मझारटोला छात्रावास से लापता 9 वर्षीय बालक का तालाब में मिला शव, अधीक्षक निलंबित

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परिजनों को सूचना देने में देरी पर कलेक्टर ने की कार्रवाई, एसडीएम सोनहत करेंगे पूरे मामले की जांच

बैकुंठपुर।

कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के मझारटोला स्थित आदिवासी बालक आश्रम में रह रहे कक्षा 4वीं के छात्र प्रिंस सिंह उर्फ ‘भीम’ की मौत का मामला सामने आया है। छात्र का शव बुधवार सुबह छात्रावास परिसर के पास स्थित तालाब में तैरता मिला। घटना के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्रम अधीक्षक अशोक एक्का को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए एसडीएम सोनहत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृत बालक प्रिंस सिंह, पिता विजेन्द्र सिंह, ग्राम पंचायत टेंगनी के हरपियारा गांव, थाना पटना क्षेत्र का निवासी था। बताया जा रहा है कि बालक करीब दो दिन पहले ही छात्रावास में आया था। 8 सितंबर को सुबह करीब 7 बजे वह आश्रम में मौजूद नहीं था। छात्र के अनुपस्थित होने की जानकारी सामने आने के बाद उसकी तलाश की गई, लेकिन परिजनों को इसकी सूचना शाम करीब 4 बजे दी गई। सूचना मिलने के बाद परिजन भी बालक की तलाश में जुट गए।

बुधवार सुबह छात्रावास के पास स्थित तालाब में बालक का शव दिखाई देने के बाद घटना की जानकारी पुलिस एवं प्रशासन को दी गई। सूचना मिलते ही अपर कलेक्टर एसके वैद्य, एसडीएम, तहसीलदार, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त, सोनहत थाना प्रभारी सहित पुलिस एवं प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को तालाब से बाहर निकालकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

सूचना देने में देरी पर उठे सवाल

घटना के बाद छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्र के आश्रम से अनुपस्थित होने की जानकारी सामने आने के बाद उच्चाधिकारियों और परिजनों को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई। बालक छात्रावास से निकलकर तालाब तक कैसे पहुंचा, इस दौरान उसकी निगरानी क्यों नहीं हो सकी और उसकी तलाश में तत्काल कौन-कौन से कदम उठाए गए, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रोक्तिमा यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्रम अधीक्षक अशोक एक्का को निलंबित कर दिया है। प्रशासन के अनुसार अधीक्षक द्वारा छात्र के आश्रम में नहीं होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं देना कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना गया है। कलेक्टर ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के प्रावधानों के विपरीत पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कार्रवाई की है।

एसडीएम करेंगे पूरे मामले की जांच

कलेक्टर ने एसडीएम सोनहत को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जांच में छात्र के आश्रम से अनुपस्थित होने की परिस्थितियों, छात्रावास प्रबंधन की भूमिका, निगरानी व्यवस्था तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी का परीक्षण किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निलंबन अवधि में अशोक एक्का का मुख्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, कोरिया कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

इधर, बालक की मौत से उसके परिवार में शोक का माहौल है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने दो दिन पहले ही अपने बच्चे को छात्रावास भेजा था और अब उसकी मौत की खबर ने परिवार को गहरा सदमा दिया है। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं जांच के बाद ही बालक की मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। जिला प्रशासन ने जिले के सभी आश्रमों एवं छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा, नियमित उपस्थिति और सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और देखरेख में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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