी अपने तरिके का अनोखे मामले में जिस शातिराने तरिके से चेक की क्लोनिंग की गई है उससे ममाले में संबधित कार्यालय के लोग किस स्तर पर मिली भगत में शामिल है पता चल रहा है।
ऐसे होता है चेक क्लोन
चेक क्लोन करने वाले लोग डाकिए या फिर बैंक अधिकारियों से मिलकर चेकबुक या फिर कोई चेक हासिल कर लेते हैं। आजकल चेक पर खाताधारक की पूरी जानकारी होती है। फर्जीवाड़ा करने वाले लोग बैंक कर्मचारियों से मिलकर ऐसे खातों की जानकारी हासिल करते हैं जिनमें ज्यादा रकम होती है। ये लोग बैंक खाते से खाताधारक का मोबाइल नंबर हटवा देते हैं। लैपटॉप में स्कैन करने के बाद नए नंबर डाल चेकों पर खाता नंबर, नाम और चेक नंबर प्रिंट किए जाते हैं। इसके बाद बेयरर चेक बनाकर बैंकों से खाते में भुगतान लिया जाता है
बचने के लिए करें यह उपाय-
- इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय बहुत ही सावधानी बरतें.
- किसी अंजान आदमी के साथ इंटरनेट बैंकिंग पर लेनदेन न करें.
- इंटरनेट बैंकिंग पार यूजर आईडी और पासवर्ड किसी से शेयर न करें.
- समय-समय पर इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड बदलते रहें.
- अपना चेक, चाहे वह केंसिल हो, किसी को न दें.
- फोन पर बैंक खाते के बारे में मांगी गई जानकारी कभी शेयर न करें.
- क्रेडिट और डेविड कार्ड को इस्तेमाल करते समय भी विशेष ध्यान रखें.
- बैंक से आने वाले हर मैसेज को ध्यान से पढ़ना चाहिए
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