सरकार के दमनकारी नितियो के विरोध में सडक पर उतरें बैंककर्मी, 600 करोड़ का कारोबार प्रभावित

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


निजीकरण के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंककर्मी हड़ताल पर रहे तो दो दिनो से बैंकों के ताले लटके रहे। बैंक अधिकारी व कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार करते हुए सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान कोरिया जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर में प्रतिरोध मार्च निकाला और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिससे खाताधारकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सोमवार से यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के आह्वान पर दो दिनी हड़ताल के समर्थन में शहर विभिन्न संगठन से जुड़े बैंक कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के बैनर तले शहर में प्रतिरोध मार्च निकाला।

इस क्रम में हड़ताली कर्मियों ने शहर की मार्च निकालकर मुख्य सडक पर प्रदर्शन किया और निजीकरण का विरोध किया। निजीकरण के नुकसान बताए और वापस लेने की मांग की। इस दौरान बैंक आफ इंडिया के षाखा प्रबंधक विष्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि सरकार निजीकरण के माध्यम से पूंजीपतियों को देश की अर्थव्यवस्था सौंप रही है। बीते चार वर्षों में 14 सार्वजनिक बैंकों का विलय किया गया है। और यदि सरकार नही मानी तो आगे फिर सभी बैंक अनिष्चितकालिन हडताल पर जाने को विवष होगें। सरकार को अपनी षोषणकारी व दमनकारी निति को बंद करना चाहिए।

जिले में दस हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित
बैंक कर्मियों के दो दिनी हड़ताल के चलते स्टेट बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, यूनियन बैंक व अन्य बैंक की शाखाओं में कामकाज नहीं हुआ। जिले के करीब 50 से अधिक बैंक शाखाओं में ताला बंद रहे। बैंक कर्मियों के दो दिन की इस हड़ताल से करीब 600 करोड़ का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। उपभोक्ता व व्यापारी वर्ग को काफी कठिनाई झेलनी पड़ी है।

एटीएम से निराश, ऑनलाइन बना सहारा
हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं ताले लटके रहे। जमा निकासी के लिए आने वाले ग्राहक निराश होकर लौटते नजर आए। पूरे दिन बैंक बंद रहने के कारण एटीएम पर दबाव बढ़ गया। एटीएम खाली होने कारण ग्राहक काफी परेशान दिखे। हालांकि, ऑनलाइन पेमेंट से लोगों को थोड़ी राहत मिल रही है।

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