लापरवाही……….खुले में फेंक रहे शादी का बचा खाना और उपयोग किए हुए डिस्पोजल, बीमार हो रहे मवेशी

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BAIKUNTHPUR   @  Tahkikat News……… Develop    BY    ASHOK SINGH 

जिले में इन दिनों जहां शादियों की धूम है। आयोजक और कैटर्स शादियों का बचा हुआ खाना और उपयोग किए हुए डिस्पोजल खुले में फेंक रहे हैं। यह मवेशियों के लिए काल का काम कर रहा है। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर में ऐसा खाना खाने से 2 मवेशियों की तबीयत बिगड गई। जिनका उपचार पशु चिकित्सक द्वारा किया जा रहा है। पशुपालको को चाहिए कि वे ध्यान रखें कि मवेशी बचा खाने के साथ प्लास्टिक के दौने व डिस्पोजल न खाएं। इसको खाकर पशु बीमार हो रहे हैं। मवेशियों को इन दिनों पीने का पानी सुलभ नहीं है। जिसके कारण पानी की कमी और विषाक्त भोजन से पशुओ की मौत हो सकती है।


गौरक्षा वाहिनि के जिलाध्यक्ष अनुराग दुबे ने बताया कि कल रात कॉलेज ग्राउंड में एक शादी समारोह की पार्टी थी शादी समारोह का बचा खाना एवं झूठा मलवा ग्राउंड में चारों तरफ ऐसे ही फेंक दिया गया था। इस मलबा को खाने से वहां विचरण कर रहे दो दो गोवंश बीमार पड़े एवं उनका पेट फूल गया। उन्हें फूड प्वाइजन हो गया । जब सुबह मुझे जानकारी मिली जब मैंने वहां जाकर देखा तो वहां बचा हुआ मलबा पढ़ा हुआ था जिसे इन पशुओ के द्धारा खाये जा रहे थे आज रविवार होने के बावजूद मेरी आग्रह पर नगर पालिका अध्यक्ष नविता शिवहरे एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी मुक्ता सिंह चौहान के द्वारा एक सफाई एवं एक प्रभारी कर्मचारी को भेजकर के यह मलबा को डिस्पोजल कराया गया ।

कालेज प्रबंधक केवल शादी समारोह पार्टी समारोह के आयोजकों से पैसे लेने तक का मतलब रहता है उसके बाद सफाई हो या ना हो उससे कोई मतलब नहीं है। इसलिए आप सभी से सादर अनुरोध है कि अगर आप कहीं खुली जगह में इस तरह की शादी पार्टी करते हैं तो बचा हुआ झूठा मलवा एवं बचा हुआ खाना का कोई व्यवस्था जरूर करें कि यह मलबा खाने से कोई गाय फूड प्वाइजन का शिकार न हो सके।

मवेशी को अस्पताल में दिखाएं

इस संबध गौरक्षा वाहिनि के जिलाध्यक्ष अनुराग दुबे ने कहा कि पशु शाम को घर आने के बाद शांत सुस्त और निढाल दिखाई दे, तो तुरंत सावधान हो जाएं। पशु जुगाली नहीं कर रहा हो, मुंह से लार डाल रहा हो तो तुरंत निकट के पशु औषधालय या पशु चिकित्सालय में संपर्क करें। ऐसे मामले में शीघ्र उपचार होने पर ही पशु को लाभ होता है। पशुपालक लापरवाही बरतते हैं तो इसका नुकसान यह होगा कि मवेशियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।

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