जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इनसे संक्रामक रोगों को लेकर लोगों की चिता बढ़ गई है। क्योंकि इन दिनों मलेरिया, वायरल फीवर ने भी पैर पसार रखा है। जैसे-जैसे गर्मी के तेवर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है। षहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी इनके आतंक से परेशान हैं। पहले तो शाम ढलने के बाद इनका हमला शुरू होता था। अब तो दिन में भी इनके डंक से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। इनके रोकथाम की बातें वालपेंटिग, पोस्टर व इश्तेहारों में सिमट कर रह गई है। जबकि हकीकत में बचाव के उपायों का कहीं नामोनिशान भी देखने को नहीं मिल रहा है।
घर हो या बाहर सड़क पर, ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां मच्छरों का आतंक न हो। गर्मी के दिनों में जहां अपच और डायरिया जैसे रोग पनपते हैं, वहीं मलेरिया और वायरल फीवर भी लोगों को सताता है। लोग इस बात को लेकर आशंकित हैं कि यदि मच्छरों का प्रकोप इसी तरह बढ़ता रहा तो संक्रामक रोग लोगों को अपनी चपेट में ले लेंगे, जिससे स्थिति भयावह हो सकती है। अधिकांश लोग मलेरिया से पीड़ित हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से ग्रामीण इलाकों में डीडीटी का छिड़काव एवं फागिग कराए जाने की मांग की है। ग्रामवासीयो का कहना है कि बहुत पहले विभाग द्वारा डीडीटी व मैलाथियान का छिड़काव कराया जाता था। जिससे मच्छरों का प्रकोप कम हो जाता था। लेकिन अब इसका छिड़काव नहीं किया जा रहा है। जिससे मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्घि हो रही है।
मच्छरो से निजात पाने उठाना पड रहा खर्च
लोग मच्छर मारने के लिए हर माह एक परिवार 100 से 300 रुपये तक खर्च करता है मच्छर मारने वाले क्वाइल व लिक्वड स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हैं। इससे लोग श्वास सहित कई रोगों के शिकार हो रहे हैं मच्छरों से होने वाली बीमारियों से प्रत्येक वर्ष लोगों की मौत होती है मलेरिया डेंगू सहित अन्य बीमारियों से बचने के लिए लोग मॉस्किटो किलर का उपयोग करते हैं हर महीने लाखों रुपये का मास्किटों किलर का इस्तेमाल होता है लेकिन मास्किटो किलर फायदा से अधिक नुकसान पहुंचा रहा हैं हर माह सैकड़ों रुपये खर्च होते हैं।
शाम होते ही घरों में मच्छरों की भरमार
ग्रामीण अंचलों में मच्छरों का आतंक बना हुआ है। शाम होते ही घरों में मच्छरों की भरमार हो जाता है रात के समय लोगों को अधिक दिक्कत होती है खासकर छोटे बच्चे अधिक परेशान होते हैं ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव नहीं किया गया है। गर्मी के दिनों में शाम होते ही मच्छर गांवों में बहोत ज्यादा पनप रहे है। बरसात सर पर है। बरसात के चलते गंदगी में और भी ज्यादा मच्छर पनपने की आशंका है।
नालियों की नही होती नियमित सफाई
स्वास्थ्य विभाग नाली नालो में व पानी एकत्रित हुए जगह पर दवा का छिड़काव कर दे तो ग्रामीण क्षेत्रों से मच्छरों का सफाया हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में साफ सफाई नियमित रूप से नहीं हो रही है। नालों का स्लैब खुले होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं इससे डेंगू मलेरिया होने का खतरा बढ़ गया है शाम होते ही घरों में मच्छर प्रवेश कर जाते हैं रात में मच्छर काटने के कारण लोगों का बुरा हाल हैं स्वास्थ्य विभाग मच्छरों के आगे नतमस्तक हो गये मच्छरों को मारने के लिए बजट के नाम पर विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। मच्छरों को मारने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। लेकिन वह पता नहीं किस विभाग के भरोसे बैठे है स्वास्थ्य विभाग सिर्फ कागज पर फाग मशीन व ब्लीचिंग पाउडर से मच्छरों को मार रहा है।
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