साय सरकार में कोरिया जिले में राम राज्य……..120 ग्राम पंचायतों की निगरानी दो इंजीनियरों के भरोसे……..एक इंजीनियर के जिम्मे करीब 60 पंचायतें, आंगनबाड़ी मरम्मत कार्यों में भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल

Estimated read time 1 min read

एक इंजीनियर के जिम्मे करीब 60 पंचायतें, आंगनबाड़ी मरम्मत कार्यों में भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल

बैकुंठपुर।

कोरिया जिले की ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण, मरम्मत एवं अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले की करीब 120 ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी और मूल्यांकन के लिए आरईएस विभाग से महज दो इंजीनियर-तकनीकी सहायकों की व्यवस्था होने की बात सामने आ रही है। यदि यह व्यवस्था वास्तविक है, तो औसतन एक इंजीनियर के जिम्मे करीब 60 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी आती है। ऐसे में इतने बड़े क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की नियमित एवं प्रभावी निगरानी किस प्रकार संभव होगी, यह बड़ा सवाल है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के माध्यम से सीसी सड़क, नाली, भवन निर्माण, मरम्मत सहित विभिन्न विकास कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों में भी मरम्मत एवं अन्य कार्य चल रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में कार्यों के बीच सीमित तकनीकी अमले के कारण निर्माण की गुणवत्ता की जांच और मौके पर निरीक्षण को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

आनि क्षेत्र में सीसी सड़क निर्माण पर भी सवाल

आनि क्षेत्र में रेस्क्यू से आनि स्कूल तक बनाई गई सीसी सड़क को लेकर भी स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण के दौरान सड़क में सरिया कम डाले जाने की जानकारी संबंधित अधिकारी श्री वैष्णव को दी गई थी। आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद मौके पर निरीक्षण नहीं किया गया और निर्माण कार्य ठेकेदार के स्तर पर ही आगे बढ़ता रहा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों में तकनीकी अधिकारी समय पर मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करें, तो सामग्री की गुणवत्ता, सरिया की मात्रा, सीमेंट-कंक्रीट का अनुपात और निर्माण की निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप जांच संभव है। लेकिन एक तकनीकी कर्मचारी के पास यदि दर्जनों पंचायतों की जिम्मेदारी होगी तो हर कार्यस्थल पर नियमित निगरानी करना मुश्किल हो सकता है।

मूल्यांकन व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

जानकारो की माने तो ग्राम पंचायतों में पूर्ण हो चुके कार्यों के मूल्यांकन को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वहीं कुछ पंचायतों में सरपंच-सचिवों पर कार्यों के संचालन को लेकर दबाव होने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कुछ स्थानों पर बिना स्पष्ट आदेश अथवा निर्धारित प्रक्रिया के ठेकेदारी जैसी व्यवस्था को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 120 ग्राम पंचायतों में कितने तकनीकी अधिकारी तैनात हैं, प्रत्येक अधिकारी के पास कितनी पंचायतों की जिम्मेदारी है तथा निर्माण कार्यों के निरीक्षण और मूल्यांकन की क्या व्यवस्था निर्धारित की गई है।

अब देखना यह होगा कि आनि से रेस्क्यू तक बनी सीसी सड़क सहित जिले में चल रहे अन्य निर्माण कार्य समय की कसौटी पर कितने टिकते हैं। यदि तकनीकी निगरानी व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल आने वाले समय में और गंभीर हो सकते हैं।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours