ज्योति कलश घी के लिए 1400 व तेल के लिए 751 देने होंगे शुल्क…….चैत्र नवरात्र कल से

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चैत्र नवरात्रि कल से आरम्भ हो रही है इससे पूर्व घरो और देवी स्थलाो पर अंतिम तैयारिया पूर्ण कर ली गई हैं। ये पर्व नौ दिनों तक मनाया जाता है इन नौ दिनों में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और अराधना होती हैं। चैत्र नवरात्रि में राम नवमी, चैती छठ पूजा भी की जाती मान्यता हैं इन नौ दिनों में जो भी मां दुर्गा भक्ति भाव और विधि विधान से पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस बार चौती नवरात्रि आज 9 अप्रैल से 17 अप्रैल तक मनाई जाएगी। इन दिनों में घरों में अखंड ज्योति जलती है, घट स्थापना की जाती है। अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन किया जाता है।

घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है कहते हैं कि कलश स्थापना अगर शुभ मुहूर्त में की जाए तो मां दुर्गा पूरे नौ दिनों तक घर में वास करती हैं। इस बार चौत्र नवरात्रि के पहले दिन 09 अप्रैल को घट स्थापना की जाएगी। घटना स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 11.23 से 12.13 तक है। कलश स्थापित करने से मां दुर्गा की पूजा बिना किसी विघ्न के पूरी होती है। घर में सुख समृद्धि आती है। घट स्थापना के समय साधक अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। साथ ही कलश को ईशान कोण में ही स्थापित किया जाता है।

ज्योति कलश स्थापना की तैयारी जोरों पर

जिले के विभिन्न दूर्गा मंदिरो में चैत्र नवरात्र महोत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। चिंदवारीडाढ मंदिर में ज्योति कलशों की स्थापना को दोपहर 11 बजे से होगी। हवन 17 अप्रैल को व कलश विसर्जन शोभायात्रा को होगी। मंदिर में प्रतिदिन प्रातः सात बजे से चण्डी यज्ञ व दुर्गासप्तशति का किया जाएगा। जिले के प्रमुख मंदिरों में चैत नवरात्रि में आस्था की ज्योति प्रज्वलित की जा रही है जिसका ज्योति कलश शुल्क मंदिर समितियों द्वारा तय किया गया है। चिनवारीडाढ मंदिर के श्रीकांत गढेवाल ने बताया कि मंदिर ज्योति कलश का घी का शुल्क में 250 रु की वृद्धि के साथ अब 1400 रुपये और वही पर तेल से जलने वाले दिये का शुल्क यथावत 751 रुपये रखा गया है। इस वर्ष नवरात्र को लेकर भव्य तैयारी की जा रही है।

12 से 15 तक चैती छठ पूजा का आयोजन

चैती छठ पूजा भी बिहार, यूपी और झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में मनाई जाती है। इस बार चैती पूजा 12 अप्रैल को नहाय खाय से शुरू होगी, 13 अप्रैल को खरना है, 14 अप्रैल को सांध्य अर्घ्य और 15 अप्रैल को सूर्याेदय के समय सूर्य को अर्घ्य देकर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस वत्र को करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि बनी रहती है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ अच्छा रहता है।

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