प्रदेश सरकार मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दे चुकी है जिले के अधिकारी मिलावटखोरों के खिलाफ नर्म रुख अपनाये हुए हैं। जिसकी वजह से जिला मुख्यालय से लेकर अन्य तहसीलो में मिलावट का गोरखधंधा करके आमजन की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
बता दें कि, जिला मुख्यालय बैकुठंपुर में दर्जनो दूध डेयरी और मिठाई-मावा की दुकाने संचालित हैं, जिनमें ज्यादातर कारोबारी दूध, दही, पनीर, मावा, घी, मिठाई और आइसक्रीम सहित अन्य खाद्य पदार्थों में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक केमिकल व अन्य मिलावटी पदार्थ मिलाकर काली कमाई करने में जुटे हैं।
जिसकी जानकारी जिले के खाद्य विभाग अफसरों से लेकर अन्य आला अधिकारियों को भी है, फिर भी उनके द्वारा ज्यादातर मिलावटखोरों की दुकान व कारखानों से कभी सैंपलिंग तक नहीं की जाती है। इससे जिले में मिलावट का कारोबार पैर पसारता जा रहा है।
शहर से लेकर जिले भर में मिलावट का कारोबार खुलेआम चल रहा है। यही वजह है कि, खाद्य पदार्थों के जितने भी सैंपल लिए जाते हैं। उनमें से काफी मात्रा में फेल होते हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी शहर के रसूखदार दूध डेयरी संचालक, मिठाई, किराना व अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों के सैंपल तक नहीं लेते हैं।
गर्मी के सीजन में बाहर से आने वाली बर्फ की सिल्लियो को जिले भर में भेजा जाता हैं। बर्फ बनाने वाले लोग खतरनाक केमिकल से लेकर मिलावट का अन्य सामान बडे? स्तर पर उपयोग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार चुप्पी साधकर बैठे हैं।
मिलावट खोरो पर होती है दिखावे की कार्यवाई
शहर सहित जिले भर के जिन दुकानदारों के खाद्य पदार्थों में मिलावट होने की वजह से सैंपल फेल हो चुके हैं। उनकी दुकानों को भी प्रशासन द्वारा बंद नहीं कराया जा सका है। बल्कि जिन 04 दुकानदारो के सैंपल फेल हुए थे उन्हे मात्र 5000 रु का जूर्माना लगाकर छोड दिया गया। जिसकी वजह से न तो जिले में मिलावट का कारोबार रुक पा रहा है और नहीं लोगों को मिलावट का धीमा जहर परोसने वालों पर ठोस कार्रवाई ही हो पा रही है।


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