वंदे मातरम केवल गीत नहीं, भारत की आत्मा का स्वर है-वशिष्ठ ओझा
बैकुंठपुर।
राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर नगर पालिका परिषद् में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य नगर पालिका अधिकारी वशिष्ठ कुमार ओझा, नपाध्यक्ष अरुण जायसवाल, इंजी. आलोक चक्रधारी, शशी श्रीवास्तव और पर्षदो सहित नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री का उद्बोधन सुना और सामूहिक रूप से गीत गाया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को भी याद किया गया।
विदित हो कि राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शिवपुर चरचा नगर पालिका परिषद् सभागार में शुक्रवार को एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहा। कार्यक्रम में सीएमओ ने कर्मचारियों और नगर के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रेरक उद्बोधन लाइव सुना तथा उसके उपरांत सभी ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम् का सामूहिक वाचन कर तिरंगा लहराते हुए मातृभूमि के प्रति निष्ठा और समर्पण की भावना व्यक्त की। पालिका सभागार में उपस्थित सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रगीत की रचना के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें बताया गया कि वंदे मातरम् की रचना 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जो बाद में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बन गई।
इस अवसर पर देशभक्ति गीतों, कविताओं और भाषणों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को भी याद किया गया। सीएमओ श्री ओझा ने कहा कि वंदे मातरम् केवल भारत का राष्ट्रीय गीत ही नहीं, स्वतंत्रता आंदोलन का प्राण भी है। वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में मातृभूमि के प्रति गर्व, समर्पण और बलिदान की भावना जगाई। 150 वर्षों से यह गीत राष्ट्रवाद, एकता और नवऊर्जा का प्रतीक बनकर नई पीढ़ियों को प्रेरित करता आ रहा है।

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