स्कूल जाने के बजाय…..सड़कों पर भीखवृत्ति करने को विवश हैं बच्चे

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बाल संरक्षण अधिकार के हनन पर दर्ज हो अपराध सुनिश्चत करें जिम्मेदार

बैकुंठपुर।

देश का भविष्य माने जाने वाले बच्चे स्कूल जाने के बजाय भीख मांगने विवश हैं या फिर कुछ और कारण है। इस बात का जवाब में ही इस समस्या का समाधान छूपा हुआ है। इसलिए विभाग और जिला प्रशासन को चाहिए कि दिखावे की कार्यवाई के बजाय समस्या का समाधान खोजे।
जब भी जीवनयापन के लिए सड़कों पर भीख मांगते इन नौनिहालो को देखा जाता है तो ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारों द्वारा बच्चों की पढ़ाई तथा कल्याण केका असर कहा है। क्या सरकार की योजनाओ का लाभ इन तक नहीं पहुंच रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। परंतु फिर भी इन बच्चों तक इसकी किरणें नहीं पहुंच पाई हैं। जिससे पता चलता है कि इन योजनाओं का लाभ ऐसे पात्र बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर बस स्टैंड, सब्जी मंडी, बाजारो एवं धार्मिक स्थलो पर तो ऐसे भीखवृत्ति करते बच्चों को देखा जा सकता है।
इनमें प्राय गरिब परिवारो में रहने वाले बच्चों की संख्या अधिक होती है। बस स्टैंड पर दौड़ती बसों में तथा बसों से बाहर भीख मांगते समय कभी भी दुर्घटना होने का डर रहता है। परंतु पेट पालने की दौड़ में ऐसे बच्चे अपनी जिदगी पर दांव लगाए हुए हैं। सरकारी योजनाओ के संचालन की जिम्मेदारी जिले में महिला बाल विकास विभाग के जिम्मदारो की होती है।

जिला प्रशासन का निर्देश बेअसर

कोरिया कलेक्टर के निर्देष के बाद सिर्फ खानापूर्ति ही करता नजर आ रहा है। विभाग की तमाम कोषिषो की नाकामी का नजारा ही स्थानिय बस स्टैन्ड सहित कई भीड-भाड वाले जगहो पर देखा जा सकता है प्रतिदिन इस तरह का नजारा षहर में देखने को नही मिलता। जिसकी ओर सरकार और जिला प्रषासन कोे ध्यान देने की अति आवश्यकता है। भीख मांगते बच्चों अक्सर गलत संगत में पड़कर ऐसे रास्ते पर चलने लगते हैं, जिसके कारण उनका जीवन खराब हो जाता है।

लाचारी में भीख मांग रहे बच्चे

इनके चेहरे पर मासूसी और स्थिति बताती है कि यहां इनकी पूछपरख करने वाला कोई नहीं है। पैसों के लिए ये बच्चे मुसाफिरों के सामने कैसे हाथ फैलाते हैं। पूछने पर बताते हैं कि भीख मांगना उनकी लाचारी बन चुकी है। कुछ के माता-पिता उनसे भीख मंगवाते हैं तो कुछ बेघर और बेसहारा हैं, जिसके चलते ऐसा करना उनकी जिंदगी में शुमार हो चुका है। हैरानी तब होती है जब इसी स्टेशन में किशोर बच्चों के हाथों पर नशे का सामान दिखता है। वे कई प्रकार के समाग्रियो का इस्तेमाल नशे के तौर पर करते हैं।

जिम्मेदार बोले पूछ कर बताता हॅू

महिला बाल विकास अधिकारी कोरिया मनोज खलखो ने इसकी जानकारी लेने पर कहा कि मैं बाल संरक्षण अधिकारी से पूछ कर बताता हॅू।

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