लापरवाही…..नाबालिक तेज रफ्तार स्कूटी व बाइको से बेरोक-टोक जा रहे स्कूल
टीचर-ट्रैफिक विभाग बेखबर-हो सकती है 3 साल की जेल
बैकुंठपुर।
कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के केंद्रीय विद्यालय रामपुर के नाबालिक छात्रों को सरेआम तेज रफ्तार स्कूटी एवं बाइक चलाते हुए सड़कों पर देखा जा सकता है इन्हें रोकने के लिए ना तो स्कूल प्रबंधन के द्वारा ही कोई उपाय किए जाते हैं और ना ही पुलिस प्रशासन के द्वारा। जिसका नतीजा है कि आए दिन इन तेज रफ्तार वाहन चालन के कारण राहगीर घायल हो रहे हैं। जबकि स्कूली बच्चों द्वारा स्कूटी या अन्य वाहन से तेज चलाना कानूनन अपराध है, जिसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199 ए के तहत अभिभावकों को 25,000 जुर्माना और 3 साल तक की जेल हो सकती है।
सारे नियम कायदे ताक पर रखकर सड़कों पर कम उम्र के बच्चे धड़ल्ले से गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। हालांकि प्रशासन समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाता है, लेकिन इस गंभीर समस्या को पूरी तरह रोकने के लिए माता-पिता, स्कूल प्रबंधन और पुलिस प्रशासन तीनों की कड़ी सख्ती बेहद जरूरी है। स्कूल में नाबालिग बाइक और स्कूटी लेकर पहुंच रहे हैं। खतरनाक होने के बाद भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। रामपुर में ही जिला परिवाहन कार्यालय होने के बावजूद उसने नाक के नीचे विभाग के नियमो की धज्जिया उठाई जा रही हैं। फिर भी परिवहन विभाग के जिम्मेदारों के साथ ही स्कूल प्रबंधन बच्चों को बाइक और स्कूटी लेकर स्कूल आने पर रोक नहीं पा रहे हैं।
क्या कहता है नियम
मोटर वाहन एक्ट के अंतर्गत नाबालिग के वाहन से अगर किसी तरह की दुर्घटना होती है तो अभिभावकों को तीन साल की जेल हो सकती है। साथ ही उनपर 25 हजार रुपये के जुर्माना का प्रावधान है। इतने सख्त नियम के बाद भी बड़ी संख्या में अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों को बाइक और स्कूटी से स्कूल भेजते हैं। वही पर परिवहन विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि अभिभावक ही अपने बच्चों की जान को जोखिम में डालकर बाइक-स्कूटी से स्कूल भेज रहे हैं।
स्कूल प्रबंधन भी कम नही जिम्मेदार
स्कूल प्रबंधन भी बच्चों को बाइक से स्कूल आने पर नहीं रोक पा रहा। जबकि शासन का सख्त निर्देश है कि कोई भी नाबालिग बाइक या स्कूटी लेकर स्कूल के भीतर प्रवेश न करने पाए। इसके बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन बाइक और स्कूटी लेकर स्कूल आने वाले नाबालिगों को स्कूल में प्रवेश दे रहे हैं।

अभिभवको में नही कानून का डर
नियमो के अनुसार नाबालिग के हाथ में स्कूटी या कार देने पर अभिभावको को तीन साल के लिए जाना होगा जेल, जुर्माना भी लगने का नियम है। नाबालिग को गाड़ी चलाने के लिए इजाजत देना ट्रैफिक नियमों का भी उल्लंघन है, इसके लिए भारी जुर्माना भी देना पड़ सकता है और जेल भी जाना पड़ सकता है। देश में गाड़ी चलाने के लिए एक उम्र तय की गई है, इस उम्र से पहले कोई गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जात है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है भारत में गाड़ी चलाने की ये उम्र 18 साल तय की गई है, यानी नाबालिग गाड़ी नहीं चला सकते हैं। हालांकि कई बार देखा गया है कि लोग अपने छोटे बच्चों को भी स्कूटी दे देते हैं।
माता-पिता होंगे जिम्मेदार
हाल ही में ये आदेश जारी किया गया है. इसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि अगर कोई माता-पिता अपने नाबालिग बेटे या बेटी को बाइक या कार चलाने के लिए देते हैं तो वो खुद इसके लिए जिम्मेदार होंगे. इसमें सजा का प्रावधान वाहन के मालिक या फिर पकड़े गए नाबालिग के पिता के लिए है। इसमें बताया गया है कि जिस वाहन को पकड़ा जाता है उसका लाइसेंस भी निरस्त कर दिया जाएगा।
नहीं बन पाएगा लाइसेंस
जिस नाबालिग को गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है, वो 18 साल पूरे होने पर लाइसेंस भी नहीं बना पाएगा। ऐसे लड़के या फिर लड़की को 25 साल तक लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।
क्या बोले जिम्मेदार….
हमारे द्धारा सभी परिजनो को बार बार इसके लिए कहा जाता हे कि किसी भी नाबालिक छात्र को वाहन चलाने नही दिया जाए।
अवनी श्रीवास्तव – प्रार्चाय, केन्द्रीय विधालय, बैकुंठपुर



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