हाई कोर्ट का आदेश नही मान रहा जिला प्रशासन, अब सुप्रिम कोर्ट जायेंगे फरियादी

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बैकुंठपुर।

कोरिया जिले में प्रशासन का रवैया इस समय बैखौफ नजर आ रहा है । पूर्व की कांग्रेस सरकार के दौरान इन्हीं परिस्थितियों के के कारण लोगों में भारी आक्रोश था और जनता ने भाजपा के हाथों सत्ता की चाबी सौप दिया। किंतु बीते सवा साल में प्रशासन के रवैये में लोगों में किसी भी तरह का परिर्वतन नहीं आया है। यही कारण जिम्मेदारो के रवैये से लोग आज भी उतना ही परेशान है।

वर्ष 2012 में हुए संयुक्त भर्ती परिक्षा के मामले में हाई कोर्ट के तमाम आदेशों के बावजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा हाई कोर्ट का आदेश नहीं माना जा रहा है। मामले में मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2012 में संयुक्त भर्ती परीक्षा अभियान में लगभग 11000 परीक्षार्थी शामिल हुए थे जिसमें से 37 लोगों को यह कहकर मेरिट सूची से बाहर कर दिया गया कि उन्होंने 200 अंक वाले परिक्षा में 100 अंक से अधिक प्राप्त किया है इसी को आधार बनाकर 37 लोगों को मेरिट लिस्ट से बाहर किया गया ।

प्रशासन ने हाई कोर्ट का आदेश नही माना

गलत आरोप लगाकर मेरिट सूची से बाहर करने को लेकर लोगो ने हाई कोर्ट का रुख किया । जिसके बाद 2014 में पहली बार हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया कि जिसमें कहा कि महीना परीक्षा को 03 महीना बीत जाने के उपरांत किसी प्रकार का नकल प्रकरण मान्य नहीं हो सकता । इसके बावजूद इन लोगों को प्रशासन से किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली। इसी मामले में दोबारा हाई कोर्ट का जाने पर कोर्ट पर 01 जुलाई 2024 के आदेश में कहा कि 120 दिन के भीतर सभी 37 लोगों को राहत दिया जाये।

कोर्ट आफ कंटेंप्ट भी रहा बेअसर

हाई कोर्ट द्धारा इन लोगो पर कोर्ट आफ कंटेंप्ट लगाया गया जिसके बाद 11 दिसंबर 2024 को पुनः हाईकोर्ट ने एक फैसला दिया है जिसमें 10 दिवस के भीतर आदेश पालन का अल्टीमेटम दिया था इसके बावजूद आज 01 महीने से अधिक हो जाने के बावजूद भी गलत तर्क देकर परीक्षा से बाहर किए गए अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की राहत नही हिमल सकी है।

जायेंगे सुप्रीम कोर्ट

हाई कोर्ट का आदेश का पालन कोरिया जिला सामान्य प्रशासन के संयुक्त भर्ती अभियान के नोडल अधिकारी अरुण मरकाम अपर कलेक्टर कोरिया से संपर्क कर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका । वही पर इस संबंध में अभ्यार्थियों का कहना है कि यदि आगामी दो महीना में उन्हें जिला प्रशासन से राहत नहीं मिलता है तो हम सुप्रीम कोर्ट जाने को विवश होंगे।

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