बिहान से संवारी शकुन्तला की जिंदगी, एक वर्ष में कमाये 17 लाख रूपये

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


टेंट हाउस का काम, जिसे परंपरागत रूप से आदमियों का काम माना जाता है, उस काम को आजीविका के रूप में शुरू कर आज कोरिया जिले के विकासखंड भरतपुर के ग्राम दुघासी की वन्दना स्व सहायता समूह की दीदी शकुन्तला ने परिवार की आर्थिक स्थिति को संभाला और एक वर्ष में अब तक 17 लाख रूपए की आय भी प्राप्त कर चुकी है। जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उनके बच्चे अच्छे से अपनी पढाई कर पा रहे है। अब दोनों पति-पत्नी ने टेंट हाउस के कार्य को ही अपने आजीविका का आधार बनाया है।
शकुन्तला बताती हैं कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, हाल यह था कि आर्थिक तंगी होने की वजह से अपने बच्चों की अच्छे से पढ़ाई की सुविधा मुहैया नहीं करा पाने में मजबूर थी। उनके यहाँ कमाने वाले केवल उनके पति थे जिनकी आमदनी कम होने के कारण घर को चला पाना भी बहुत मुश्किल था। ऐसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया कि अपने घर की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए अपने पति का सहयोगी बनना होगा। उसके उपरान्त उनको आजीविका का चयन करने में बहुत ही कठिनाई हुई क्योकि उनको ऐसे आजीविका का चयन करना था जो ग्रामीणों की आवश्यता हेतु अनिवार्य हो, जिससे उसके संचालन से हानि होने की संभवाना नहीं के बराबर हो, क्योकि उनकी स्थिति ऐसी थी की एक बार यदि हानि हो जाए तो उससे उभर पाना बहुत ही मुश्किल था। इन सभी बातो को ध्यान में रखते हुए उसने ग्रामीणों की आवश्यकता के अनुसार टेंट हाउस को प्रारंभ करने का फैसला लिया।
एनआरएलएम को जिला मिशन प्रबंधक बताते हैं कि विकासखंड भरतपुर के ग्राम दुघासी मे वन्दना स्व सहायता समूह है जिसमे 10 महिलाए है। वन्दना स्व सहायता समूह बिहान योजना द्वारा संचालित है जिसका गठन वर्ष 2018 में किया गया है। वन्दना स्व सहायता समूह के सभी सदस्यों की प्रमुख आजीवका कृषि है। समूह की सदस्य शकुन्तला को टेंट हाउस के कार्य के लिए उन्हें बहुत बड़ी राशि की जरुरत थी जिसके लिए उन्होंने अपने समूह में चर्चा कर बैंक लिंकेज से राशि लिए जाने का प्रस्ताव रखा।
समूह के सभी सदस्यों की सहमति से बैंक ऋण में से 85 हजार रूपए ऋण के रूप में लिया। इस कार्य के लिए उन्होंने अपने पति को अपना सहयोगी बनाया। शुरुवात में ग्राम के छोटे छोटे कार्यक्रम में टेंट लगाने लगे। ग्राम में अन्य कोई भी टेंट हाउस की दूकान नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को कार्यक्रम के लिए दुघासी से 45 किमी. दूर जनकपुर से टेंट सामग्री बुलवाना पड़ता था, जिसमें अधिक राशि की जरूरत पड़ती थी। जब से शकुन्तला के द्वारा टेंट हाउस की दुकान खोला गया तब से ग्रामीणों को बहुत ही आसानी से टेंट का सामान कम किराये में उनके ग्राम में ही मिल जाता है। ग्राम व विकासखण्ड स्तर में ग्रामीणों के द्वारा टेंट के सामनो को किराया से लिया जाता है और टेंट संबंधित व अन्य सामग्री के क्रय कर विवरण व्यवस्थित रूप से संधारित किया जाता है। इसके आलवा प्राप्त लाभ राशि से सकुन्तला के द्वारा बैंक ऋण की किस्त जमा की जाती है और अपने घर के खर्चों में अपने परिवार का सहयोग किया जाता है।

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